Thursday, July 2, 2026
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जल्द ही भारत आएंगे ट्रंप, पीएम मोदी के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं-मार्को रुबियो ने बताया

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत के दौरे पर आएंगे। मार्को रुबियो ने बताया, पीएम मोदी के साथ उनके संबंध बहुत अच्छे हैं। जानें अमेरिका ने और क्या जानकारी दी है?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शनिवार को बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले साल की शुरुआत में भारत आने की संभावना है। उन्होंने ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मज़बूत रिश्ते पर ज़ोर दिया और भारत-अमेरिका संबंधों को “शानदार” बताया। वॉशिंगटन डीसी में समाचार एजेंसी IANS से ​​बात करते हुए रुबियो ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति की यात्रा की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए वे इस साल के अंत से पहले भारत की यात्रा करेंगे। रुबियो ने कहा, पीएम मोदी के साथ ट्रंप के संबंध बहुत अच्छे हैं।

रुबियो ने और क्या क्या बताया
रूबियो ने कहा, “हम इस दिशा में काम कर रहे हैं और हमें उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत आएंगे। मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छी बात है। भारत, अमेरिका का बहुत करीबी पार्टनर और सहयोगी है, और प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच संबंध इससे बेहतर नहीं हो सकते; मुझे लगता है कि दोनों देशों के बीच की कूटनीति में यह बहुत अहम है।”

दूसरे कार्यकाल में ट्रंप की पहली भारत यात्रा
रुबियो की जानकारी के मुताबिक अगर ट्रंप का यह भारत दौरा होता है, तो यह फरवरी 2020 के बाद और ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए व्हाइट हाउस लौटने के बाद ट्रंप की भारत की पहली यात्रा होगी। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की पिछली मुलाकात फ्रांस के एवियन में G7 समिट के दौरान हुई थी, जो 16 महीनों में उनकी पहली द्विपक्षीय बैठक थी।

भारत अमेरिका के संबंध पर क्या होगा असर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह प्रस्तावित भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसके बारे में रुबियो ने कहा कि यह पूरा होने के करीब है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सब कुछ बहुत बढ़िया चल रहा है। यह बहुत मज़बूत है। G7 में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के बीच बहुत अच्छी बैठक हुई थी। हम एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की उम्मीद कर रहे हैं। हम इसे पूरा करने के बिल्कुल करीब हैं और यह बहुत सकारात्मक है।”

ऊर्जा सहयोग पर, रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका आपूर्ति बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास भारी कच्चे तेल (heavy crude) को रिफ़ाइन करने की क्षमता है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव का बड़ा ऐलान, लोकतंत्र सेनानियों को तीर्थयात्रा कराएगी सरकार, मिलेंगी कई सुविधाएं

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अब लोकतंत्र सेनानियों को तीर्थयात्रा कराने का बीड़ा मोहन यादव की सरकार ने उठा लिया है। इस घोषणा को करते हुए सीएम डॉ मोहन यादव बोले, ‘उनकी वजह से ही भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।’
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव 26 जून को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित लोकतंत्र सेनानी प्रादेशिक सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने लोकतंत्र सेनानियों पर पुष्प वर्षा कर उनका सम्मान किया। कार्यक्रम में सीएम डॉ यादव ने 96 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी लक्ष्मी नारायण पाटीदार और 95 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी शांति लाल संघवी और पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का अभिनंदन किया। कार्यक्रम में आपातकाल पर केंद्रित एक शॉर्ट फिल्म भी दिखाई गई। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कई अहम घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि अब लोकतंत्र सेनानियों के तीर्थाटन के लिए सरकार स्पेशल ट्रेन चलाएगी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि आज का यह कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। कांग्रेस ने हमेशा देश की लड़ाई को रोकने का प्रयास किया। हमारे देश के आजाद होने के बाद कई राष्ट्र आजाद हुए। जापान तो द्वितीय विश्वयुद्ध में करीब-करीब खत्म हो गया था, लेकिन वो देश आज कहां हैं और हमारा देश कहां है। इंदिरा गांधी की आज चौथी पीढ़ी मैदान में हैं, लेकिन विचारधारा और नीति में कांग्रेस न तब सुधरी थी, न अब सुधरी है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान चुनौती भरा माहौल था। घर के मुखिया को उठाकर सीधे जेल में बंद कर देते थे। उसके बाद न वकील, न अपील, न दलील। किसी को कुछ पता नहीं होता था कि क्या होगा। बच्चे स्कूल कैसे जाएंगे, कौन घर देखेगा, कौन फीस भरेगा। मीसाबंदियों से कहा जाता था कि कांग्रेस में शामिल हो जाओ, इंदिरा की जय-जयकार करो तो छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों की लड़ाई स्वतंत्रता की पहली लड़ाई के समान है। आपकी लड़ाई की वजह से आज लोकतंत्र सुरक्षित है। जिसके कारण गरीब परिवार से निकला हुआ व्यक्ति आज देश का प्रधानमंत्री है। मुझे आज इस बात पर गर्व है कि आज हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है।

कांग्रेस ने किया संविधान का दुरुपयोग
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा आज हमारा देश प्रगति कर रहा है, जबकि हमारे साथ ही आजाद हुए पाकिस्तान में लोकतंत्र बेहाल है। आज के समय में लोकंतत्र की मशाल को जलाए रखना, हमारे लिए जरूरी है। कांग्रेसी हाथ में संविधान की किताब लेकर बात करते हैं, लेकिन संविधान का सबसे ज्यादा दुरुपयोग किसी न किया है तो वो कांग्रेस ही है। उनकी पांच पीढ़ियों ने दुरुपयोग किया है। वो किस मुंह संविधान की बात करते हैं। कांग्रेस ने केवल एक परिवार को आगे बढ़ाया, बाकी लोगों को दबा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को शासन करने का बहुत लंबा समय मिला, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 10-12 साल का समय मिला। इतने सालों में कितने प्रकार के काम हुए। यह वर्ष संघ का शताब्दी वर्ष है। उन्होंने कहा कि हम सबको इस बात पर गर्व है कि हम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ जैसे विशाल परिवार का हिस्सा हैं। यह परिवार तब-तब कसौटी पर खरा उतरा है, जब-जब देश को जरूरत पड़ी है।

आपातकाल को किया याद
कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि लोकतंत्र सेनानी प्रादेशिक सम्मेलन में आज 1975 से 1977 तक आपातकाल के दौरान जेल में रहे मीसाबंदियों का सम्मान हो रहा है। प्रदेश में बीते 10 साल से लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान की परंपरा चली आ रही है। डॉ मोहन यादव के पिता स्वयं मीसाबंदी रहे। उन्होंने मीसाबंदियों की पीड़ा को करीब से देखा है। यह हमारा सौभाग्य है कि आज एक मीसाबंदी का बेटा प्रदेश का मुख्यमंत्री है। लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद कैलाश सोनी ने कहा कि आज आपातकाल के 51 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। लोकतंत्र सेनानी जब मिलते हैं तो एक ऊर्जा प्रवाहित होती है। एक शख्सियत ने अपनी जिद के लिए लोकतंत्र को खत्म कर उनके फैसले के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले नागरिकों को जेलों में डाला। लोकनायक जयप्रकाश अग्रवाल देश में लोकतंत्र की मिसाल हैं। कांग्रेस सरकारों ने लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोहों पर पाबंदियां लगाईं। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उनकी कोई आस्था नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कुशल नेतृत्व में भारत परमाणु शक्ति संपन्न बना। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ यादव के नेतृत्व में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ है। पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि मध्यप्रदेश में आज लोकतंत्र सेनानियों को 30 हजार रुपए आर्थिक सहायता राशि दी जा रही है। प्रदेश सरकार ने मीसाबंदियों के त्याग को समझा और दिल से उनका सम्मान समारोह आयोजित कराने की शुरुआत की है। अब बंगाल के लोकतंत्र सेनानी और स्वतंत्रता सेनानियों को भी सम्मान मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने लोकतंत्र सेनानियों को प्रमाण पत्र जारी कर कई प्रकार की सुविधाएं दी हैं। देशभर के लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के बराबर दर्जा मिले और उन्हें मिलने वाली 30 हजार की राशि को आयकर मुक्त कर दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कीं ये घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के तीर्थाटन के लिए एक स्पेशल ट्रेन की शुरुआत करने की घोषणा की। लोकतंत्र सेनानी प्रदेशभर के रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस में दो दिन निशुल्क ठहर सकेंगे। दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के नाम पर उनके गांव, कस्बों में शिलालेख स्थापित करने के साथ ही स्थानीय पार्क, मार्ग और खेल मैदानों के नाम लोकतंत्र सेनानियों के नाम पर रखे जाएंगे। लोकतंत्र सेनानियों के निशुल्क इलाज और एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी। जो लोकतंत्र सेनानी ताम्रपत्र प्राप्त करने से वंचित हैं बहुत जल्द उन्हें भी ताम्रपत्र दिए जाएंगे। लोकतंत्र सेनानियों को पूरा सम्मान मिले, यह सुनिश्चित करते हु

बंगाल-सिक्किम में भारी बारिश की चेतावनी, शिमला में सड़कें जलमग्न, अब यूपी-राजस्थान में होगी मानसून की एंट्री

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हिमाचल प्रदेश में मानसून पहुंचने से पहले ही मूसलाधार बारिश हो रही है। इससे कई सड़कों पर पानी भर गया है। गाड़ियां मलबे में दब गई हैं। मौसम विभाग ने बंगाल-सिक्किम समेत पूरे उत्तर-पूर्व भारत में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।
मानसून ने मध्य प्रदेश, गुजरात समेत देश के अधिकतर राज्यों में दस्तक दे दी है और जल्द ही यूपी-राजस्थान में भी मानसून की एंट्री होने वाली है। इस वजह से अधिकतर हिस्सों में झमाझम बारिश हो रही है। आईएमडी ने पश्चिम बंगाल और सिक्किम समेत सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों में भीषण बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन राज्यों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन का खतरा भी रहता है। वहीं, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में शनिवार दोपहर भारी वर्षा के चलते शहर की कई सड़कें और रास्ते पानी से लबालब भर गए, जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

सबसे अधिक असर ढली क्षेत्र में देखने को मिला, जहां तेज बारिश के बाद नाले में मलबा आने से तीन वाहन दब गए। वहीं बारिश का पानी कई घरों में घुस गया, जिससे स्थानीय लोगों को नुकसान उठाना पड़ा।

शाम 4 बजे हुआ अंधेरा
बारिश के दौरान स्कूलों की छुट्टी होने और कार्यालयों से लोगों के घर लौटने के समय यातायात प्रभावित रहा। स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और अन्य यात्रियों को घंटों परेशानी झेलनी पड़ी। तेज बादलों और बारिश के कारण शाम करीब चार बजे ही शहर में अंधेरे जैसे हालात बन गए। मानसून की दस्तक से पहले हुई इस भारी बारिश ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था की भी पोल खोल दी। कई स्थानों पर पानी की निकासी नहीं होने से सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और वाहन रेंगते नजर आए।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
इस बीच भारतीय मौसम विभाग ने ताजा बुलेटिन जारी करते हुए चंबा, शिमला, कुल्लू, मंडी और सिरमौर जिलों के लिए बारिश और आंधी-तूफान का येलो अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार इस दौरान 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि प्रदेश में अगले सात दिनों तक बारिश का दौर जारी रह सकता है। 26 से 30 जून तक कई क्षेत्रों में हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि 30 जून की रात पश्चिमी विक्षोभ के मजबूत होने से 1 और 2 जुलाई को प्रदेश के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। प्रशासन और मौसम विभाग ने पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों से नदी-नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी ढलानों के आसपास जाने से बचने तथा खराब मौसम के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की अपील की है।
यूपी में मानसून की एंट्री जल्द
मौसम विभाग ने बताया है कि मानसून गुजरात और मध्य प्रदेश में दस्तक दे चुका है। वहीं, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के अधिकतर हिस्सों को कवर कर चुका है। जल्द ही मानसून यूपी और राजस्थान में भी दस्तक दे सकता है। हालांकि, मानसून के आगमन से पहले ही अधिकतर राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो चुका है। पश्चिमी विक्षोभ के असर से हिमाचल समेत अन्य राज्यों में बारिश हो रही है।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का फाइनल हाई-स्पीड ट्रायल हुआ सफल, 120 KM प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी गाड़ी

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पहली हाइड्रोजन ट्रेन का फाइनल हाई-स्पीड ट्रायल आज दिल्ली और जींद सेक्शन पर किया गया। इस दौरान, ट्रेन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी।
आज देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का फाइनल हाई-स्पीड ट्रायल किया गया। हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल दिल्ली और जींद सेक्शन पर किया गया। इस दौरान ट्रेन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ी। ट्रायल के दौरान, ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम, इंजन की क्षमता, ट्रैक पर स्थिरता और बाइब्रेशन लेवल की जांट की गई। टेक्निकल कैपेबिलिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को देखा गया।

पूरी तरह ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित है हाइड्रोजन ट्रेन
बता दें कि ये पूरा ट्रायल Research Designs and Standards Organisation की टेक्निकल टीम की निगरानी में हुआ। हाइड्रोजन ट्रेन पूरी तरह ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित है। इससे न एयर पॉल्यूशन होता है और ना ही साउंड पॉल्यूशन। हाइड्रोजन ट्रेन फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है। इस प्रोसेस के दौरान, सिर्फ पानी और भाप निकलती है जो एनवायरमेंट के लिए बेहतर है।
जींद से सोनीपत के बीच चलेगी हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन
जिन इलाकों में फिलहाल रेलवे ट्रैक पर ओवरहेड वायरिंग नहीं है, वहां हाईड्रोजन ट्रेन बेहतर विकल्प बन सकती हैं। भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच चलेगी। ये ट्रेन नीले रंग की होगी। सबकुछ ठीक रहा तो अगले महीने से ये ट्रेन पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी।

कमर्शियल सर्विस में भी आ सकती है काम
गौरतलब है कि हाइड्रोजन ट्रेन का लो-स्पीड ट्रायल पहले सफल रहा था। ट्रायल में ट्रेन के सफल रहने पर इसे कमर्शियल सर्विस के लिए मंजूरी मिलने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

हाइड्रोजन ट्रेन की खासियत
ट्रेन ना धुआं छोड़ती है और ना प्रदूषण फैलाती है।
यह फ्यूल सेल तकनीक पर काम करती है।
हाइड्रोजन गैस हवा की ऑक्सीजन से बिजली बनाती है।
ट्रेन सिर्फ पानी और भाप छोड़ती है।
एक बार ईंधन भरने पर कई सौ किलोमीटर चलती है।
जींद से सोनीपत के बीच पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलेगी।
जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन मंजूर
बीते 27 मई को भारतीय रेलवे ने नॉर्दर्न रेलवे के जींद-सोनीपत सेक्शन पर 10-कोच वाली हाइड्रोजन फ्यूल सेल-बेस्ड ट्रेन चलाने की मंजूरी दी। रेल मंत्रालय के मुताबिक, यह ट्रेन जल्द शुरू होने के लिए तैयार है और 1200 KW हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम का प्रयोग करके 75 kmph की अधिकतम स्पीड से चलेगी।

परमजीत तोमर का दर्द, 17 साल देश सेवा के बाद नौकरी से बर्खास्त, अब दो बच्चों के भविष्य पर मंडराया संकट, निष्पक्ष जांच और बहाली की मांग

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देश की सीमाओं की सुरक्षा में 17 वर्षों तक अपनी सेवाएं देने वाले सशस्त्र सीमा बल के एक मुख्य आरक्षी की कहानी अब गंभीर प्रशासनिक और मानवीय सवाल खड़े कर रही है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के निवासी तथा सशस्त्र सीमा बल के मुख्य आरक्षी परमजीत तोमर को सेवा से बर्खास्त हुए चार महीने बीत चुके हैं। उनका आरोप है कि ईमानदारी से कर्तव्य निभाने के बावजूद उन्हें विभागीय अधिकारियों की कथित प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और अंततः सेवा से हटा दिया गया। अब वह अपने परिवार के भविष्य और न्याय की उम्मीद लेकर लगातार उच्च अधिकारियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं।

परमजीत तोमर का कहना है कि उन्होंने अपने पूरे सेवा काल में पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ देश की सेवा की। श्वान प्रशिक्षण एवं प्रजनन केंद्र डेरा, अलवर में तैनाती के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं और विभिन्न अवसरों पर उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रशंसा पत्र भी प्राप्त किए। उनका दावा है कि उनके सेवा रिकॉर्ड में लंबे समय तक कोई गंभीर शिकायत दर्ज नहीं थी।

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों से कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका कहना है कि बिना किसी ठोस कारण के उन्हें बार-बार निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ ऐसा माहौल तैयार किया गया जिससे उनकी छवि खराब हो। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास अपने आरोपों से जुड़े कई दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं।

परमजीत तोमर के अनुसार उन्होंने अतिरिक्त महानिदेशक सशस्त्र सीमा बल को भी प्रार्थना पत्र भेजकर व्यक्तिगत रूप से अपनी बात रखने का अवसर मांगा था। आवेदन में उन्होंने उल्लेख किया कि लगातार मानसिक उत्पीड़न के कारण वह न्याय की मांग कर रहे हैं और चाहते हैं कि उनकी पूरी बात निष्पक्ष रूप से सुनी जाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि यानी एपीएआर को जानबूझकर खराब किया गया ताकि उनके भविष्य और पदोन्नति पर असर पड़े। उनका कहना है कि जिन मुद्दों पर उन्होंने अधिकारियों से सवाल किए, उसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला और तेज हो गया।

परमजीत तोमर का कहना है कि स्कूल बस ड्यूटी के दौरान हुई एक घटना के बाद हालात और बिगड़ गए। उनका दावा है कि उन्होंने एक अन्य जवान द्वारा फैलाई जा रही कथित चर्चाओं की जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारी को दी थी। इसके बाद उन्हें ड्यूटी से हटाया गया और लगातार प्रताड़ित किया जाने लगा।

उन्होंने यह भी बताया कि आठ नवंबर 2025 को उनके दादा का निधन हो गया था। उस कठिन समय में भी उन्हें केवल चार दिन की अर्जित छुट्टी दी गई। उनका कहना है कि वह समय पर ड्यूटी पर लौट आए, लेकिन इसके बावजूद उनके साथ कठोर रवैया जारी रहा।

परमजीत तोमर का आरोप है कि उनके खिलाफ अनुशासनहीनता और शराब सेवन जैसे आरोपों का वातावरण बनाया गया, जबकि उनके अनुसार पिछले तीन वर्षों में ऐसी किसी घटना का कोई ठोस दस्तावेजी प्रमाण विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि पूरी विभागीय कार्रवाई पूर्वाग्रह और दुर्भावना से प्रेरित थी।

चार महीने पहले सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद अब उनका परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है। उनकी पत्नी और दो छोटे बच्चों की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर है। नियमित आय बंद होने के कारण परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

परमजीत तोमर ने मांग की है कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी या निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के पर्याप्त साक्ष्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए, लेकिन यदि कार्रवाई दुर्भावना के आधार पर हुई है तो उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल किया जाए।

यह मामला अब केवल एक कर्मचारी की नौकरी का नहीं बल्कि सुरक्षा बलों में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रशासनिक कार्रवाई और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े गंभीर प्रश्न भी खड़े कर रहा है। यदि लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच में सच्चाई सामने आती है तो यह विभागीय कार्यप्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। वहीं यदि विभाग के पास कार्रवाई के वैधानिक और ठोस आधार हैं तो उनका स्पष्ट रूप से सामने आना भी उतना ही आवश्यक है।

फिलहाल परमजीत तोमर अपने परिवार के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी जवानी देश की सुरक्षा में समर्पित कर दी, लेकिन आज वह अपने परिवार के सम्मान, आजीविका और भविष्य की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे हैं।

राम मंदिर का पाप : पाई-पाई का हिसाब होगा

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में सबसे ज्यादा उंगलियां चंपत राय और अनिल मिश्रा पर ही उठ रही हैं। मंदिर की सारी व्यवस्थाओं और पैसे के हिसाब-किताब की जिम्मेदारी इन्हीं दोनों की थी। चंपत राय की नीयत साफ हो सकती है, लेकिन उन्होंने लापरवाही की।
अयोध्या राम लला मंदिर में चढ़ावे की लूट के मामले में आखिरकार चंपत राय ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट के एक अन्य अधिकारी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया। FIR में जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनमें ज्यादातर चंपत राय और अनिल मिश्रा के करीबी माने जाते हैं। SIT की जांच के दौरान CCTV फुटेज में चढ़ावे की गिनती करते हुए आरोपी करीब 70 बार नोटों की गड्डियां जेब में डालते दिखाई दिए थे। इनमें से कई लोगों ने SIT की जांच शुरू होने से पहले ही अपना जुर्म कबूल कर लिया था और चोरी की रकम ट्रस्ट के सदस्यों को लौटा दी थी। अभी तो सिर्फ उन लोगों के खिलाफ सीसीटीवी के सबूत मिले हैं जिन्होंने 45 दिन में चढ़ावे की लूट की। उससे पहले की फुटेज SIT को नहीं मिली।

आठ आरोपियों में सबसे बड़ा नाम है, चंपत राय के क़रीबी रामशंकर यादव उर्फ़ टिन्नू यादव का। उसके अलावा गिनती में शामिल लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के नाम भी FIR में हैं। बाकी पांच आरोपी हैं, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा। चढ़ावे में सबसे ज्यादा चोरी चंपत राय के ड्राइवर रह चुके रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव ने की। टिन्नू के पिता चाय बेचते थे, वो खुद ऑटो चलाता था। इसके बाद टिन्नू यादव चंपत राय का ड्राइवर बना। फिर चंपत राय ने मंदिर के प्रबंधन की ज्यादातर जिम्मेदारी टिन्नू यादव को ही दे दी। चढ़ावे की राशि जिन बक्सों में रखी जाती थी, उसकी चाबियां टिन्नू यादव के पास रहती थी। मंदिर में किसे नौकरी देनी है, चढ़ावे की गिनती के काम में किसे रखना है, इसका फैसला भी टिन्नू यादव ही करता था। जो टिन्नू यादव एक जमाने में ऑटो चलाता था, अब उसके पास अयोध्या और लखनऊ में पचास करोड़ रु. से ज्यादा की संपत्ति है। FIR में मनीष यादव टिन्नू यादव का भतीजा है। टिन्नू ने ही उसे मंदिर में चढ़ावे की गिनती के काम में लगाया था।

चंपत राय और अनिल मिश्रा पर उठी उंगलियां
ये बात सही है कि सबसे ज्यादा उंगलियां चंपत राय और अनिल मिश्रा पर ही उठ रही हैं। मंदिर की सारी व्यवस्थाओं और पैसे के हिसाब किताब की जिम्मेदारी इन्हीं दोनों की थी। चंपत राय की नीयत साफ हो सकती है, लेकिन उन्होंने लापरवाही की। चोरी होती रही, उन्हीं के करीबी ये पाप करते रहे। चंपत राय से शिकायत की गई लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की, इसलिए जांच तो जरूरी है। अनिल मिश्रा ट्रस्ट के सदस्य हैं, मंदिर के रोज़मर्रा के सारे काम और चढ़ावे की गिनती की जिम्मेदारी भी उन्हीं की थी। अनिल मिश्रा की संपत्ति भी पिछले पांच साल में कई गुना बढ़ गई। जो लोग मंदिर में आए दान पात्र खोलते थे, जो लोग दान में मिले रुपये पैसे की गिनती करते थे, वो अचानक अमीर कैसे बन गए? 22 जनवरी 2024 को रामलला के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इन लोगों के पास मकान, दुकान, गाड़ियां, iPhone कहां से आ गए? इसके बाद भी क्या कोई शक है कि मंदिर का चढ़ावा किसने लूटा? इन लूट मचाने वालों के चाचा-मामा कौन थे, ये किसके भांजे-भतीजे थे, ये भी अयोध्या में बच्चा-बच्चा जानता है। इन पापियों को नोटों की गिनती के काम में किसने लगाया, ये भी जगज़ाहिर है।

FIR हो गई कुछ लोग पकड़े भी गए हैं, उनसे पूछताछ चल रही है, सारे काउंटिंग करने वाले बदल दिए गए, पर जिन्हें निगरानी करनी थी, वे तो मठाधीश बने बैठे थे। जिन्होंने लुटेरों की जमात को इकट्ठा किया था, जिनकी पर्ची कल तक चलती थी, उनकी जांच कब होगी, उनके नाम कब FIR में आएंगे? उस पूरे मामले से RSS परेशान है, विश्व हिंदू परिषद हैरान है। वो कौन सी ताकत है जो पर्चा, खर्चा और चर्चा के जिम्मेदारों को बचाए हुए थे। ये लोग ये कहकर नहीं बच सकते कि हमने SIT की मांग की, हमने FIR करवाई, हमारी वजह से लोग पकड़े गए, इसलिए हम दोषी नहीं है। इसे कहते हैं, चोर मचाए शोर। चढ़ावे की लूट करने वाले पकड़े जा रहे हैं लेकिन रामभक्तों के विश्वास को धक्का लगा है, उनकी आस्था को चोट पहुंची है। इसलिए सिर्फ छोटे छोटे लोगों के खिलाफ एक्शन से काम नहीं चलेगा। जिन लोगों ने चोरी की, जिन लोगों ने करोड़ों लोगों की भावनाओं के खिलवाड़ किया, उन्हें इस तरह का पाप करने की छूट किसने दी? किसने इन लोगों को मंदिर में एंट्री दी? जिन लोगों पर रामलला के खजाने की निगरानी की जिम्मेदारी थी, वे लोग आंखें मूद कर बैठे रहे, जब चोरी की जानकारी मिल गई, तो उसे दबाने की कोशिश की, इसलिए जब तक ट्रस्ट के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी, तब तक इस पाप का दाग नहीं धुलेगा।
भारत में संविधान चलेगा, शरीयत नहीं
महाराष्ट्र विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड पर चर्चा के समय एक मुस्लिम महिला विधायक ने भारत में शरीयत लागू करने की मांग की। NCP (अजित पवार) की विधायक सना मलिक ने कहा कि UCC के मुद्दे पर बार-बार चार शादियों का हवाला दिया जा रहा है, पाकिस्तान की बात हो रही है, ऐसा दिखाने की कोशिश हो रही है मानो सिर्फ मुसलमान ही एक से ज्यादा शादियां करते हैं। सना मलिक ने कहा कि पाकिस्तान में तो शरीयत के हिसाब से नियम कानून बने हैं, भारत में भी ऐसा ही होना चाहिए, मुसलमान कुरान को फॉलो करते हैं, अगर भारत में भी शरीयत के हिसाब से कानून बने तो मुसलमान इसका स्वागत करेंगे। बीजेपी और शिवसेना (शिंदे) ने इसका कड़ा विरोध किया। गृह राज्यमंत्री योगेश कदम ने कहा कि हमारा देश संविधान से चलता है, यहां मजहब के हिसाब से क़ानून नहीं बनते। बात बढ़ी तो सना मलिक ने सफ़ाई दी, कहा कि उन्होंने भारत में शरीयत लागू करने की मांग नहीं की, उन्होंने बस इतना कहा था कि भारत के मुसलमानों को पाकिस्तान की मिसाल न दी जाए।

वैसे Polygamy (बहुविवाद प्रथा) पर कई मुस्लिम देशों में पाबंदी है। तुर्की में कोई भी एक साथ चार शादियां नहीं कर सकता। पाकिस्तान, सऊदी अरब, मोरक्को, मलेशिया और मिस्र जैसे तमाम मुस्लिम देशों में चार शादियां करने से जुड़े कड़े नियम बनाए गए हैं। जहां तक सना मलिक के बयान का सवाल है तो सना मलिक नवाब मलिक की बेटी हैं। नवाब मलिक का बीजेपी के साथ छत्तीस का आंकड़ा है। बीजेपी ने नवाब मलिक को NCP में शामिल करने का विरोध किया था, इसलिए बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे ने जैसे ही पाकिस्तान का नाम लिया, तो सना मलिक ने मौका लपक लिया। लेकिन मोटी बात ये है कि हमारे देश में मजहब के नाम पर कोई कानून नहीं बनाया जा सकता।

भगवंत मान : मास्क में राज है कोई गहरा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान विवादित वीडियो के केस से निकलने के लिए रोज़ नए तर्क दे रहे हैं। गुरुवार को मान ने कहा कि जिस वीडियो को लेकर उन पर गुरु साहिबान की बेअदबी का आरोप लगाया जा रहा है, उस वीडियो में वो नहीं हैं। किसी दूसरे शख्स को उनका मास्क पहना कर शूट किया गया था। मान ने सबूत के तौर पर एक वीडियो दिखाया, कहा कि वीडियो में साफ दिख रहा ये शख्स होटल के कमरे में उनके चेहरे वाला मास्क पहन रहा है। चूंकि मास्क के जरिए आंखे तो नहीं छुपाई जा सकती इसीलिए इस शख्स ने चश्मा पहन लिया। मान ने कहा कि उनके गले में ऑपरेशन के कट के निशान हैं लेकिन वीडियो में ऐसे कोई निशान नहीं दिख रहे। ये हमने फिल्मों में तो देखा है कि विलेन हीरो का मास्क पहनकर हेरोइन को भगा ले जाता है, लेकिन असल जिंदगी में पहली बार सुना कि किसी ने भगवंत मान का मास्क पहनकर एक्टिंग की, उनको फंसाने की कोशिश की और वो भी 16 साल पहले, जब भगवंत मान सिर्फ एक कॉमेडियन थे। क्या मास्क बनाने वाले और पहनकर एक्टिंग करने वाले को पता था कि भगवंत मान एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे और विवाद खड़ा करने का अवसर मिलेगा? इसीलिए मुझे लगा कि इसमें कोई गहरा राज़ है। दूसरी बात, अगर वीडियो फर्जी था, मास्क लगाकर एक्टिंग की गई थी, तो ये बात जांच में सामने क्यों नहीं आई? और जांच एक ऐसी एजेंसी से क्यों कराई गई जिसकी कोई फॉरेन्सिक लैब तक नहीं है? अब तो इस बात के भी सबूत मिल गए हैं कि पंजाब पुलिस के अफसरों ने ही ये फॉरेन्सिक जांच करवाई थी,

कानपुर में बुलडोजर कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

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पीड़ितों का आरोप- बिना नोटिस उजाड़े गए 25 से 30 परिवार, वोटर लिस्ट से नाम हटाने और मूलभूत सुविधाओं से वंचित करने का भी दावा

कानपुर। नौबस्ता क्षेत्र स्थित कच्ची बस्ती, बसंत विहार की निवासी कश्मीरा पत्नी रमा बाबू खटिक ने अपने सहित दर्जनों परिवारों की ओर से प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि 19 जून 2026 को कुछ लोग जेसीबी और बुलडोजर के साथ बस्ती में पहुंचे। इससे पहले वहां रहने वाले लोगों के नाम और अन्य जानकारियां दर्ज की गईं और उसके बाद बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित नोटिस के उनके मकानों को ध्वस्त कर दिया गया। परिवारों का आरोप है कि कार्रवाई के दौरान न तो कोई सरकारी आदेश दिखाया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।

पीड़ितों का दावा है कि यह कार्रवाई एक व्यक्ति योगी सिंह के कहने पर कराई गई। उनका आरोप है कि मौके पर मौजूद अधिकारियों या कर्मचारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस विभाग के आदेश पर मकानों को गिराया जा रहा है। बस्तीवासियों का कहना है कि वर्षों से बसे उनके घरों को अचानक बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया, जिससे पूरा परिवार सड़क पर आ गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार इस कार्रवाई से करीब 25 से 30 परिवार बेघर हो गए हैं। उनका कहना है कि उनके पूर्वज पिछले 80 से 90 वर्षों से इसी बस्ती में रह रहे थे। अचानक हुई कार्रवाई से उनका आशियाना, घरेलू सामान और वर्षों की मेहनत की कमाई प्रभावित हो गई। अब उनके पास रहने के लिए सुरक्षित स्थान तक नहीं बचा है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि बरसात के मौसम में महिलाएं, छोटे-छोटे बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे जीवन बिताने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि उन्हें मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। बस्ती में पेयजल के लिए नल कनेक्शन का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन उनका कहना है कि उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके नाम वोटर लिस्ट से भी हटा दिए गए हैं, जबकि वे हर चुनाव में मतदान करते रहे हैं और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेना चाहते हैं।

बस्तीवासियों का यह भी आरोप है कि जब वे अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें पुलिस का डर दिखाया जाता है। उनका कहना है कि भय के माहौल के कारण कोई खुलकर उनकी मदद करने या उनके पक्ष में आवाज उठाने के लिए आगे नहीं आ रहा है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे लगातार असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

बस्ती के लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौके पर पहुंचकर पूरे मामले का सत्यापन करें और निष्पक्ष जांच कराएं। उनका कहना है कि यदि कार्रवाई में नियमों की अनदेखी हुई है तो दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही बेघर हुए सभी परिवारों को तत्काल राहत, अस्थायी आश्रय, पेयजल, राशन और स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि उन्हें बारिश के मौसम में सड़क पर जीवन बिताने के लिए मजबूर न होना पड़े।

हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन, पुलिस अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।Hashtags

बाइक से जा रहे शख्स के सिर पर गिरी सूखी टहनी, अचेत होकर सड़क पर गिरा; CCTV फुटेज आया सामने

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बेंगलुरु में एक बाइक सवार व्यक्ति के सिर पर सूखी टहनी गिर गई। टहनी गिरने से व्यक्ति घायल हो गया। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है।
बेंगलुरु के राजाजीनगर से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक बाइक सवार व्यक्ति पर अचानक एक पेड़ की टहनी आकर गिर गई। पेड़ की टहनी उसके सिर पर गिरी, जिससे उसे चोट लग गई। वहीं चोट लगते ही व्यक्ति अपना संतुलन खो बैठा और सड़क पर गिर गया। यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें देखा जा सकता है कि यह पूरी घटना महज 5 सेकेंड के भीतर हुई। वहीं आस-पास के लोग यह देखकर दौड़ते हुए घायल व्यक्ति के पास गए और उसे आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
सिर पर गिरी सूखी टहनी
दरअसल, पूरी घटना बेंगलुरु के राजाजीनगर की बताई जा रही है। यहां बाइक चलाते समय सिर पर पेड़ की एक टहनी गिरने से 52 साल का एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना बुधवार शाम राम मंदिर रोड के पास हुई, जब सतीश नाम का व्यक्ति फाइनेंस पेमेंट लेने जा रहा था। इसी दौरान अचानक एक सूखे पेड़ की टहनी टूटकर उन पर गिर गई, जिससे वह अपनी बाइक से गिर पड़े। सतीश के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। फिलहाल उनका इलाज यशवंतपुर के मणिपाल अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों ने उनके सिर की सर्जरी की है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

सीसीटीवी फुटेज आया सामने
पूरी घटना CCTV कैमरे में कैद हो गई। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि सतीश अपनी बाइक से जा रहे होते हैं, तभी पेड़ की सूखी टहनी सीधे उनके ऊपर आ गिरती है। सिर पर टहनी गिरते ही सतीश अचेत हो गए और तुरंत सड़क पर बाइक समेत गिर गए। हालांकि स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जिसके बाद अब उनका इलाज चल रहा है। बताया जा रहा है अस्पताल में सतीश की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय लोगों ने इस लापरवाही के लिए वन विभाग और नगर प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि उन्होंने कई बार उस खतरनाक पेड़ के बारे में शिकायत की थी और उसकी सूखी टहनियों को हटाने की मांग की थी, लेकिन कोई असरदार कदम नहीं उठाया गया।

मोरनी घूमने गए युवक का खोया एप्पल आईफोन 15 पंचकूला पुलिस ने ढूंढकर सुरक्षित लौटाया

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*पंचकूला, 26 जून।*
पंचकूला पुलिस आमजन की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी खोई हुई संपत्ति को सुरक्षित वापस दिलाने के लिए भी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य कर रही है। इसी क्रम में मोरनी चौकी पुलिस ने अपनी तत्परता और जनसेवा का परिचय देते हुए करीब दो सप्ताह पहले खोए एक एप्पल आईफोन 15 को उसके वास्तविक मालिक तक सुरक्षित पहुंचाकर सराहनीय कार्य किया।

डीसीपी सृष्टि गुप्ता ने बताया कि सेक्टर-17 स्थित राजीव कॉलोनी निवासी करण करीब दो सप्ताह पहले मोरनी घूमने गए थे। इस दौरान उनका एप्पल आईफोन 15 कहीं गिरकर खो गया। गश्त के दौरान मोरनी चौकी पुलिस को यह मोबाइल लावारिस अवस्था में मिला। मोबाइल बंद होने और पासवर्ड से सुरक्षित होने के कारण उसके मालिक की तत्काल पहचान नहीं हो सकी।

इसके बावजूद मोरनी चौकी पुलिस ने तकनीकी सहायता से लगातार प्रयास जारी रखे। आखिरकार मोबाइल के वास्तविक मालिक की पहचान कर ली गई। इसके बाद मोरनी चौकी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर जगदीश कुमार ने 25 जून को करण को चौकी बुलाकर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उनका एप्पल आईफोन 15 सुरक्षित वापस सौंप दिया।

करीब दो सप्ताह बाद अपना मोबाइल वापस मिलने पर करण ने पंचकूला पुलिस, विशेष रूप से मोरनी चौकी पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की ईमानदारी, तत्परता और जनसेवा की भावना के कारण उन्हें अपना कीमती मोबाइल सुरक्षित वापस मिल सका। यह पहल आमजन के बीच पुलिस के प्रति विश्वास और भरोसे को और मजबूत करती है।

​वैभव सूर्यवंशी को न​हीं मिला डेब्यू तो कैसी होगी भारत की प्लेइंग इलेवन, आज आयरलैंड से मुकाबला

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वैभव सूर्यवंशी क्या आज अपना इंटरनेशनल डेब्यू करेंगे, इसका खुलासा शाम को हो जाएगा। लेकिन अगर वे नहीं खेले तो भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन पर एक नजर जरूर डालनी चाहिए।
वैभव सूर्यवंशी के लिए आज का दिन काफी ज्यादा अहम होने सकता है। जब से उनकी एंट्री टीम इंडिया में हुई है, उसके बाद भारतीय टीम पहली बार टी20 इंटरनेशनल मैच खेलने के लिए उतरेगी। इस बीच क्या होगा ये तो पता नहीं, लेकिन अगर वैभव को आज डेब्यू का मौका नहीं मिला तो भारत की प्लेइंग इलेवन कैसी हो सकती है। ये भी समझना और जानना जरूरी है।

श्रेयस अय्यर की कप्तानी में टीम इंडिया खेलेगी पहला टी20 इंटरनेशनल मैच
श्रेयस अय्यर टीम इंडिया के टी20 कप्तान के तौर पर आज अपना पहला मुकाबला खेलेंगे। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती आज प्लेइंग इलेवन चुनने की होगी। एक ओर जहां अच्छा प्रदर्शन कर रहे प्लेयर्स हैं, वहीं युवा खिलाड़ी भी टीम में शामिल किए गए हैं। इनमें से 11 चुनना आसान काम नहीं होगा।

वैभव नहीं तो अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन करेंगे भारत के लिए ओपनिंग
बात पहले ओपनिंग की ही करते हैं। अगर वैभव सूर्यवंशी को डेब्यू का मौका नहीं मिला तो फिर ये तय है कि सलामी बल्लेबाज के तौर पर अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन नजर आएंगे। जिन्होंने टी20 विश्व कप 2026 के आखिरी कुछ मैचों में कमाल की बल्लेबाजी की थी। नंबर तीन पर ईशान किशन का आना तय है। कप्तान श्रेयस अय्यर को लेकर संभावना है कि वे खुद नंबर चार पर बल्लेबाजी के लिए आएंगे। उनके तीन नंबर पर आने की उम्मीद कम है। तिलक वर्मा नंबर पांच पर बल्लेबाजी के लिए आएंगे, ऐसा माना जा रहा है।

टीम के पास 9 नंबर पर बैटिंग, प्रिंस यादव को भी मिल सकता है मौका
शिवम दुबे नंबर 6 और ​अक्षर पटेल नंबर सात पर आएंगे। वॉशिंगटन सुंदर को नंबर 8 पर मौका दिया जा सकता है। हर्षित राणा को भी टीम में शामिल किया गया है। वे काफी वक्त से चोटिल थे, लेकिन अब पूरी तरह से ठीक होकर टीम के साथ जुड़ चुके हैं। वे नंबर 9 पर आ सकते हैं। हर्षित भी ठीकठाक बल्लेबाजी कर लेते हैं। यानी भारत के पास नंबर 9 तक बल्लेबाजी हो जाएगी। इसके बाद नंबर 10 पर अर्शदीप सिंह को मौका दिया जा सकता है। साथ ही नंबर 11 पर प्रिंस यादव नजर आ सकते हैं। ​प्रिंस को मौका मिला तो वे पहला टी20 इंटरनेशनल मैच खेलते हुए दिखाई देंगे।

आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में भारत की संभावित प्लेइंग इलेवन: अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह, प्रिंस यादव।