Tuesday, July 7, 2026
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जमीन के लिए दबाव, दहेज केस की धमकी और बार-बार जेल की नौबत: गर्भवती महिला ने लगाई न्याय की गुहार

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पटना (बिहार)। राजधानी पटना के भदौरा-लक्ष्मीचक क्षेत्र से एक गंभीर पारिवारिक विवाद सामने आया है, जहां जमीन-जायदाद, दूसरी शादी और दहेज केस के दबाव के बीच एक दंपति का जीवन संकट में घिर गया है। पीड़िता पुष्पा ने आरोप लगाया है कि पहली पत्नी पुनि देवी द्वारा लगातार दबाव और धमकियों के कारण उनका परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, पुष्पा की शादी वर्ष 2018 में सुभाष पासवान से हुई थी। आरोप है कि सुभाष पहले से ही पुनि देवी से शादीशुदा थे, लेकिन बाद में उन्होंने पुष्पा के साथ रहना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि पुनि देवी ने भी बाद में दूसरी शादी कर ली और अपने नए परिवार के साथ रह रही हैं, जहां उनके बच्चे भी हैं। इसके बावजूद वह लगातार सुभाष और पुष्पा पर जमीन और घर अपने नाम कराने का दबाव बना रही हैं।

पीड़िता का कहना है कि यह पूरा विवाद जमीन के लालच को लेकर है। पुनि देवी कथित रूप से बार-बार यह दबाव बना रही हैं कि जब तक संपत्ति उनके नाम नहीं की जाएगी, तब तक दहेज प्रताड़ना का मामला वापस नहीं लिया जाएगा। इस कारण सुभाष पासवान को कई बार जेल जाना पड़ा है, जिससे परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट चुका है।

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि पुष्पा इस समय चार महीने की गर्भवती हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी गर्भावस्था के दौरान पति के जेल जाने और थाने-कचहरी के चक्कर लगाने के कारण उनका गर्भपात हो चुका है। अब एक बार फिर वही स्थिति बन रही है, जिससे वह बेहद डरी और तनाव में हैं।

पीड़िता का आरोप है कि सुभाष पासवान अब तक करीब चार बार जेल जा चुके हैं और इस लगातार चल रहे विवाद के कारण परिवार का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में उनके होने वाले बच्चे का पालन-पोषण कैसे होगा।

फिलहाल, पुष्पा पटना के एक थाने में बैठकर न्याय का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर उन्हें और उनके पति को राहत दिलाई जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि पारिवारिक विवाद, संपत्ति के लालच और कानूनी दबाव किस तरह आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी संज्ञान लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाता है।

जमुई में जमीन मापी को लेकर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी का बड़ा आदेश, अंचल अधिकारी को दी गई कार्रवाई की हिदायत

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जमुई। बिहार के जमुई जिले में जमीन मापी को लेकर दायर एक शिकायत पर लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 के तहत दाखिल परिवाद पर सुनवाई करते हुए अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, जमुई ने अंचल अधिकारी झाझा को संबंधित भूमि की मापी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला झाझा प्रखंड के सोहजाना गांव से जुड़ा हुआ है, जहां जमीन के नापी को लेकर पीता भरत गोस्वामी पुत्र लक्ष्मण गोस्वामी द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सोहजाना गांव निवासी पीता भरत गोस्वामी पुत्र लक्ष्मण गोस्वामी ने 6 जनवरी 2025 को बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम 2015 की धारा 2 के तहत परिवाद दायर किया था। इस परिवाद को अनन्य संख्या 537110106012102156 के रूप में दर्ज किया गया। अपने आवेदन में परिवादी ने बताया कि उनकी जमीन खाता संख्या 14, खेसरा संख्या 684 और 687, कुल रकवा लगभग 16 डिसमिल की नापी अब तक नहीं कराई गई है, जिसके कारण उन्हें लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से उक्त जमीन की विधिवत मापी कराने की मांग की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान लोक प्राधिकार सह अंचल अधिकारी झाझा को नोटिस जारी किया गया और कई तिथियों पर सुनवाई की गई। 27 जनवरी, 10 फरवरी, 24 फरवरी और 1 मार्च को इस मामले में सुनवाई हुई, जिसमें परिवादी स्वयं उपस्थित रहे और अपने पक्ष में साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के दौरान अंचल अधिकारी झाझा की ओर से भी प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें बताया गया कि मौजा सोहजाना के खाता संख्या 14 के खेसरा 684 में बेलगान दर्ज है और इसकी जमाबंदी कायम नहीं है।

प्रतिवेदन में यह भी स्पष्ट किया गया कि खाता संख्या 14 के खेसरा 687, रकवा 13 डिसमिल जमीन जमाबंदी सुधार वाद संख्या 9/07 के आदेश के आलोक में जमाबंदी संख्या 11 में भरत गोस्वामी, भगवान गोस्वामी और बोधु गोस्वामी के नाम से दर्ज है। अंचल कार्यालय की ओर से बताया गया कि संबंधित जमीन की मापी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और चौहद्दीदार को सूचना निर्गत कर दी गई है। इसके बाद 28 अप्रैल को जमीन की मापी की तिथि निर्धारित की गई है।

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने मामले की सुनवाई और प्रस्तुत प्रतिवेदन का अवलोकन करने के बाद निर्देश दिया कि निर्धारित तिथि पर जमीन की मापी कराई जाए और मापी के बाद उसकी रिपोर्ट कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए। आदेश में यह भी कहा गया कि अंचल अधिकारी झाझा मापी की कार्रवाई पूरी होने के बाद विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही परिवाद को स्वीकार करते हुए वाद की कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।

इस आदेश के साथ ही आदेश की प्रति परिवादी और संबंधित प्राधिकार को भेजने का निर्देश दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह मामला अब जमीन मापी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे बढ़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जमीन विवाद और मापी से जुड़े मामलों में इस तरह के आदेश से आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

फैक्ट्री हादसे के बाद मजदूर को नौकरी से निकाला, मुआवजा और ईएसआई तक नहीं: गार्ड से पिटवाने का आरोप, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा दिलीप

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फरीदाबाद/नोएडा। औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले एक मजदूर के साथ कथित अन्याय और शोषण का मामला सामने आया है, जिसने श्रमिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगभग 10 वर्षों तक एक निजी कंपनी में कार्यरत रहे दिलीप कुमार आज न केवल बेरोजगार हैं, बल्कि अपने हक और इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

पीड़ित दिलीप कुमार, पुत्र कमलेश सिंह, वर्तमान में झाड़सेंटली, फरीदाबाद के निवासी हैं। उनका आरोप है कि वह वर्ष 2016 से विकटोरा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड (Vitora Engineers Pvt. Ltd.), सेक्टर-58 स्थित प्लॉट नंबर 1136 में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। कोरोना काल के दौरान कंपनी में काम करते समय एक गंभीर हादसे में उनके दाहिने हाथ की चार उंगलियां कट गईं, जिससे उनका जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। आरोप है कि इतने बड़े हादसे के बावजूद कंपनी ने उन्हें मात्र 11 हजार रुपये देकर मामले को खत्म करने की कोशिश की।

दिलीप का कहना है कि फरवरी 2025 में कंपनी में काम के दौरान एक और हादसा हुआ, जिसमें उनके सिर पर गंभीर चोट आई और काफी खून बह गया। उन्हें इलाज के लिए सेक्टर-55 स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने एक महीने के बेड रेस्ट की सलाह दी। लेकिन आरोप है कि इस दौरान कंपनी की ओर से न तो ईएसआई सुविधा दी गई और न ही इलाज का कोई खर्च उठाया गया।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब वह अपनी समस्या लेकर कंपनी के एचआर रवि और ठेकेदार रविंद्र डागर से मिलने पहुंचे, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। इतना ही नहीं, उन्हें गार्ड से पिटवाकर कंपनी से बाहर निकाल दिया गया और साफ तौर पर कह दिया गया कि अब उन्हें नौकरी, वेतन या मुआवजा कुछ भी नहीं मिलेगा। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी के रूप में उनके दो सहकर्मी संतोष चौहान और चंदन का नाम सामने आया है।

दिलीप कुमार का यह भी कहना है कि उन्होंने इस पूरे मामले की शिकायत सेक्टर-58 थाने में दी, लेकिन वहां भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को भी प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन्हें न तो दुर्घटना का उचित मुआवजा मिला, न ही वेतन और न ही किसी प्रकार की पुनर्वास सहायता।

आज हालत यह है कि दिलीप कुमार दिहाड़ी मजदूरी कर किसी तरह अपना और अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं। उनकी पत्नी रिंकी देवी और 11 वर्षीय बेटा हरिओम कुमार भी इस आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। परिवार मूल रूप से बिहार के नवाड़ी क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है और वर्तमान में बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहा है।

पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, कंपनी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो, उन्हें उचित मुआवजा, बकाया वेतन और स्थायी नौकरी दिलाई जाए। यह मामला न केवल एक मजदूर के शोषण की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक किस तरह सुरक्षा और अधिकारों के अभाव में जीवन जीने को मजबूर हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दिलीप कुमार को समय रहते न्याय मिल पाता है या नहीं।

 सहरसा में नवविवाहिता लापता: ससुराल पक्ष पर संदेह, डेढ़ साल का मासूम घर में छोड़ गई, मायके वालों ने उठाए गंभीर सवाल

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समस्तीपुर जिले के हसनपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली 20 वर्षीय सुरुचि के रहस्यमय तरीके से लापता होने का मामला सामने आया है, जिसने दोनों परिवारों के बीच तनाव और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। सुरुचि की शादी करीब तीन साल पहले सहरसा जिले के बिछूना गांव निवासी पप्पन शर्मा से हुई थी। दंपति का डेढ़ साल का एक बच्चा भी है, जो फिलहाल ससुराल में ही है। घटना के बाद से मायके पक्ष का आरोप है कि ससुराल वाले सही जानकारी नहीं दे रहे हैं और पूरे मामले को संदिग्ध तरीके से टालने की कोशिश कर रहे हैं।

मायके पक्ष के अनुसार, सुरुचि की मां मालिया देवी ने बताया कि उनकी बेटी को हमेशा उसके ससुर गणेश जी ही लाने और ले जाने का काम करते थे। लेकिन इस बार अचानक यह कहा जा रहा है कि सुरुचि सुबह 7 बजे घर से निकल गई, जबकि कभी-कभी यह भी कहा जा रहा है कि वह दोपहर 2 बजे गई थी। ससुराल पक्ष के बयान लगातार बदल रहे हैं, जिससे संदेह और गहरा गया है। इतना ही नहीं, परिवार वालों का यह भी कहना है कि कभी कहा जाता है कि उसे टेंपो में बैठा दिया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा कि उसे आखिर भेजा कहां गया।

मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि सुरुचि का डेढ़ साल का बच्चा ससुराल में ही छोड़ दिया गया है। मायके वालों का कहना है कि अगर वह कहीं जाती तो अपने बच्चे को साथ लेकर जाती। इसके अलावा, ससुराल पक्ष ने मायके वालों के फोन नंबर भी ब्लॉक कर दिए हैं और किसी तरह की स्पष्ट जानकारी देने से बच रहे हैं। कभी यह कहा जा रहा है कि वह किसी रिश्तेदार के यहां गई है, लेकिन उस रिश्तेदार का नाम और स्थान तक नहीं बताया जा रहा।

मालिया देवी और उनके परिजनों ने इस पूरे मामले में अनहोनी की आशंका जताई है। उनका कहना है कि जब हमेशा ससुर ही बेटी को लेकर आते-जाते थे, तो इस बार उसे अकेले क्यों भेजा गया और मायके वालों को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई। घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सुरुचि का कोई सुराग नहीं मिल पाया है, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है।

मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। मायके पक्ष ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़ी घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है, ताकि सच सामने आ सके और लापता युवती का जल्द से जल्द पता लगाया जा सके।

 

अहमदाबाद जिले के साणंद क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है,

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जहां सोयला गांव में अवैध शराब की भट्ठी चलाने और साणंद जीआईडीसी क्षेत्र में खुलेआम शराब बेचने का धंधा लंबे समय से जारी होने की खबर है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को भरतभाई और अरविंदभाई उर्फ हक्का भाई द्वारा संचालित किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि सोयला गांव के आसपास गुपचुप तरीके से अवैध शराब बनाई जाती है और फिर उसे साणंद जीआईडीसी के विभिन्न इलाकों में सप्लाई किया जाता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा कारोबार कथित रूप से खुलेआम चल रहा है, जिससे स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश का माहौल है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस अवैध धंधे की जानकारी संबंधित विभागों और पुलिस तक भी है, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। चर्चा यह भी है कि इस अवैध कारोबार को चलाने के लिए हर महीने लाखों रुपये तक की रकम कथित रूप से पुलिस को दी जाती है, जिससे कार्रवाई नहीं हो पाती।

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनी रहे और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक इस अवैध शराब के नेटवर्क पर कार्रवाई होती है।

बेगूसराय में जमीन विवाद ने लिया खतरनाक मोड़, अकेले व्यक्ति को धमकाकर जबरन दीवार निर्माण का आरोप

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बिहार के बेगूसराय जिले के तेघड़ा अनुमंडल से एक गंभीर जमीन विवाद का मामला सामने आया है, जहां एक 55 वर्षीय व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि उसके हिस्से की जमीन पर दबंगों द्वारा जबरन कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। पीड़ित ने यह भी दावा किया है कि विरोध करने पर उसे और उसकी नाबालिग बेटी को जान से मारने की धमकी दी गई।

ग्राम हरिहरपुर, नगर परिषद तेघड़ा वार्ड नंबर 01 निवासी शरवन पासवान के अनुसार, यह घटना 10 जून 2025 की शाम करीब 5 बजे की है। उन्होंने बताया कि गांव के ही कुछ लोग, जिनमें गीता देवी, अंकित कुमार, शेर बिहार, रंजू देवी और राजन पासवान शामिल हैं, उनके हिस्से की जमीन पर पहुंच गए और वहां जबरन ईंट की दीवार खड़ी करने लगे।

पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने अपने चापाकल को गाड़ने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उन्हें रोक दिया और कहा कि वह अपनी ही जमीन पर कोई निर्माण नहीं कर सकते। जब शरवन पासवान ने इसका विरोध किया, तो सभी आरोपियों ने मिलकर उनके साथ गाली गलौज की और मारपीट करने पर उतारू हो गए। इतना ही नहीं, राजन पासवान ने कथित तौर पर अन्य लोगों को उकसाते हुए कहा कि शरवन पासवान को मारकर दीवार में दफना दो।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शरवन पासवान ने तुरंत 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस सहायता मांगी, जिससे किसी तरह उनकी और उनकी बेटी की जान बच सकी।

पीड़ित ने यह भी बताया कि जिस जमीन को लेकर विवाद हो रहा है, वह मामला पहले से ही तेघड़ा सिविल कोर्ट में टीएस नंबर 178 22 के तहत लंबित है। इसके बावजूद आरोपित लोग उनके अकेलेपन का फायदा उठाकर जबरन निर्माण कार्य कर रहे हैं, जो पूरी तरह अवैध है।

शरवन पासवान ने आशंका जताई है कि आरोपी कभी भी उनके साथ कोई बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में अब केवल वे ही हैं, जबकि उनके भाई का निधन हो चुका है, जिससे वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

पीड़ित ने प्रशासन और न्यायालय से अपील की है कि उनके आवेदन पर गंभीरता से विचार करते हुए तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें तथा उनके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।

जमीन का विवरण भी उन्होंने अपने आवेदन में दिया है, जिसमें मौजा गौड़ा, जमाबंदी संख्या 256, खाता 2125, खेसरा 59 और कुल रकबा 6.84 में से उनका हिस्सा लगभग एक कट्ठा बताया गया है। चारों ओर की सीमाओं में उत्तर में भोलन सिंह, दक्षिण में स्वर्गीय पवन पासवान के वारिसान, पूर्व में एनएच 28 सड़क और पश्चिम में भोलन सिंह की जमीन बताई गई है।

यह मामला न केवल जमीन विवाद का है, बल्कि कानून व्यवस्था और एक व्यक्ति की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है, जिस पर अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।

चार बच्चों की मां का सोशल मीडिया पर कमाल: गांव की महिला बना रही डांस वीडियो, चाहती हैं जौनपुर से लेकर पूरे देश में हो पहचान

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जौनपुर। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रामपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली संतोष गौतम इन दिनों सोशल मीडिया के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश में जुटी हुई हैं। चार बच्चों की मां संतोष पिछले करीब एक साल से अलग-अलग गानों पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा कर रही हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उनका हौसला और आत्मविश्वास लोगों का ध्यान खींच रहा है।

संतोष गौतम का कहना है कि वह अपने मोबाइल फोन से ही अकेले वीडियो बनाती हैं। उनके पास कोई बड़ी टीम या तकनीकी साधन नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद वह लगातार नए-नए गानों पर वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहती हैं। इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर उन्होंने अपने चैनल और अकाउंट बनाए हुए हैं, जहां वह नियमित रूप से सक्रिय रहती हैं।

संतोष बताती हैं कि उनके पति बाहर रहकर मजदूरी करते हैं और परिवार की जिम्मेदारी संभालते हैं। हालांकि पति उनके वीडियो देखकर खुश होते हैं और उनका पूरा समर्थन भी करते हैं। संतोष का कहना है कि परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ वह अपने शौक को भी आगे बढ़ाना चाहती हैं और चाहती हैं कि उनके वीडियो ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।

उन्होंने बताया कि उनका सपना है कि उनके वीडियो सिर्फ रामपुर या जौनपुर तक ही सीमित न रहें, बल्कि पूरे देश में लोग उन्हें देखें और पसंद करें। वह चाहती हैं कि उनके वीडियो बड़े कलाकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स तक भी पहुंचें, ताकि उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिल सके।

संतोष का कहना है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाला एक लाइक, एक सब्सक्राइब और एक फॉलो भी उनके लिए बहुत मायने रखता है। इससे उन्हें और बेहतर वीडियो बनाने की प्रेरणा मिलती है। उनका मानना है कि अगर लोगों का प्यार और समर्थन मिला तो वह अपने बच्चों के भविष्य को भी सुरक्षित कर पाएंगी और अपनी पहचान भी बना सकेंगी।

शादी के दो दिन बाद ही दुल्हन को मायके ले गए परिजन, युवक ने लगाया धमकी और दबाव का आरोप

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मधुबनी (बिहार)। जिले के जयनगर थाना क्षेत्र के सुलानाथ बरही गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां शादी के महज दो दिन बाद ही दुल्हन को उसके मायके वाले अपने साथ ले गए। इस घटना के बाद पति धर्मेंद्र कुमार मानसिक रूप से परेशान है और अपनी पत्नी की वापसी के लिए प्रशासन से गुहार लगा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र कुमार, आत्मज राम वृक्ष सदाय, वार्ड नंबर 02, बरही, जिला मधुबनी के निवासी हैं। उनकी शादी हाल ही में भारती कुमारी के साथ आपसी सहमति से घर पर ही संपन्न हुई थी। लेकिन शादी के अगले ही दिन सुबह भारती के परिजन उसे अपने साथ ले गए और तब से अब तक उसे वापस नहीं भेजा गया है।

धर्मेंद्र कुमार का आरोप है कि उसकी पत्नी को उसके परिवार वालों द्वारा डराया-धमकाया जा रहा है, जिसके कारण वह वापस नहीं आ पा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि भारती के परिजन उन पर दबाव बना रहे हैं कि वे दोनों के साथ की तस्वीरें डिलीट कर दें। इस पूरे मामले से धर्मेंद्र काफी तनाव में हैं और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

धर्मेंद्र के मुताबिक, वह और भारती पिछले करीब एक साल से एक-दूसरे के संपर्क में थे और दोनों के बीच लगातार बातचीत होती थी। उन्होंने बताया कि आपसी समझ और सहमति के आधार पर ही दोनों ने शादी करने का फैसला लिया था। उनका कहना है कि अगर कभी विवाद भी हुआ, तो भारती ही आगे बढ़कर संबंध को संभालती थी।

मामले में भारती के भाई विजय पासवान का नाम भी सामने आ रहा है। धर्मेंद्र का दावा है कि भारती पहले भी दो बार घर से जा चुकी है और एक बार शादी भी कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि शादी के समय भारती ने खुद उनके साथ जाने की बात कही थी और भरोसा दिलाया था कि वह वापस आएगी।

फिलहाल, धर्मेंद्र कुमार प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और उन्हें न्याय दिलाया जाए। यह घटना प्रेम विवाह और पारिवारिक दबाव के बीच टकराव की एक और मिसाल बनकर सामने आई है। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और कब तक सच्चाई सामने आती है।

दिल्ली में भीषण अग्निकांड: हेमंती देवी की झुग्गी जलकर खाक, 3 लाख का नुकसान

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दिल्ली | विशेष रिपोर्ट
दिल्ली में बीती रात एक भीषण अग्निकांड ने गरीब परिवार को सड़क पर ला दिया। पीड़िता हेमंती देवी, पत्नी हरिनंदन कुमार ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि उनकी झुग्गी में अचानक आग लग गई, जिससे पूरा घर और उसमें रखा सारा सामान जलकर राख हो गया।
हेमंती देवी ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि संभलने का मौका ही नहीं मिला। घर में रखा खाने-पीने का सामान, कपड़े सहित हर जरूरी चीज जलकर खत्म हो गई। इस हादसे में लगभग 3 लाख रुपये का नुकसान बताया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर पहुंच जाती तो काफी सामान बचाया जा सकता था, लेकिन फायर ब्रिगेड के देर से पहुंचने के कारण सब कुछ जलकर राख हो गया। हालांकि मौके पर डायल 112 की टीम पहुंची, लेकिन तब तक आग पूरी तरह फैल चुकी थी।
पीड़िता के अनुसार इस अग्निकांड में करीब 15 से 20 झुग्गियां भी प्रभावित हुई हैं। उन्होंने इस घटना का वीडियो भी बनाया है और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
हेमंती देवी ने बताया कि घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं, जो अब भूख से बिलख रहे हैं क्योंकि खाने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई भी सामाजिक संस्था या प्रशासन उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया है।
जो भी व्यक्ति या संस्था उनकी मदद करना चाहता है, वह नीचे दिए गए नंबर पर संपर्क कर सकता है।
मदद हेतु संपर्क नंबर: 8826032421

बेटियों की शादी के लिए संघर्षरत सिवान की निर्मला देवी ने बागेश्वर धाम से लगाई मदद की गुहार

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सिवान जिले में रहने वाली निर्मला देवी और उनके पति रमेश यादव की जिंदगी इन दिनों गहरी आर्थिक तंगी के बीच गुजर रही है। रमेश यादव मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन सीमित आमदनी के कारण घर की जिम्मेदारियां पूरी करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। परिवार की बढ़ती जरूरतों के बीच बेटियों की शादी की चिंता अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

निर्मला देवी और रमेश यादव के परिवार में चार बेटियां और दो बेटे हैं। इनमें से एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि तीन बेटियों के विवाह की जिम्मेदारी अभी बाकी है। माता-पिता का कहना है कि वे अपनी बेटियों की शादी सम्मानपूर्वक करना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक हालात लगातार बाधा बन रहे हैं। रोजाना की कमाई से घर का खर्च ही मुश्किल से चलता है, ऐसे में शादी जैसे बड़े आयोजन की तैयारी उनके लिए लगभग असंभव हो गई है।

परिवार ने उम्मीद और आस्था के सहारे बागेश्वर धाम से सहायता की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि उन्हें विश्वास है कि यदि कोई सहयोग मिल जाए तो वे अपनी बाकी बेटियों का विवाह भी सामाजिक सम्मान के साथ कर पाएंगे। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और स्थानीय लोग भी परिवार की स्थिति को लेकर संवेदनशीलता जता रहे हैं।

सिवान का यह परिवार आज जिस कठिन दौर से गुजर रहा है, वह देश के कई ऐसे मजदूर परिवारों की हकीकत भी बयां करता है, जो सीमित संसाधनों में बड़ी जिम्मेदारियों को निभाने की कोशिश कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस परिवार की मदद के लिए कौन आगे आता है और क्या इन बेटियों के सपनों को नया सहारा मिल पाएगा।