Tuesday, July 7, 2026
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असम विधानसभा चुनाव: दलबदल से कांग्रेस परेशान, क्या गौरव गोगोई हैं चुनौती के लिए तैयार?

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असम विधानसभा चुनाव की तारीख जारी हो चुकी है। इस बार चुनाव में मुख्य मुकाबले भाजपा और कांग्रेस के बीच होने जा रहा है। हालांकि, चुनावी तैयारियों के दौरान कांग्रेस दलबदल से परेशान चल रही है।असम में विपक्षी पार्टी कांग्रेस दलबदल की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में उसे आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी को चुनौती देने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। कांग्रेस 2016 से सत्ता से बाहर है। उसे बीजेपी के मजबूत संगठनात्मक आधार, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के सक्रिय नेतृत्व और मौजूदा बीजेपी सरकार द्वारा शुरू की गई विकास और कल्याणकारी योजनाओं का मुकाबला करना होगा।

कांग्रेस को किनसे मिलेगा फायदा?
असम में कांग्रेस की स्थिति का विश्लेषण करें तो राज्य में सत्ता-विरोधी लहर कांग्रेस के पक्ष में जा सकती है। पार्टी को अल्पसंख्यक मतदाताओं, खासकर बंगाली भाषी मुसलमानों के समर्थन का फायदा मिल सकता है। बता दें कि 2024 में सत्ताधारी बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी थी। बावजूद जोरहाट लोकसभा सीट से गौरव गोगोई का बड़े अंतर से जीतना और इस बार कांग्रेस द्वारा उन्हें फिर से मुख्यमंत्री पद का चेहरे पेश करना, पार्टी का मनोबल बढ़ाएगा।

कई नेताओं ने छोड़ा कांग्रेस का साथ
पिछले एक दशक में असम में कांग्रेस को कई झटके लगे। मौजूदा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा समेत कई नेताओं ने हाथ का साथ छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया। हालिया झटका, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा और तीन अन्य विधायकों का भगवा पार्टी में शामिल होना था। कांग्रेस में एकजुट संगठनात्मक ढांचे की कमी भी उसके खिलाफ जा सकती है, खासकर जमीनी स्तर पर। ये बात 2014 के बाद से हुए विधानसभा और संसदीय चुनावों के दौरान चाय बागानों के मजदूरों के पाला बदलने से बहुत साफ होती है। ये मजदूर कभी कांग्रेस का महत्वपूर्ण वोट बैंक हुआ करते थे, लेकिन अब उनका झुकाव बीजेपी की ओर हो गया है।

कांग्रेस के लिए मौका
कांग्रेस के लिए ये मौका है कि वो सत्ता-विरोधी लहर का फायदा उठाकर जनादेश अपने पक्ष में कर ले। पार्टी सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में मौजूद असंतुष्ट तत्वों का भी फायदा उठा सकती है और उन्हें अपने खेमे में शामिल कर सकती है। प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं का लगातार पार्टी छोड़ना कांग्रेस के लिए एक खतरा बना हुआ है, जिसका बुरा असर पड़ता है। सत्ताधारी एनडीए की संगठनात्मक और प्रशासनिक मशीनरी भी असम में कांग्रेस के लिए चुनौती पेश करेगी।

 वैशाली में रहस्यमय ढंग से लापता हुआ गूंगा युवक, मकान मालिक पर गंभीर आरोप; पूछने पर परिवार को दी जा रही गोली मारने की धमकी

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वैशाली जिले के गोरौल थाना क्षेत्र में 25 वर्षीय गूंगे और मानसिक रूप से कमजोर युवक के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। युवक के परिवार ने मकान मालिक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वह उसे काम के बहाने घर से ले गया था, लेकिन उसके बाद से युवक का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार का आरोप है कि अब जब वे बेटे के बारे में पूछते हैं तो उन्हें गोली मारने की धमकी दी जा रही है।

गोरौल थाना क्षेत्र के खजेचांद छपरा निवासी किसमत देवी ने बताया कि उनका 25 वर्षीय पुत्र लक्ष्मण कुमार बोल नहीं सकता और मानसिक रूप से भी कमजोर है। परिवार पिछले करीब एक वर्ष से मखदुमपुर गांव में विक्की सिंह के मकान में डेरा बनाकर रह रहा था। लक्ष्मण कुमार और उसके पिता परमेश्वर पासवान वहीं मजदूरी और हेल्पर का काम करते थे।

परिजनों के अनुसार 22 फरवरी 2026 की सुबह करीब 9 बजे मकान मालिक विक्की सिंह पिता उपेन्द्र सिंह लक्ष्मण कुमार को अपने घर काम कराने के बहाने ले गया था। दोपहर करीब 1 बजे उसने फोन कर बताया कि उसके घर में जन्मदिन का कार्यक्रम है, इसलिए लक्ष्मण को खाना खिलाकर वापस भेज देगा। लेकिन देर शाम तक युवक घर नहीं लौटा।

परिवार का कहना है कि शाम करीब 4 बजे विक्की सिंह ने ही फोन कर पूछा कि क्या लड़का घर पहुंच गया है। जब परिजनों ने बताया कि वह नहीं पहुंचा है, तब उसने खोजने जाने की बात कही और लक्ष्मण के उतारे हुए कपड़े मांगते हुए कहा कि किसी भगत से जांच कराकर उसे ढूंढा जाएगा। इसके बाद परिवार ने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिला।

मामला तब और गंभीर हो गया जब परिजनों ने आरोप लगाया कि जब वे विक्की सिंह से बेटे के बारे में पूछताछ करने उसके घर पहुंचे तो उन्हें डराया-धमकाया गया। परिवार का कहना है कि उन्हें साफ तौर पर गोली मार देने की धमकी दी गई और कहा गया कि ज्यादा पूछताछ मत करो।

इतना ही नहीं, परिवार का यह भी आरोप है कि विक्की सिंह के दूसरे मकान में रहने वाली रूबी देवी भी दावे के साथ कह रही है कि लक्ष्मण कुमार अब वापस नहीं आएगा। इस बयान के बाद परिवार की आशंका और गहरी हो गई है और उन्हें अपने बेटे के साथ अनहोनी होने का डर सता रहा है।

पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें शक है कि उनके बेटे को बेच दिया गया है या उसकी हत्या कर दी गई है। परिवार ने पुलिस प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर बेटे को जल्द बरामद करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

इस मामले में गोरौल थाना में कांड संख्या 107/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच की जिम्मेदारी उपनिरीक्षक हरेंद्र कुमार दास को सौंपी गई है।

पुलिस का कहना है कि युवक की तलाश के लिए विभिन्न पहलुओं पर जांच की जा रही है। वहीं युवक के लापता होने और उसके बाद सामने आए आरोपों से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। स्थानीय लोग भी इस घटना को लेकर चिंता जता रहे हैं और युवक की सुरक्षित बरामदगी की मांग कर रहे हैं।
जिस किसी को भी लक्ष्मण के बारे में कोई जानकारी मिले वह इन नंबरों पर संपर्क करें 9279 098 668

 

स्टे आदेश के बावजूद दबंगों ने शुरू कराया निर्माण, विरोध करने पर दलित किसान को दी जान से मारने की धमकी

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उन्नाव, हसनगंज तहसील।
जिले के हसनगंज तहसील क्षेत्र के ग्राम कोरौरा में जमीन विवाद को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिए जाने के बावजूद दबंगों द्वारा निर्माण कार्य शुरू कराने और विरोध करने पर जातिसूचक गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। पीड़ित ने उपजिलाधिकारी और पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम कोरौरा निवासी ओमकार पुत्र स्व. शीतल प्रसाद अपने भाइयों मिथलेश कुमार, शत्रुहन और रिश्तेदार राजकुमार उर्फ रामकुमार के साथ खाता संख्या 00391 की भूमि गाटा संख्या 699 रकबा 0.0890 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 702 रकबा 0.0760 हेक्टेयर के सहखातेदार और कब्जेदार हैं। यह भूमि गांव से जाने वाले खड़ंजा मार्ग के किनारे स्थित है, जिस पर एक हिस्से में मकान बना हुआ है तथा शेष भूमि पर खेती की जाती है।

पीड़ित पक्ष का आरोप है कि गांव के ही संदीप सिंह पुत्र रामप्रताप सिंह इस भूमि पर जबरन कब्जा कर मकान बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने सड़क किनारे ईंट, मौरंग और अन्य निर्माण सामग्री भी जमा कर ली। 25 सितंबर 2025 को संदीप सिंह मजदूरों के साथ मौके पर पहुंचे और जबरदस्ती विवादित भूमि पर नींव खोदने का प्रयास करने लगे। हालांकि पीड़ित पक्ष के विरोध के कारण उस समय निर्माण कार्य नहीं हो सका, लेकिन जाते समय आरोपियों ने खुलेआम धमकी दी कि वे किसी भी हाल में जमीन पर कब्जा कर निर्माण करेंगे।

घटना के बाद ओमकार व अन्य सहखातेदारों ने न्यायालय सिविल जज (जू०डि०) उत्तरी उन्नाव में स्थायी निषेधाज्ञा का वाद संख्या 772/2025 दायर किया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। इसके बावजूद आरोप है कि 22 दिसंबर 2025 की सुबह करीब 8 बजे संदीप सिंह अपने भाई कुलदीप सिंह और पिता रामप्रताप सिंह के साथ मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य शुरू करा दिया।

पीड़ित ओमकार का कहना है कि जब उन्होंने न्यायालय के स्टे आदेश की जानकारी देते हुए निर्माण रोकने को कहा तो आरोपियों ने मां-बहन की गालियां देते हुए जातिसूचक अपमान किया और कहा कि वे किसी भी अदालत के आदेश को नहीं मानते। इतना ही नहीं, आरोपियों ने धमकी दी कि यदि दोबारा विरोध किया तो खेत में ही मारकर गाड़ देंगे।

पीड़ित ने बताया कि आरोपी दबंग और प्रभावशाली किस्म के लोग हैं, जिसके कारण उसे और उसके परिवार को लगातार भय का माहौल झेलना पड़ रहा है। इस संबंध में उसने उपजिलाधिकारी हसनगंज को प्रार्थना पत्र देकर निर्माण कार्य रुकवाने और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित के अनुसार इस मामले में अगली सुनवाई 8 फरवरी 2026 को न्यायालय में निर्धारित है।

वहीं प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो जमीन विवाद से बड़ा संघर्ष भी हो सकता है।

 

जबरन कराई गई शादी बनी अभिशाप, पति की धमकियों से दहशत में महिला; दो साल से न्याय के लिए भटक रही पीड़िता

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लखनऊ। राजधानी लखनऊ के बिजनौर थाना क्षेत्र के औरंगाबाद जागीर की रहने वाली एक महिला ने अपने ही पति पर मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि वह पिछले करीब दो वर्षों से न्याय के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन अब तक उसकी कहीं सुनवाई नहीं हो सकी है। आरोप है कि थाने में दिए गए आवेदन तक फाड़ दिए जाते हैं, जिसके कारण वह बेहद भय और तनाव में जीवन गुजारने को मजबूर है।

पीड़िता श्रीमती रुचि पत्नी सूरज राजपूत का आरोप है कि 12 फरवरी 2026 को सुबह करीब 10 बजकर 14 मिनट पर उनके पति के मोबाइल नंबर से फोन आया, जिसमें उन्हें भद्दी-भद्दी गालियां दी गईं और जान से मारने की धमकी दी गई। रुचि का कहना है कि फोन पर उनके पति ने अपने दोस्तों से भी गाली-गलौज करवाई और कहा कि वह घर आकर उन्हें जान से मार देंगे। इस घटना के बाद से वह और उनकी छोटी बच्ची बेहद डर और दहशत में हैं।

रुचि ने यह भी बताया कि उनकी शादी उनकी मर्जी के खिलाफ जबरदस्ती कराई गई थी। उनका कहना है कि शादी के बाद से ही उन्हें लगातार प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि पति आए दिन मारपीट करते हैं और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।

रुचि का कहना है कि उनकी शादी को करीब सात साल हो चुके हैं, लेकिन लंबे समय से उनके पति सूरज राजपूत उन्हें मारते-पीटते हैं और लगातार अपशब्द कहते हैं। इतना ही नहीं, वह अपनी छह साल की बेटी जयतिका के पालन-पोषण का खर्च भी नहीं उठाते। मजबूरी में रुचि घर-घर जाकर झाड़ू-पोछा का काम करती हैं और उसी से अपनी बच्ची का खर्च चलाती हैं।

पीड़िता के अनुसार उनके पिता जियालाल और माता माधुरी हैं, लेकिन दो महीने पहले ही उनकी मां का निधन हो गया। रुचि की तीन बहनें हैं और परिवार में कोई भाई नहीं है। आरोप है कि इसी बात का फायदा उठाकर उनके पति जमीन-जायदाद के लालच में उन्हें प्रताड़ित करते हैं और बार-बार धमकी देते हैं कि पेट्रोल डालकर उन्हें, उनकी बच्ची और उनके पिता को जिंदा जला देंगे।

रुचि का कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सुनाई है, जिसमें धमकी और गाली-गलौज साफ सुनाई देती है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वह कई बार थाना बिजनौर और पुलिस चौकी पर शिकायत लेकर गईं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी।

पीड़िता का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि उनकी शिकायत पर तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपी पति और संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उन्हें और उनकी मासूम बेटी को सुरक्षा मिल सके।

 

पैसों के विवाद में दबंगों का कहर, महिलाओं से मारपीट, शिकायत करने जा रहे परिवार को रास्ते में घेरकर धमकाया

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जिला औरैया

ग्राम कौती में पैसों के लेन-देन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ दबंगों ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि महिलाओं के साथ भी दुर्व्यवहार किया और पुलिस में शिकायत करने से रोकने के लिए रास्ते में घेरकर धमकाया।

जानकारी के अनुसार 14 मार्च 2026 को पैसों के लेन-देन को लेकर श्रीकृष्ण पुत्र राजाराम के साथ बातचीत चल रही थी। इसी दौरान श्रीकृष्ण के इशारे पर पंकज दुबे, राम अवस्थी, माधव दुबे और केशव दुबे लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंच गए और विवाद अचानक हिंसक झगड़े में बदल गया। आरोप है कि इन लोगों ने गाली-गलौज करते हुए हमला कर दिया।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस दौरान शंभू दयाल की पत्नी विरोधी देवी के साथ मारपीट की गई और उनके गाल पर थप्पड़ मारा गया। इसके अलावा शालिनी देवी के साथ भी हाथापाई और मारपीट की गई। परिवार के अन्य सदस्यों को भी नहीं बख्शा गया और उन्हें लात-घूंसों से मारा गया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब वे इस घटना की शिकायत दर्ज कराने पुलिस के पास जा रहे थे, तभी आरोपियों ने रास्ते में उन्हें घेर लिया और फिर से मारपीट की। इस कारण वे थाने तक नहीं पहुंच पाए और शिकायत दर्ज नहीं करा सके।

परिवार का कहना है कि आरोपियों द्वारा लगातार जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उन्हें कहा जा रहा है कि अगर पैसे नहीं दिए तो पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा और गांव से बाहर निकाल दिया जाएगा। आरोपियों ने कथित रूप से यह भी कहा कि वे उन्हें गांव में रहने नहीं देंगे।

पीड़ित परिवार भूमिहीन और आर्थिक रूप से कमजोर बताया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन और पुलिस से सुरक्षा देने तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। घटना के बाद पूरे परिवार में भय का माहौल बना हुआ है और वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं।

 

आबादी की जमीन पर दीवार को लेकर विवाद, दबंगों ने कथित रूप से दीवार गिराई; पुलिसकर्मी पर मिलीभगत का आरोप

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मऊ। जनपद के मधुबन थाना क्षेत्र के सेमरा सिकरीकोल गांव में आबादी की जमीन पर बनी दीवार को लेकर पारिवारिक विवाद ने गंभीर रूप ले लिया है। पूर्व सैनिक उमेश प्रताप यादव ने आरोप लगाया है कि उनके पट्टीदारों ने आपसी रंजिश के चलते उनकी बनाई हुई दीवार को गिरा दिया और विरोध करने पर गाली-गलौज व मारपीट की। मामले में स्थानीय दरोगा पर भी आरोपियों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत पुलिस उपमहानिरीक्षक आजमगढ़ मंडल समेत जिले के उच्च अधिकारियों से की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मधुबन थाना क्षेत्र के सिकरीकोल सेमरा निवासी उमेश प्रताप यादव पुत्र दीपन यादव ने बताया कि उनके परिवार की आबादी की जमीन पर लगभग 18 फीट लंबी और चार फीट ऊंची ईंट की दीवार आपसी सहमति के आधार पर बनाई गई थी। यह दीवार उनके हिस्से की जमीन की सीमा को चिन्हित करने के लिए बनाई गई थी। आरोप है कि उनके पट्टीदार ढोलई यादव, शिवबालक यादव, निखिल यादव, अंसा यादव, रामरती यादव, रामचंद्र यादव, रीचा यादव और रागिनी यादव आए दिन दीवार गिराने और उत्तर दिशा की ओर रास्ता खोलने के लिए दबाव बना रहे थे।

पीड़ित के अनुसार 12 मार्च 2026 को दिन में करीब 11:30 बजे उक्त सभी लोग एकजुट होकर मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करते हुए दीवार को गिराने लगे। विरोध करने पर निखिल यादव ने उनके परिवार की महिला सदस्य देवन्ती देवी का हाथ मरोड़ दिया और धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया, जिससे उन्हें अंदरूनी चोटें आईं। इसके बाद आरोपियों ने दीवार को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया और धमकी दी कि यदि थाने में शिकायत की गई तो जान से मार देंगे।

उमेश प्रताप यादव का आरोप है कि हल्का क्षेत्र के दरोगा ओ.पी. सिंह भी इस मामले में आरोपियों के साथ मिलकर उनके खिलाफ दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि दरोगा ने कथित रूप से दीवार गिरवाने में सहयोग किया और उल्टा उन्हें ही फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी। इस घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पीड़ित परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है।

पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक मऊ, जिलाधिकारी मऊ, आईजी आजमगढ़ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रार्थना पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना हो सकती है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है ताकि गांव में शांति और कानून व्यवस्था बनी रह सके।

 

शादी का वादा कर तीन साल तक साथ रही प्रेमिका, अब मुकरने पर युवक ने लगाई न्याय की गुहार

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बिहार के नालंदा और मुजफ्फरपुर से जुड़ा एक प्रेम प्रसंग इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। नालंदा जिले के भिंड थाना क्षेत्र के रहने वाले एक युवक ने अपनी प्रेमिका पर शादी का वादा कर अब मुकर जाने का आरोप लगाया है। युवक का कहना है कि तीन साल तक दोनों के बीच गहरा संबंध रहा और वे पति-पत्नी की तरह साथ रहते थे, लेकिन अब युवती शादी से साफ इनकार कर रही है। इस मामले को लेकर युवक ने न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार, नालंदा जिले के भिंड थाना क्षेत्र के गांव मसीहा निवासी दीनानाथ की दोस्ती करीब तीन साल पहले मुजफ्फरपुर जिले के नरौली गांव निवासी आरती कुमारी से हुई थी। बताया जा रहा है कि दोनों की पहचान पारिवारिक रिश्तेदारी के माध्यम से हुई। दीनानाथ के भाई की साली होने के कारण दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे यह दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई।

दीनानाथ का आरोप है कि पिछले तीन वर्षों से दोनों एक-दूसरे के साथ रिश्ते में थे और कई बार शादी को लेकर भी बातचीत हुई। युवक का कहना है कि आरती ने पहले कई बार शादी करने की बात कही थी, लेकिन पिछले करीब तीन महीनों से वह लगातार शादी से मना कर रही है। दीनानाथ के मुताबिक अचानक बदले इस रवैये से वह काफी परेशान है और समझ नहीं पा रहा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है।

युवक का यह भी दावा है कि दोनों एक-दूसरे के साथ पति-पत्नी की तरह रहते थे और भविष्य में साथ जीवन बिताने की योजना बना चुके थे। लेकिन अब जब वह शादी की बात कर रहा है तो युवती साफ तौर पर इंकार कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद युवक ने मामले में न्याय की मांग की है।

स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि प्रेम संबंध में आए इस अचानक मोड़ ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। अब देखना यह होगा कि इस मामले में आगे क्या स्थिति बनती है और दोनों पक्षों के बीच विवाद का समाधान किस तरह निकलता है।

बिहार के समस्तीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला पारिवारिक विवाद सामने आया है।

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यहां एक मजदूर पति ने अपनी पत्नी पर अवैध संबंध रखने का गंभीर आरोप लगाया है, जिसके कारण परिवार में लगातार तनाव और झगड़े की स्थिति बनी हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार समस्तीपुर जिले के खानपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले बाबूलाल उम्र लगभग 36 वर्ष मजदूरी करने के लिए अधिकतर समय बाहर रहते हैं। बताया जा रहा है कि वे साल में करीब चार से छह महीने ही घर आ पाते हैं, बाकी समय बाहर रहकर काम करते हैं और परिवार का पालन पोषण करते हैं। बाबूलाल के परिवार में उनकी पत्नी तृप्ति उम्र लगभग 35 वर्ष और पांच बच्चे हैं। परिवार में नाती पोते तक हो चुके हैं, इसके बावजूद अब यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

बाबूलाल का आरोप है कि जब वह मजदूरी के लिए बाहर रहते हैं, उस दौरान उनकी पत्नी द तृप्ति गांव के ही कुछ लोगों के साथ अवैध संबंध बनाती है। बाबूलाल के अनुसार उनकी पत्नी का नाम गांव के छोटू और मनु नाम के व्यक्तियों के साथ जोड़ा जा रहा है। आरोप है कि कई बार गांव के लोगों ने भी दोनों को साथ देखा है, जिससे बाबूलाल की परेशानी और बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि जब बाबूलाल मजदूरी से वापस घर आते हैं तो उनकी पत्नी ऐसे व्यवहार करती है जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। लेकिन जब बाबूलाल इस बारे में सवाल करते हैं तो दोनों के बीच विवाद बढ़ जाता है। बाबूलाल का कहना है कि बात करने पर तृप्ति उनसे झगड़ा करती है, गाली गलौज करती है और उल्टा उन्हें ही झूठा बताने लगती है।

इस विवाद के कारण बाबूलाल काफी मानसिक तनाव में बताए जा रहे हैं। उनका कहना है कि वह बाहर मेहनत मजदूरी कर परिवार के लिए पैसा कमाते हैं, लेकिन घर लौटने पर उन्हें ऐसे हालात का सामना करना पड़ता है जिससे वह बेहद आहत और परेशान हैं।

ग्रामीणों के अनुसार यह मामला अब गांव में चर्चा का विषय बन गया है और परिवार के अंदर लगातार कलह की स्थिति बनी हुई है। बाबूलाल का कहना है कि वह इस मामले का कोई समाधान चाहते हैं ताकि उनके परिवार में शांति बनी रहे और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर पंचायत या सामाजिक समाधान की बात भी सामने आ रही है, लेकिन अभी तक पुलिस में किसी प्रकार की औपचारिक शिकायत दर्ज कराए जाने की पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं बाबूलाल का कहना है कि यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो वह इस मामले को लेकर प्रशासन से भी मदद की गुहार लगा सकते हैं।

जौनपुर जिले के बदलापुर तहसील क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक और चिंताजनक मामला सामने आया है,

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जहां गंभीर बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझ रहे एक युवक का परिवार जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। सिंगरामऊ पोस्ट के अंतर्गत आने वाले मिश्रौली गांव निवासी 38 वर्षीय बलराम दुबे इन दिनों गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और इलाज के अभाव में उनका जीवन बेहद कठिन परिस्थितियों में गुजर रहा है।

जानकारी के अनुसार बलराम दुबे काफी समय से एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। डॉक्टरों ने उन्हें गैंग्रीन जैसी खतरनाक बीमारी से पीड़ित बताया है। इस बीमारी के चलते उनके शरीर की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उनके हाथ और पैर की कुछ उंगलियां भी काटनी पड़ीं। लंबे समय से इलाज चलने के बावजूद उनकी स्थिति में खास सुधार नहीं हो पाया है।

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बलराम दुबे की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। उनके पास न तो खेती है और न ही कोई स्थायी रोजगार का साधन। बीमारी के कारण वह खुद भी काम करने में पूरी तरह असमर्थ हो चुके हैं। ऐसे में परिवार की आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है और घर में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

परिवार की हालत और भी ज्यादा दयनीय इसलिए हो गई है क्योंकि उनके घर में डेढ़ साल का एक छोटा बच्चा भी है। बच्चे के पालन पोषण और भविष्य की चिंता बलराम दुबे को हर पल सताती रहती है। वहीं उनकी पत्नी भी मानसिक रूप से कमजोर बताई जा रही हैं, जिसके कारण परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह बलराम दुबे के कंधों पर ही आ गई थी, लेकिन बीमारी ने उन्हें भी लाचार बना दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि बलराम दुबे का परिवार बेहद गरीब है और इस समय उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता और सरकारी मदद की सख्त जरूरत है। गांव के लोगों ने बताया कि कई बार स्थानीय स्तर पर मदद करने की कोशिश की गई, लेकिन बीमारी का इलाज इतना महंगा है कि बिना सरकारी सहयोग के यह संभव नहीं हो पा रहा है।

पीड़ित बलराम दुबे ने प्रशासन और समाज के सक्षम लोगों से मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि सरकार या समाज के लोग उनकी मदद करें तो वह अपना इलाज बेहतर तरीके से करा सकते हैं और अपने छोटे से परिवार को किसी तरह संभाल सकते हैं।

ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, इलाज की व्यवस्था और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए, ताकि एक गंभीर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति और उसके मासूम बच्चे का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

सोशल मीडिया से उड़ान भर रहा 12 वर्षीय आजाद कुमार, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का सपना

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मधुबनी (बिहार) : बिहार के मधुबनी जिले के मकिया बीसनपुर, थाना बेली पट्टी निवासी 12 वर्षीय आजाद कुमार इन दिनों सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। छोटी उम्र में ही उन्होंने अपनी मेहनत, लगन और रचनात्मकता के दम पर सोशल मीडिया की दुनिया में कदम रखा है और लगातार आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।
आजाद कुमार एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता रंजीत साहनी और माता नगीना देवी आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद हमेशा बेटे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। परिवार की इसी प्रेरणा से आजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी यात्रा शुरू की और इंस्टाग्राम पर सक्रिय होकर क्रिएटिव वीडियो व रील्स बनाना शुरू किया।
आजाद के वीडियो लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं और धीरे-धीरे उनकी पहचान एक उभरते हुए सोशल मीडिया क्रिएटर के रूप में बनने लगी है। वह लगातार नए-नए वीडियो बनाकर दर्शकों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं और अपने समर्थकों से जुड़ने के लिए समय-समय पर संदेश भी साझा करते हैं।
आजाद कुमार का सपना केवल प्रसिद्धि हासिल करना नहीं है, बल्कि वह सोशल मीडिया के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं। उनकी यह लगन और मेहनत न सिर्फ उनके गांव बल्कि पूरे मधुबनी जिले के लिए प्रेरणा बन सकती है।
ऐसे में जरूरत है कि लोग उनके प्रयास को प्रोत्साहित करें। उनके सोशल मीडिया अकाउंट को फॉलो कर, वीडियो शेयर कर और उनका हौसला बढ़ाकर इस छोटे से प्रतिभाशाली बच्चे के सपने को साकार करने में सहयोग दिया जा सकता है।
आजाद कुमार का सोशल मीडिया अकाउंट:
इंस्टाग्राम रंजीत साहनी