Thursday, July 2, 2026
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पत्नी पर जान से मरवाने, 50 हजार की मांग और बच्चों के अपहरण की धमकी का आरोप, पीड़ित पति ने थाने में लगाई गुहार

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जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर से पति-पत्नी के विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हरमाड़ा थाना क्षेत्र में रहने वाले एक युवक ने अपनी पत्नी, ससुर और अन्य लोगों पर जान से मारने की धमकी, जबरन पैसों की मांग, मानसिक प्रताड़ना तथा परिवार के मासूम बच्चों के अपहरण की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का कहना है कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण वह और उसका पूरा परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।

पीड़ित अनुज जाटव पुत्र मोहर सिंह ने हरमाड़ा थाना पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि करीब ढाई से तीन वर्ष पहले उसने कुसुम कुमारी से मंदिर में विवाह किया था। शादी के बाद कुछ समय तक दोनों साथ रहे, लेकिन पिछले कई महीनों से पत्नी का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। शिकायत के अनुसार पत्नी आए दिन बिना बताए घर से चली जाती थी और विरोध करने पर गाली-गलौज तथा झगड़ा करती थी। अनुज का आरोप है कि पत्नी साफ तौर पर कहती थी कि वह उसके साथ नहीं रहना चाहती और उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

शिकायत में अनुज ने आरोप लगाया है कि करीब तीन महीने पहले उसकी पत्नी बिना बताए घर छोड़कर चली गई। जब उसने मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की तो कथित रूप से उसे जान से मरवाने और घर से बाहर निकलने पर हमला करवाने की धमकियां दी गईं। इतना ही नहीं, अनुज का आरोप है कि जब उसने अपने ससुर भूपेंद्र सिंह से बातचीत की तो उन्होंने कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग करते हुए कहा कि रकम देने पर ही बेटी उसके साथ रहेगी, अन्यथा न साथ रहेगी और न ही तलाक देगी।

पीड़ित ने अपनी शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी जयपुर में एक स्पा सेंटर में “पूजा” नाम से काम करती है। उसका दावा है कि उसे जानकारी मिली है कि स्पा की आड़ में अनैतिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इनकी जांच पुलिस द्वारा की जानी बाकी है।

अनुज ने यह भी आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी देर रात कई युवकों को लेकर उसके घर पहुंचती थी, जहां कथित रूप से उसे डराया-धमकाया जाता था और पैसों की मांग की जाती थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि उसकी बड़ी बहन भूरा देवी के छोटे बच्चों का अपहरण कराने की धमकी भी दी जाती रही है। पीड़ित का कहना है कि उसकी पत्नी अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार धमकी भरे फोन करवाती है और पहले भी दो बार उसका एक्सीडेंट कराने की कोशिश कर चुकी है।

अनुज ने बताया कि वह पिछले लगभग 10 से 11 वर्षों से जयपुर में मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहा है। बजरी की गाड़ियां खाली करने का कार्य कर वह अपनी मां और बहन के साथ जीवनयापन करता है। उसके पिता का बचपन में ही निधन हो गया था, जिसके बाद मां और बहन ने कठिन परिस्थितियों में उसे बड़ा किया। अब परिवार का आरोप है कि लगातार मिल रही धमकियों से उनका सामान्य जीवन प्रभावित हो गया है।

पीड़ित ने हरमाड़ा थाना पुलिस से पत्नी कुसुम कुमारी के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। वहीं, इस मामले में लगाए गए सभी आरोप शिकायतकर्ता के आवेदन पर आधारित हैं। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की सत्यता स्पष्ट ह

चलती बस में ड्राइवर को आया हार्ट अटैक, मौके पर हुई मौत, सवारियों ने अपनी सूझबूझ से बचाई जान

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अलीगढ़ के गोरई में चलती बस के ड्राइवर को अचानक दिल का दौरा पड़ गया। ड्राइवर की हालत बिगड़ने से बस बेकाबू हो गई। यात्रियों ने सूझबूझ से बस को संभालने की कोशिश की, लेकिन बस बिजली के पोल और गाय से टकरा गई।
अलीगढ़ के गोरई थाना क्षेत्र में एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां चलती बस में चालक को अचानक दिल का दौरा पड़ गया। चालक की हालत बिगड़ते देख बस में सवार यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया। यात्रियों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए बस को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन अनियंत्रित होने के कारण बस अंततः एक बिजली के पोल और गाय से जा टकराई। हालांकि इसमें किसी भी यात्री को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।

बिजली के पोल और गाय से टकराई बस
मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना मथुरा डिपो की बस (नंबर: UP.78.KT.3189) के साथ हुई, जो यात्रियों को लेकर अलीगढ़ की ओर जा रही थी। गोरई थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव ‘नया बांस’ के पास अचानक चालक को तेज हार्ट अटैक आया, जिसके कारण मौके पर ही उनकी मौत हो गई। चालक के बेहोश होते ही बस पूरी तरह अनियंत्रित हो गई और रास्ते में एक बिजली के पोल तथा गाय से टकराकर रुकी।
यात्रियों की सूझबूझ ने टाला बड़ा हादसा
इस बेहद संवेदनशील और मुश्किल घड़ी में बस में बैठे यात्रियों की सतर्कता ने एक बेहद भीषण हादसे को होने से रोक लिया। जब कुछ यात्रियों ने देखा कि बस का चालक अपनी सीट पर अचेत होकर लटका हुआ है, तो उन्होंने बिना वक्त गंवाए स्थिति की गंभीरता को समझा। यात्रियों ने तुरंत आगे बढ़कर बस को संभालने की कोशिश की। उनकी इसी त्वरित जागरूकता और बहादुरी की वजह से बस में सवार सभी यात्रियों की जान सुरक्षित रही और एक बड़ा हादसा होने से टल गया। हालांकि, इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में चालक को नहीं बचाया जा सका।

पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और स्थानीय लोगों की मदद
घटना की सूचना मिलते ही गोरई थाना पुलिस और स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंच गए। अलीगढ़ पुलिस ने इस पूरे मामले पर कहा कि बस के बेकाबू होकर पेड़ से टकराने की खबर मिलते ही पुलिस की टीम ने मौके पर जाकर जांच की। बस ड्राइवर की तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान ड्राइवर की मौत हो गई, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

दिल्ली में सफर होगा और आसान! 156 टोल नाकों पर लागू होगा नया हाईटेक सिस्टम, बिना रुके निकलेंगी गाड़ियां

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दिल्ली के सभी 156 टोल नाकों पर जल्द ही बैरियर-रहित मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम (MLFS) लागू किया जाएगा। इस नई तकनीक की मदद से वाहन बिना रुके टोल पार कर सकेंगे, जिससे समय की बचत होगी और ट्रैफिक जाम भी कम होगा।
दिल्ली में जल्द ही टोल प्लाजा पर लंबी कतारों और बार-बार रुकने की परेशानी से राहत मिल सकती है। राजधानी के सभी 156 टोल नाकों पर आधुनिक मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है। इस हाईटेक व्यवस्था के लागू होने के बाद वाहन बिना बैरियर के टोल पार कर सकेंगे और टोल टैक्स अपने आप कट जाएगा। नई व्यवस्था से ट्रैफिक जाम कम होने के साथ-साथ यात्रा भी पहले से ज्यादा तेज और आसान हो जाएगी।
क्या है नया हाईटेक सिस्टम?
दिल्ली नगर निगम (MCD) सभी 156 टोल नाकों पर मल्टी लेन फ्री फ्लो सिस्टम (MLFS) विकसित करेगा। इस तकनीक को फास्टैग और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा। जैसे ही कोई वाहन टोल से गुजरेगा, कैमरे उसकी नंबर प्लेट पहचानेंगे और फास्टैग के जरिए टोल अपने आप कट जाएगा। इसके लिए वाहन को बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाया गया कदम
नगर निगम ने इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए MCD अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। नई तकनीक लागू होने के बाद दिल्ली के टोल नाकों पर लगने वाले लंबे जाम में काफी कमी आने की उम्मीद है।

नियम तोड़ने वालों पर लगेगा भारी जुर्माना
नए नियमों के तहत यदि कोई वाहन चालक खराब या पढ़ने योग्य नहीं होने वाली नंबर प्लेट का इस्तेमाल करता है या टोल कर्मचारियों और निगम कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करता है, तो उसे प्रति प्रवेश टोल शुल्क का पांच गुना तक जुर्माना देना पड़ सकता है। पहले इस तरह के मामलों में अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाता था।

कमर्शियल वाहनों पर बढ़ सकता है टोल
नए उपनियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि कमर्शियल वाहनों के बेसिक टोल रेट में हर साल 5 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की जा सकेगी। भविष्य में जरूरत पड़ने पर अलग-अलग कैटेगरी के ट्रकों और भारी वाहनों के टोल शुल्क को अधिकतम 2,000 रुपये तक बढ़ाने का अधिकार भी निगम के पास होगा। इससे पहले अप्रैल में कमर्शियल वाहनों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ECC) भी बढ़ाया गया था।

26 साल पुराने फतेहपुर एनकाउंटर केस में बड़ा मोड़, हाईकोर्ट के आदेश से फिर खुली फाइल,

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आजीवन कारावास भुगत रहे कैदी ने बताई अपनी दर्दनाक आपबीती, NHRC से CBCID जांच की गुहार

फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बहुचर्चित वर्ष 2000 के एनकाउंटर और दोहरे हत्याकांड से जुड़े मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट फतेहपुर ने मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी अपीलकर्ताओं के जीवित अथवा मृत होने की स्थिति की जांच कराने और विस्तृत रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया है। इसी बीच आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी श्री किशन के पुत्र ओम प्रकाश ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से पूरे मामले की CBCID जांच कराने की मांग कर दी है। इस घटनाक्रम ने 26 वर्ष पुराने इस चर्चित मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अपराध संख्या 106/2000 थाना असोथर में भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 302, 307, 332, 336 एवं 225 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। वर्ष 2007 में इस मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उन्हीं में ग्राम मैकुआपुर उर्फ खबरा मजरा सरकंडी निवासी श्री किशन पुत्र शीतल उर्फ शीतलुवा भी शामिल हैं, जो वर्तमान में केंद्रीय कारागार नैनी, प्रयागराज में निरुद्ध हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजे गए प्रार्थना पत्र में श्री किशन ने अपनी पूरी घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि घटना वाले दिन 4 सितंबर 2000 की सुबह वह अपने खेत में हंसिया लेकर पशुओं के लिए चारा काटने गए थे। उनके अनुसार अचानक गांव के पास पुलिस और कथित बदमाशों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। उन्होंने आरोप लगाया है कि मौके पर मौजूद कई ग्रामीण गोलीबारी की चपेट में आ गए और अफरा-तफरी मच गई। उनके मुताबिक उन्होंने भागने का प्रयास नहीं किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें घेर लिया और उन पर कई राउंड फायरिंग की, जिसमें एक गोली उनके दाहिने हाथ में लगी और वह घायल होकर खेत में गिर पड़े।

प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि घायल अवस्था में पड़े रहने के दौरान कुछ पुलिसकर्मी उन्हें मृत समझकर कथित रूप से खत्म करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान एक वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिन्होंने हस्तक्षेप करते हुए उन्हें बचाया। श्री किशन का कहना है कि बाद में उन्हें उपचार देने के बाद थाने ले जाया गया, जहां कथित रूप से उनके खिलाफ पुलिसकर्मियों की हत्या, हथियार बरामदगी और अन्य गंभीर आरोप दर्ज कर दिए गए। उनका आरोप है कि वह अशिक्षित होने के कारण उनसे बिना सही जानकारी दिए अंगूठा लगवा लिया गया और बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया।

प्रार्थना पत्र में श्री किशन ने यह भी दावा किया है कि पूरे मामले की जड़ गांव की पुरानी रंजिश और कथित मुखबिरी थी, जिसके कारण निर्दोष लोगों को आरोपी बना दिया गया। उनका कहना है कि कई सह-आरोपी जमानत पर बाहर आ चुके हैं अथवा उनकी मृत्यु हो चुकी है, जबकि वह वर्ष 2007 से लगातार आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मांग की है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष CBCID जांच कराई जाए तो वास्तविक सच्चाई सामने आ सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाएं तो उन्हें कानून के अनुसार कठोर से कठोर सजा दी जाए, लेकिन यदि निर्दोष हों तो उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

उधर, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट फतेहपुर ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि सभी अपीलकर्ताओं के जीवित अथवा मृत होने की सत्यापित रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। यदि किसी अपीलकर्ता की मृत्यु हो चुकी हो तो इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संपूर्ण कार्यवाही कर रिपोर्ट न्यायालय में दाखिल की जाए। इसके साथ ही वादी, ग्राम प्रधान, मृतक अपीलकर्ता के निकटतम परिजन तथा जांच अधिकारी को आधार कार्ड और नवीनतम रंगीन फोटो के साथ न्यायालय में उपस्थित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

हालांकि श्री किशन द्वारा लगाए गए आरोप उनके प्रार्थना पत्र पर आधारित हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि न्यायालय अथवा किसी जांच एजेंसी द्वारा अभी नहीं की गई है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया और CBCID जांच की मांग पर होने वाले निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि इस मामले में आगे निष्पक्ष जांच के आदेश होते हैं तो 26 वर्ष पुराने इस बहुचर्चित प्रकरण में कई नए तथ्य सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

14 दिनों में 50 करोड़ रुपयों के पार पहुंची ‘मैं वापस आऊंगा’ की कमाई, शाहिद कपूर की ‘कॉकटेल’ ने कमाए 70 करोड़

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मैं वापस आऊंगा फिल्म ने 14 दिनों में 51 करोड़ रुपयों का कलेक्शन कर लिया है। वहीं शाहिद कपूर स्टारर कॉकटेल 2 ने 70 करोड़ रुपयों का कलेक्शन कर लिया है।
हर फिल्म को पहले ही दिन अपना दर्शक वर्ग नहीं मिल पाता और ‘मैं वापस आऊंगा’ के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत के बाद, इम्तियाज अली की इस नई फिल्म ने दर्शकों की पॉजिटिव प्रतिक्रिया के साथ धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ी है, जिससे यह फिल्म सिनेमाघरों में दो हफ्ते पूरे करने के बाद भी मजबूती से अपनी जगह बनाए हुए है। दिलजीत दोसांझ, नसीरुद्दीन शाह, शरवरी और वेदांग रैना स्टारर यह फिल्म 12 जून, 2026 को रिलीज हुई थी। जहां कड़े मुकाबले के कारण इसका पहला हफ्ता उम्मीद से कमजोर रहा, वहीं दूसरे हफ्ते में स्थिति बिल्कुल बदल गई, लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया और कलाकारों के बेहतरीन अभिनय की तारीफ ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचना जारी रखा।

14वें दिन कमाए 2.30 करोड़ रुपये
‘मैं वापस आऊंगा’ ने भारत में अपने 14वें दिन अनुमानित 2.30 करोड़ की नेट कमाई की। हालांकि पिछले कुछ दिनों के मुकाबले कलेक्शन में गिरावट आई है, लेकिन यह गिरावट आम तौर पर हफ्ते के दिनों में होने वाले ट्रेंड के मुताबिक ही है, क्योंकि फिल्में अपने तीसरे हफ्ते के करीब पहुंचती हैं और धीरे-धीरे उन्हें मिलने वाले प्रीमियम शो टाइमिंग और कुछ स्क्रीन कम हो जाते हैं। इससे एक दिन पहले, फिल्म ने भारत में 2.60 करोड़ नेट कमाए थे। यह कमाई 12वें दिन के 3.10 करोड़ के बाद हुई, जिसमें हफ्ते के दिनों में 16.1% की गिरावट देखी गई। इसके बावजूद, फिल्म ने अपने दूसरे बुधवार को 2,923 शो में 20% की अच्छी ऑक्यूपेंसी बनाए रखी, जिससे पता चलता है कि दर्शकों से मिल रहे लगातार अच्छे रिस्पॉन्स की वजह से एग्ज़िबिटर्स ने फिल्म को सपोर्ट करना जारी रखा। दूसरे हफ्ते के आखिर तक, ‘मैं वापस आऊंगा’ ने भारत में अनुमानित 34.75 करोड़ नेट कमाए। फिल्म ने दुनिया भर में भी एक अहम मुकाम हासिल किया है और इसकी कुल कमाई 51.78 करोड़ तक पहुंच गई है, जिससे यह घरेलू और विदेशी दोनों बाजारों में एक फायदेमंद फिल्म साबित हुई है।

कॉकटेल 2 ने भी की अच्छी कमाई
शाहिद कपूर, रश्मिका मंदाना और कृति सैनन स्टारर फिल्म कॉकटेल 2 भी अच्छी कमाई कर रही है। फिल्म ने पहले ही 70 करोड़ रुपयों का कलेक्शन कर लिया है। ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के अनुसार फिल्म ने गुरुवार को 4.15 करोड़ (नेट) की कमाई की, जिससे सात दिनों में इसका कुल कलेक्शन 70.40 करोड़ हो गया। बुधवार को इसने 5.25 करोड़ कमाए थे, इसलिए गुरुवार को कमाई में थोड़ी और गिरावट देखी गई।

बड़ी खबर! राम मंदिर चंदा चोरी केस में चंपत राय की छुट्टी, ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने भी दिया इस्तीफा

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राम मंदिर चंदा चोरी केस में अब इस्तीफे की घड़ी शुरू हो गई है। मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दिया है।
राम मंदिर चंदा चोरी मामले में बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर ट्रस्ट से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में ये सबसे कदम है। अभी तक चंपत राय अनिल मिश्रा का नाम FIR में नहीं है ऐसे में इस्तीफा देने के बाद इन पर जांच की आंच बढ़ सकती है।

उधर, SIT की रिपोर्ट आने के बाद अब कार्रवाई शुरू हो गई है। चंदा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों का मेडिकल टेस्ट कराने के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। SIT की शुरुआती रिपोर्ट में जो बातें सामने आई है, उसमें कहा गया कि चंदा की निगरानी में कमी हुई है। SOP को ठीक ढंग से लागू नहीं किया गया है जिसकी वजह से चंदा चोरी हुई है। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद बताया जा रहा था कि चंपत राय नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देंगे।

चंदा चोरी केस में कौन-कौन गिरफ्तार?
चंदा चोरी के मामले में पुलिस ने जिन 8 लोगों को गिरफ्तार किया है उसमें चंपत राय का बेहद करीबी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव भी शामिल है।
इसके अलावा टिन्नू यादव का भतीजा मनीष यादव को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
चंदा चोरी के आरोप में लवकुश मिश्रा और उसके रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया है। जिस सुभाष श्रीवास्तव पर कैश काउंटिंग की निगरानी जिम्मेदारी थी, जो सीधे अनिल मिश्रा को रिपोर्ट करता था, उस सुभाष श्रीवास्तव को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
CM योगी ने दी क्लीयर कट चेतावनी
वहीं, राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में सीएम योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में हैं। आज देवरिया से सीएम योगी ने एक बार फिर आस्था से खिलवाड़ करने वालों को क्लीयर कट चेतावनी दी और कहा कि जन आस्था से जिसने भी खिलवाड़ किया है, बचेगा नहीं। दूध का दूध पानी का पानी कर के रहेंगे।

सीएम योगी ने कहा, ”19 जून को कहा था कि SIT की रिपोर्ट आते ही एक्शन होगा। ठीक एक हफ्ते बाद कार्रवाई आप सबके सामने हैं। जो भी राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में शामिल है। सबसे हिसाब किताब चुकता होगा। SIT की टीम एक एक आरोपी को ढूंढ कर बाहर निकालेगी, किसी को भी छूट नहीं है। सनातन आस्था के साथ जो भी खेलेगा उसका अंजाम उसे भुगतना पड़ेगा।” सीएम योगी ने कहा है कि राम मंदिर को लेकर आरोप लगाने वालों की मंशा ठीक नहीं है।

हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर टेंशन, पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़ आगे बढ़े निहंग; क्या है कर्णप्रयाग-नगरासू गुरुद्वारा विवाद?

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उत्तराखंड के कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद बढ़ता जा रहा है। हिमाचल से निहंगों का एक जत्था पुलिस का सुरक्षा घेरा तोड़कर उत्तराखंड में घुस गया, जिससे देहरादून में हड़कंप मच गया।
उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में निहंग सिखों के साथ हुए विवाद के बाद पुलिस ने हिमाचल-उत्तराखंड बॉर्डर पर पहुंच रहे निहंगों को रोक दिया है। इसके बाद काफी संख्या में निहंग इकट्ठा हो गए और जमकर नारेबाजी की। आरोप है कि विकासनगर के कुल्हाल बॉर्डर पर निहंगों ने पथराव किया और बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ गए। इसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालते हुए हालात को नियंत्रित करने की कोशिश की।
कुल्हाल बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी
निहंग सिखों के हंगामे के बाद बॉर्डर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और आने-जाने वाली गाड़ियों की सघन जांच की जा रही है। कर्णप्रयाग विवाद के बाद निहंग सिखों के उत्तराखंड कूच के ऐलान को लेकर कुल्हाल बॉर्डर सहित सभी सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

उत्तराखंड पुलिस, आईटीबीपी और प्रशासनिक अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तो इधर उत्तराखंड प्रशासन, हिमाचल प्रशासन और निहंग सिखों के प्रतिनिधियों के बीच पोंटा साहिब स्थित गुरुद्वारे में बातचीत भी जारी है जिससे कि मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।
गुरुद्वारे में निहंगों के बीच क्या विवाद हुआ था?
बता दें कि 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंगों और स्थानीय लोगों की बीच मारपीट हुई थी, जिसमें 4 स्थानीय लोग घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस ने चार निहंगों को गिरफ्तार किया है। शनिवार को निहंगों ने नगरासू स्थित गुरुद्वारा पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद मंगलवार को स्थानीय प्रशासन और पंजाब शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद इसे मुक्त करा लिया गया था।

वहीं, बॉर्डर पहुंचे निहंगों ने कहा कि हम कोई कानून व्यवस्था खराब नहीं करना चाहते हैं। सिर्फ शांतिपूर्वक सतनाम वाहेगुरु का जाप करते हुए हेमकुंड साहिब जाना चाहते हैं। निहंगों ने मांग की कि उनके गिरफ्तार किए गए चारों साथियों को रिहा करके पंजाब भेजा जाए। जब तक उनके साथी नहीं मिलेंगे, तब तक वह वापस नहीं जाएंगे।

पुलिस ने बताई पूरी सच्चाई
वहीं, रुद्रप्रयाग में ‘नगरासू गुरुद्वारा विवाद’ को लेकर पुलिस ने पूरी सच्चाई बताई थी। निहंग सिखों के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारी को खारिज करते हुए, गढ़वाल के इंस्पेक्टर जनरल राजीव स्वरूप ने कहा था, “यह घटना शुरू में निहंग श्रद्धालुओं और उस गुरुद्वारे के मैनेजमेंट के बीच विवाद के तौर पर शुरू हुई थी, जहां वे लंगर खा रहे थे। बहस के बाद, मैनेजमेंट ने 112 पर कॉल किया, जिस पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की। पुलिस को देखकर कुछ निहंग श्रद्धालु घबरा गए और खुद को इमारत की छत पर बंद कर लिया। उनसे कई दौर की बातचीत हुई।”

खानदानी संपत्ति पर फर्जीवाड़े का आरोप, पुश्तैनी जमीन बेचने का दावा; पीड़ित बोला- जहां बुलाया जाएगा, सबूतों के साथ हाजिर हो जाऊंगा

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पटना।

बिहार के पटना जिले के बिहटा थाना क्षेत्र से खानदानी संपत्ति को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन को कथित रूप से फर्जीवाड़ा कर बेच दिया गया है। मामले को लेकर परिवार के सदस्य लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि वे किसी भी सक्षम न्यायिक अथवा प्रशासनिक मंच पर अपने सभी दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।

पीड़ित पप्पू कुमार ने बताया कि वह थाना नेउरा, जिला पटना के निवासी हैं। उनके अनुसार जिस संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा है, वह उनके पूर्वजों की खानदानी संपत्ति है। उनका दावा है कि यह जमीन चार पाटीदारों की संयुक्त पैतृक संपत्ति थी। समय के साथ परिवार के कुछ सदस्यों की मृत्यु होने और हिस्सेदारी में बदलाव के बाद संपत्ति का बंटवारा होना था, लेकिन कथित रूप से कुछ लोगों ने तीसरे हिस्सेदार के अधिकार को नकारते हुए जमीन को अपना बताकर बेच दिया।

पीड़ित का आरोप है कि परिवार के दो पाटीदार लगातार यह दावा कर रहे हैं कि तीसरे हिस्सेदार का इस जमीन पर कोई अधिकार नहीं है, जबकि उनके पास उपलब्ध वंशावली, पारिवारिक अभिलेख और अन्य दस्तावेज स्पष्ट रूप से संयुक्त स्वामित्व को दर्शाते हैं। उनका कहना है कि यह पूरा मामला धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के माध्यम से खानदानी संपत्ति हड़पने का प्रयास है। पीड़ित का कहना है सी ओ पैसे लेकर गलत रसीद काट दी है

मामले में सामने आए लिखित बयानों में आकाश कुमार और संजय कुमार ने भी यह दावा किया है कि संबंधित भूमि उनकी खानदानी संपत्ति है, जिसे कथित रूप से फर्जी तरीके से बेचा गया है। दोनों का कहना है कि यदि किसी भी स्तर पर जांच या सुनवाई होती है तो वे अपने सभी साक्ष्य और आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने को तैयार हैं।

पीड़ित ने ग्राम कचहरी द्वारा जारी वंशावली प्रमाण पत्र का भी हवाला दिया है, जिसमें परिवार के पूर्वजों और उत्तराधिकारियों का विस्तृत विवरण दर्ज होने का दावा किया गया है। उनका कहना है कि यही दस्तावेज उनके पैतृक अधिकार का सबसे बड़ा आधार है, लेकिन इसके बावजूद उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है।

पप्पू कुमार का आरोप है कि लंबे समय से प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें देने के बावजूद विवाद का समाधान नहीं हो सका है। इससे पूरा परिवार मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक उत्तराधिकारियों के अधिकार सुरक्षित नहीं किए गए तो भविष्य में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो सकता है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, कथित फर्जीवाड़े से हुए भूमि हस्तांतरण की वैधानिक जांच हो तथा वास्तविक उत्तराधिकारियों को न्याय दिलाते हुए उनकी खानदानी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

सरकारी नलकूप पर दबंगों का कब्जा, ताले में कैद हुई सिंचाई, सूखने लगी धान और मक्का की फसल, किसानों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

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फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले से किसानों की परेशानियों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। मोहम्मदाबाद ब्लॉक के ग्राम नगला मन्न, मौजा सितवनपुर पिथू में सरकारी नलकूप पर कथित तौर पर दबंगों द्वारा कब्जा कर ताला लगाए जाने का आरोप लगा है। इससे दर्जनों किसानों की धान और मक्का की फसल सिंचाई के अभाव में सूखने लगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शिकायत के बावजूद न तो सिंचाई विभाग ने कार्रवाई की और न ही प्रशासन ने समस्या का समाधान कराया। मजबूर होकर किसानों ने मुख्यमंत्री को शिकायत भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

शिकायत के अनुसार गांव में स्थापित सरकारी नलकूप संख्या 20 एफजी वर्षों से आसपास के लगभग 50 किसानों के खेतों की सिंचाई का प्रमुख साधन रहा है। किसानों का कहना है कि इस नलकूप के लिए ग्रामीण गिरीश चंद्र ने अपनी निजी जमीन उपलब्ध कराई थी, जिसके बाद यहां सरकारी ट्यूबवेल स्थापित किया गया था। लंबे समय तक इसका संचालन भी सुचारु रूप से होता रहा, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कुछ दबंग लोगों ने जबरन नलकूप की चाबी छीनकर उस पर अपना ताला लगा दिया और कब्जा कर लिया। इसके चलते सरकारी नलकूप बंद पड़ा है
सिंचाई अधिकारी नेम सिंह इन्होंने अपनी पहचान के गुंडे करवा के उसे पर ताला लगवाया सरकारी कर्मचारी होते हुए भी इस तरह की दबंगई दिखा रहे हैं और किसानों को समय पर सिंचाई नहीं मिल पा रही। धान की रोपाई के लिए तैयार पौध और मक्का की खड़ी फसल लगातार सूख रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग से मदद मांगी तो संबंधित ट्यूबवेल ऑपरेटर ने पेट्रोल का खर्च देने की शर्त रख दी। किसानों का कहना है कि ऑपरेटर ने स्पष्ट कहा कि यदि पेट्रोल का पैसा नहीं मिलेगा तो वह नलकूप चलाने नहीं आएगा। ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली।

किसानों का आरोप है कि विभाग के अमीन और एसडीओ ने भी यही कहा कि यदि ग्रामीण पेट्रोल का खर्च देंगे तभी ऑपरेटर नलकूप का संचालन करेगा। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि जब सरकार ऑपरेटर को वेतन देती है तो फिर गरीब किसानों से अतिरिक्त पेट्रोल खर्च क्यों वसूला जा रहा है।

सबसे बड़ी विडंबना यह बताई जा रही है कि जिस किसान ने अपनी जमीन देकर सरकारी नलकूप लगवाने में सहयोग किया, आज उसी के खेत की फसल पानी के अभाव में सूख रही है। ग्रामीणों का कहना है कि दबंगों के कब्जे और विभागीय लापरवाही के कारण पूरे गांव के किसान संकट में हैं।

मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में किसानों ने मांग की है कि सरकारी नलकूप पर कब्जा करने वाले आरोपितों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराई जाए। साथ ही ट्यूबवेल ऑपरेटर को तुरंत नलकूप चालू करने का आदेश दिया जाए, ताकि धान और मक्का की फसल को बचाया जा सके और किसानों को राहत मिल सके।

इस शिकायत पर अब किसानों की निगाहें प्रशासन और राज्य सरकार की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो सिंचाई के अभाव में दर्जनों किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से नहीं हुई है।

‘परमाणु हथियार’ को लेकर ट्रंप का बयान, ईरान ने होर्मुज़ में जहाज़ पर किया हमला, क्या होगा शांति वार्ता का?

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ईरान ने होर्मुज में जहाज पर हमला कर दिया, ट्रंप ने कहा है कि ईरान के पास अगर परमाणु हथियार होता तो वो इस्तेमाल कर लेता। इस बीच, ईरान ने इजरायल को धमकी दी है। जानें ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में आगे क्या होगा?
ईरान-अमेरिका शांति वार्ता: शांति वार्ता के बीच ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर हमला कर दिया। यह हमला तब हुआ, जब कुछ ही घंटे पहले ईरान ने जहाज़ों को चेतावनी दी थी कि वे तेहरान की मंज़ूरी के बिना इस होर्मुज वाले रास्ते का इस्तेमाल न करें। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी के सेक्रेटरी-जनरल आर्सेनियो डोमिंग्वेज़ ने कहा कि जिस जहाज़ पर हमला हुआ, वह निकासी अभियान का हिस्सा नहीं था। एपी की रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के प्रमुख ने कहा कि फ़ारस की खाड़ी में फंसे जहाज़ों को होर्मुज से बाहर निकालने की योजना तब तक रोकी रहेगी, जब तक एजेंसी उस इलाके में और निकासी सूची में शामिल जहाज़ों की सुरक्षा की गारंटी पक्की नहीं कर लेती।
ईरान-इजरायल और अमेरिका ने क्या क्या कहा?

वहीं, इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है, “ईरान पहले घंटे में ही परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर सकता था; अब वे इसे हासिल नहीं करने पर सहमत हो गए हैं।” एक जहाज़ पर हमले के बाद UN की समुद्री एजेंसी ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों को निकालने की योजना रोक दी है। इस बीच, इजरायल को ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है, ईरान ने कहा है- लेबनान छोड़ो, वरना शर्मनाक हार का सामना करने के लिए तैयार रहो।

ईरान ने ट्रंप के विचार को खारिज क्यों किया?
ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी ग़ालिबाफ़ ने कृषि उत्पाद खरीदने के लिए ईरानी पैसे का इस्तेमाल करने के ट्रंप के विचार को खारिज कर दिया। ग़ालिबाफ़ ने हाल ही में X पर लिखा, “अमेरिका झूठा दावा करता है कि हमारी अनफ्रीज़ की गई संपत्ति से उनके कृषि उत्पाद खरीदे जाएंगे। दिलचस्प है। हम तो बस वही फसल काट रहे हैं जो आपने बोई थी: दशकों का अविश्वास।”

अमेरिकी विदेश मंत्री का बड़ा बयान, जानें क्या कहा?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध खत्म करने के लिए समझौता तो करना चाहता है, लेकिन “किसी भी कीमत पर” नहीं। उन्होंने यह भी दोहराया कि होर्मुज (Strait of Hormuz) में टोल लगाना मंज़ूर नहीं है। बहरीन में रुबियो ने गुरुवार को कहा, “आप इसे टोल कहें, फ़ीस कहें या कुछ भी कहें, यह शब्दों का खेल है। यह किसी भी समझौते की मंज़ूर करने लायक शर्त कभी नहीं होगी।”

रुबियो ने कहा कि अगर ईरान जलडमरूमध्य से गुज़रने के लिए पैसे वसूलता है, तो दुनिया के किसी भी देश को जलमार्ग के पास ऐसा ही करने से कोई नहीं रोक पाएगा “और फिर हर तरफ़ अफ़रा-तफ़री मच जाएगी।”

हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है, लेकिन गुरुवार को तेल और गैस की सप्लाई के लिए अहम इस रास्ते पर कुछ उलझन की स्थिति दिखी। ब्रिटेन के एक नौसैनिक समूह ने बताया कि एक जहाज पर तब हमला हुआ, जब कई मालवाहक जहाज़ों ने जलमार्ग से गुज़रने की कोशिश के दौरान अपना रास्ता बदल लिया था।