Tuesday, July 7, 2026
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छेड़छाड़, गाली-गलौज और मारपीट का आरोप: शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, पीड़िता ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार

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कासगंज। जिले के सिद्धपुरा थाना क्षेत्र के नगला मोड़ गांव से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवती ने गांव के ही एक व्यक्ति और उसके परिजनों पर गाली-गलौज, अभद्र भाषा का प्रयोग और मारपीट करने का आरोप लगाया है। पीड़िता का यह भी कहना है कि थाने में शिकायत देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उसे ही धमकाया गया, जिससे वह भय और तनाव में जीने को मजबूर है।

पीड़िता कुसुमा कुमारी, पुत्री अनोखेलाल, निवासी ग्राम नगला मोड़, पोस्ट पिथनपुर ने पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि 4 मार्च 2026 को दोपहर करीब 2 बजे गांव के ही धर्मेंद्र पुत्र रामेश्वर ने उसे निशाना बनाते हुए बेहद आपत्तिजनक और घिनौने शब्दों का प्रयोग किया। जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी और उसके पिता ने मिलकर न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उसके साथ और उसके परिवार के साथ मारपीट भी की।

पीड़िता के अनुसार, घटना के तुरंत बाद उसने उसी दिन थाना सिद्धपुरा में लिखित शिकायत दी, लेकिन पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि उल्टा उसे ही डराया-धमकाया गया, जिससे उसका मनोबल टूट गया और न्याय की उम्मीद कम होती नजर आ रही है।

कुसुमा कुमारी ने बताया कि वह पढ़ाई के सिलसिले में अधिकतर कासगंज में रहती है, लेकिन जब भी गांव लौटती है, तब उसके साथ इस प्रकार की घटनाएं पहले भी कई बार हो चुकी हैं। लगातार हो रहे उत्पीड़न से वह बेहद परेशान है और भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जता रही है।

पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि उसे न्याय मिल सके और वह सुरक्षित माहौल में जीवन यापन कर सके।

 

हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर बना खतरा: आम रास्ते पर लगा बिजली का जाल, ग्रामीणों में दहशत, शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

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मऊ (उत्तर प्रदेश)। जिले के गोकुलपुरा गांव में बिजली विभाग की लापरवाही अब बड़े हादसे का कारण बन सकती है। गांव के मुख्य आम रास्ते पर लगाए गए हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर ने स्थानीय लोगों की नींद उड़ा दी है। यही रास्ता गांव के लोगों, बच्चों और मवेशियों के आने-जाने का एकमात्र साधन है, लेकिन खुले में लगा यह ट्रांसफॉर्मर अब खतरे की घंटी बन चुका है।

गांव निवासी के अनुसार, जब इस ट्रांसफॉर्मर को लगाया जा रहा था, तभी उन्होंने और अन्य ग्रामीणों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि गांव में पर्याप्त खाली जगह होने के बावजूद भी इसे जानबूझकर आम रास्ते पर स्थापित कर दिया गया। अब हालात ऐसे हैं कि छोटे बच्चे उसी रास्ते पर खेलते हैं और मवेशी भी वहीं से गुजरते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इस मामले की शिकायत ग्राम सरपंच से लेकर बिजली विभाग तक कई बार की जा चुकी है, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है। “आज कर देंगे, कल कर देंगे” कहकर मामला टाल दिया जाता है, लेकिन ट्रांसफॉर्मर को शिफ्ट करने की दिशा में अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

स्थिति और भी गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि ट्रांसफॉर्मर के आसपास कोई बाउंड्री या सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। निकासा रोड पर खुले में लगा यह हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर बच्चों और जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिरकार किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार क्यों किया जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्तमान में विदेश (अबू धाबी, दुबई) में काम करते हैं, लेकिन उनका परिवार गांव में ही रहता है। परिवार के छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस ट्रांसफॉर्मर को तुरंत सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए और उचित बाउंड्री बनाकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह लापरवाही कभी भी बड़े हादसे में बदल सकती है।

 

दूध लेने निकली किशोरी लापता: इतने दिन बीत जाने के बाद भी नहीं मिला सुराग, परिवार ने पुलिस पर लगाई सुस्ती का आरोप

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नई दिल्ली। पश्चिम विहार थाना क्षेत्र से एक नाबालिग किशोरी के लापता होने का मामला सामने आया है, जिसने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। नांगलोई के भीमनगर कैंप नंबर 2 निवासी सतिश कुमार की 16-17 वर्षीय बेटी गौरी 17 मार्च 2026 को घर से दूध लेने जाने की बात कहकर निकली थी, लेकिन उसके बाद से वह वापस नहीं लौटी। परिजनों के मुताबिक, गौरी चार नंबर सब्जी मंडी की ओर गई थी, जिसके बाद उसका कोई सुराग नहीं लग पाया है।

परिवार का कहना है कि गौरी पहले भी कई बार घर छोड़कर जा चुकी है, लेकिन हर बार उसे ढूंढकर वापस लाया गया था। इस बार मामला ज्यादा गंभीर इसलिए भी हो गया है क्योंकि गौरी की मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं बताई जा रही है। साथ ही वह अपने साथ आधार कार्ड भी लेकर गई है, जिससे परिजनों की चिंता और बढ़ गई है।

पिता सतिश कुमार ने बताया कि बेटी के लापता होने के बाद से ही परिवार के सदस्य लगातार उसकी तलाश में जुटे हुए हैं। आसपास के इलाकों, रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई, लेकिन कहीं से भी कोई जानकारी नहीं मिल सकी। परिजनों का आरोप है कि थाना स्तर पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे उनकी चिंता और गहरा गई है।

इस संबंध में सतिश कुमार ने थाना पश्चिम विहार में लिखित प्रार्थना पत्र देकर बेटी की गुमशुदगी की सूचना दी है और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि भविष्य में बेटी के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसके लिए परिवार जिम्मेदार नहीं होगा।

परिवार ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को भी गौरी के बारे में कोई जानकारी मिले, तो तुरंत दिए गए मोबाइल नंबर 8826802816, 8745868633 या नजदीकी थाने में सूचना दें। परिजनों का कहना है कि एक छोटी सी सूचना उनकी बेटी को सुरक्षित वापस ला सकती है।

बदायूं में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, दबंगों पर अवैध कब्जे और निर्माण की कोशिश का आरोप

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बदायूं। जिले के दातागंज तहसील क्षेत्र से जमीन विवाद का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने अपनी खरीदी हुई भूमि पर कुछ लोगों द्वारा जबरन कब्जा कर अवैध निर्माण करने की कोशिश का आरोप लगाया है। पीड़ित ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाते हुए निष्पक्ष पैमाइश कराने की मांग की है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम महिला परगना सलेमपुर निवासी इरशाद खाँ ने वर्ष 2011 में ग्राम कुड़ा कुठिया सुल्तानपुर स्थित गाटा संख्या 22/3 (रकबा 0.468) और गाटा संख्या 23 (रकबा 0.063) की भूमि विधिवत बैनामा कर खरीदी थी। दोनों ही जमीनों का दाखिल-खारिज भी पूरा हो चुका है और तब से वह लगातार इन पर खेती करते आ रहे हैं।

पीड़ित का कहना है कि उक्त जमीन मुख्य मार्ग पर स्थित है और इसके आसपास तीन तरफ बस्ती विकसित हो चुकी है, जिससे जमीन की कीमत और महत्व बढ़ गया है। इसी बीच गांव के ही कुछ लोग—नरेश सिंह, केन्द्र सिंह, उर्वेश सिंह और रघुराज सिंह—अब इस जमीन को अपनी बताकर उस पर जबरन कब्जा करने और अवैध निर्माण करने का प्रयास कर रहे हैं।

इरशाद खाँ का आरोप है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उक्त लोगों ने विवाद खड़ा कर दिया और लगातार दबाव बनाने लगे। उन्होंने बताया कि इस मामले की शिकायत थाना पुलिस, उप जिलाधिकारी दातागंज समेत अन्य अधिकारियों से भी की गई, जिसके चलते कुछ समय के लिए अवैध निर्माण रुका, लेकिन अब फिर से निर्माण कराने की कोशिश की जा रही है।

पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया कि राजस्व विभाग द्वारा की गई पूर्व पैमाइश को भी आरोपी मानने से इनकार कर रहे हैं और अपनी राजनीतिक पहुंच का हवाला देकर दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ी अनहोनी घटना हो सकती है, क्योंकि आरोपी पक्ष लगातार झगड़े पर आमादा है।

इस पूरे मामले को लेकर इरशाद खाँ ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपते हुए मांग की है कि उच्चाधिकारियों की उपस्थिति में राजस्व टीम गठित कर दोनों गाटा संख्याओं की दोबारा निष्पक्ष पैमाइश कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और अवैध कब्जे की कोशिश पर रोक लगाई जा सके।

फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।

 

पटियाला जिले में पत्नी के लापता होने से परेशान पति ने लगाई मदद की गुहार, बच्चों की हालत बिगड़ने की कही बात

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पटियाला जिले से एक भावनात्मक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति अपनी लापता पत्नी को वापस पाने के लिए लगातार गुहार लगा रहा है। पति द्वारा भेजे गए संदेशों में उसकी बेबसी, चिंता और बच्चों की हालत को लेकर गहरी पीड़ा साफ झलक रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पति ने दावा किया है कि उसकी पत्नी हरियाणा के कुरुक्षेत्र क्षेत्र में पानी के फिल्टर सप्लाई का काम कर रही है। उसने एक मोबाइल नंबर भी साझा किया है, जिसे वह मकान मालिक का संपर्क बता रहा है और इसी के आधार पर पत्नी का लोकेशन ट्रेस करने की अपील कर रहा है।

पति ने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि यदि उसकी पत्नी किसी व्यक्ति के साथ है तो संबंधित व्यक्ति को भी हिरासत में लेकर जांच की जाए। उसने यह भी कहा कि उसकी पत्नी को सुरक्षित हिरासत में लेकर दिल्ली में रखा जा सकता है, जहां उसके रिश्तेदार मौजूद हैं।

सबसे भावुक पहलू इस मामले का बच्चों से जुड़ा हुआ है। पति के अनुसार, मां के बिना बच्चों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। उनका खानपान, देखभाल और मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उसने कहा कि बच्चों का जीवन अधूरा सा हो गया है और वे अपनी मां के लिए लगातार रो रहे हैं।

पति ने अपने संदेशों में यह भी उल्लेख किया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और वह पूरी तरह अकेला है। इसी कारण उसने इस मामले को पूरी तरह प्रशासन के भरोसे छोड़ते हुए मदद की गुहार लगाई है। उसने बार-बार अधिकारियों से 100 प्रतिशत सहयोग की उम्मीद जताई है और कहा है कि उसकी पत्नी को जल्द से जल्द वापस लाया जाए।

यह मामला न केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई कितनी जरूरी होती है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित प्रशासन ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं, लेकिन पति की अपील ने इस घटना को गंभीर बना दिया है।

अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और क्या इस परिवार को जल्द राहत मिल पाती है या नहीं।

पटियाला जिले में पत्नी के लापता होने से परेशान पति ने लगाई मदद की गुहार, बच्चों की हालत बिगड़ने की कही बात

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पटियाला जिले से एक भावनात्मक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति अपनी लापता पत्नी को वापस पाने के लिए लगातार गुहार लगा रहा है। पति द्वारा भेजे गए संदेशों में उसकी बेबसी, चिंता और बच्चों की हालत को लेकर गहरी पीड़ा साफ झलक रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पति ने दावा किया है कि उसकी पत्नी हरियाणा के कुरुक्षेत्र क्षेत्र में पानी के फिल्टर सप्लाई का काम कर रही है। उसने एक मोबाइल नंबर भी साझा किया है, जिसे वह मकान मालिक का संपर्क बता रहा है और इसी के आधार पर पत्नी का लोकेशन ट्रेस करने की अपील कर रहा है।

पति ने अधिकारियों से अनुरोध किया है कि यदि उसकी पत्नी किसी व्यक्ति के साथ है तो संबंधित व्यक्ति को भी हिरासत में लेकर जांच की जाए। उसने यह भी कहा कि उसकी पत्नी को सुरक्षित हिरासत में लेकर दिल्ली में रखा जा सकता है, जहां उसके रिश्तेदार मौजूद हैं।

सबसे भावुक पहलू इस मामले का बच्चों से जुड़ा हुआ है। पति के अनुसार, मां के बिना बच्चों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। उनका खानपान, देखभाल और मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। उसने कहा कि बच्चों का जीवन अधूरा सा हो गया है और वे अपनी मां के लिए लगातार रो रहे हैं।

पति ने अपने संदेशों में यह भी उल्लेख किया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और वह पूरी तरह अकेला है। इसी कारण उसने इस मामले को पूरी तरह प्रशासन के भरोसे छोड़ते हुए मदद की गुहार लगाई है। उसने बार-बार अधिकारियों से 100 प्रतिशत सहयोग की उम्मीद जताई है और कहा है कि उसकी पत्नी को जल्द से जल्द वापस लाया जाए।

यह मामला न केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई कितनी जरूरी होती है। फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित प्रशासन ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं, लेकिन पति की अपील ने इस घटना को गंभीर बना दिया है।

अब देखना होगा कि पुलिस और प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करते हैं और क्या इस परिवार को जल्द राहत मिल पाती है या नहीं।

दिव्यांग पति की पत्नी दर-दर भटकने को मजबूर: दबंगों पर मकान कब्जाने का आरोप, शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

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अम्बेडकरनगर। जिले के बसखारी थाना क्षेत्र के शाहपुर-महमूदपुर गांव से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला अपने ही मकान के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। पीड़िता संगीता सिंह ने आरोप लगाया है कि विपक्षी पक्ष दबंगई के बल पर उनके घर पर अवैध कब्जा जमाए हुए हैं और उन्हें तथा उनके छोटे-छोटे बच्चों को घर में घुसने तक नहीं दिया जा रहा।

पीड़िता के अनुसार, उनके पति ध्रुवनारायन सिंह लगभग 60 प्रतिशत दिव्यांग हैं और उनके देवर भी शारीरिक रूप से अक्षम हैं, जिसके चलते परिवार पूरी तरह से असहाय स्थिति में है। संगीता सिंह ने बताया कि उनके ससुर का निधन वर्ष 1992 में हो गया था और परिवार के पास रहने के लिए कोई पक्का घर नहीं था। ऐसे में वर्ष 2002 में उनके पति ने अपनी जमीन बेचकर यह मकान बनवाया था, जो पूरी तरह उनका है।

संगीता सिंह का आरोप है कि रेनू मिश्रा (पत्नी स्व. अशोक मिश्रा) और रोहित मिश्रा (पुत्र अशोक मिश्रा) जबरन उनके घर में कब्जा कर रह रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि रेनू मिश्रा की शादी हो चुकी है, इसके बावजूद वह लॉकडाउन के समय से ही उनके घर में रहकर कब्जा जमाए हुए हैं और अब घर खाली करने से इनकार कर रही हैं। इतना ही नहीं, पीड़िता के पति पर 307 जैसे गंभीर मुकदमे में भी फंसाने का आरोप लगाया गया है, जिससे परिवार और अधिक भय और दबाव में है।

पीड़िता ने बताया कि उन्होंने इस मामले में कई बार उपजिलाधिकारी आलापुर को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 45 और 46 के तहत प्रार्थना पत्र दिया, साथ ही मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी तीन बार शिकायत दर्ज कराई। शिकायत संदर्भ संख्या 15178260001262 होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता का कहना है कि अधिकारियों द्वारा केवल आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा।

घर से बेदखल होने के कारण संगीता सिंह अपने दो छोटे बच्चों के साथ बेहद दयनीय स्थिति में जीवन यापन कर रही हैं। बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है और परिवार मानसिक, सामाजिक व आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पीड़िता ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहा है कि उन्हें उनका मकान वापस दिलाया जाए ताकि वह अपने बच्चों के साथ सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस तरह के मामलों में भी प्रशासन निष्क्रिय बना रहेगा, तो आम लोगों का कानून व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। फिलहाल पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है और प्रशासनिक हस्तक्षेप का इंतजार कर रहा है।

लैंड फॉर जॉब्स मामले में लालू यादव और राबड़ी देवी को कोर्ट से बड़ा झटका, खारिज हई याचिका

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लैंड फॉर जॉब्स मामले में लालू यादव और राबड़ी देवी की ओर से दायर की गई याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि हर दस्तावेज पाने का आरोपियों का अधिकार नहीं है।दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट से लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बड़ा झटका मिला है। कोर्ट ने दोनों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में गैर-आश्रित दस्तावेज (non reliable documents) देने से इनकार किया। कोर्ट ने कहा कि हर दस्तावेज पाने का आरोपियों का अधिकार नहीं है। पहले अभियोजन अपने सबूत पेश करेगा, उसी आधार पर होगी सुनवाई। बिना ठोस बचाव के आरोपियों को अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की अनुमति नहीं। कोर्ट ने कहा कि याचिका खारिज करने से आरोपियों को कोई नुकसान नहीं। अन्य आरोपियों की समान याचिकाएं भी कोर्ट ने खारिज की।

पत्नी तीन बच्चों को लेकर लापता: परेशान पति दर-दर भटकने को मजबूर, दूसरे व्यक्ति के साथ जाने की आशंका

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कटिहार। जिले के हसनगंज थाना क्षेत्र से सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला अपने तीन बच्चों को साथ लेकर संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गई है। इस घटना के बाद से पति हबीब अली गहरे सदमे में हैं और लगातार अपनी पत्नी व बच्चों की तलाश में इधर-उधर भटक रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हबीब अली की पत्नी अलियारा खातून 25 दिसंबर 2025 को अचानक घर से चली गईं। बताया जा रहा है कि उनके कुल छह बच्चे हैं, जिनमें से तीन बच्चों को वह अपने साथ लेकर चली गईं, जबकि तीन बच्चे हबीब अली के पास ही रह गए। घटना के बाद से ही परिवार में हड़कंप मचा हुआ है और बच्चों के लापता होने से माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है।

पीड़ित हबीब अली का आरोप है कि उनकी पत्नी किसी अन्य व्यक्ति के साथ चली गई है। उन्होंने बताया कि घटना के बाद से उन्होंने अपने स्तर पर हर संभव जगह तलाश की, रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क किया, लेकिन अब तक पत्नी और बच्चों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। लगातार प्रयासों के बावजूद जब कोई जानकारी नहीं मिली तो उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।

इस पूरे घटनाक्रम के कारण हबीब अली की मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है। एक तरफ जहां वह तीन छोटे बच्चों की देखभाल कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पत्नी और बाकी बच्चों की चिंता उन्हें अंदर से तोड़ रही है। गांव में भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं और लोग मामले को गंभीरता से देख रहे हैं।

पीड़ित ने आम जनता से अपील की है कि यदि किसी को भी उनकी पत्नी या बच्चों के संबंध में कोई जानकारी मिलती है, तो तुरंत मोबाइल नंबर 7050669525 पर संपर्क करें या नजदीकी पुलिस थाना में सूचना दें, ताकि जल्द से जल्द उन्हें सकुशल वापस लाया जा सके।

रजिस्ट्री के बाद भी नहीं मिला हक: कब्जा न होने पर गीता देवी का म्यूटेशन वाद खारिज

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मुजफ्फरपुर। औराई अंचल के जनाढ़ गांव से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जमीन खरीदने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। यहां गीता देवी द्वारा जमीन खरीदने के बाद दाखिल किया गया म्यूटेशन वाद आखिरकार प्रशासन ने खारिज कर दिया।
जानकारी के अनुसार, गीता देवी ने 16 जनवरी 2025 को दस्तावेज संख्या 445 के तहत जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। इसके बाद म्यूटेशन के लिए आवेदन दिया गया। 20 जून 2025 को आवेदन प्राप्त होते ही उसी दिन पहली सुनवाई हुई और मामला जांच के लिए राजस्व कर्मचारी को भेज दिया गया।
31 जुलाई 2025 को जांच के दौरान पहली आपत्ति सामने आई। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि संबंधित भूमि पर पहले से विवाद है और खरीदार का उस पर शांतिपूर्ण कब्जा नहीं है। इसके बाद आवेदक को कई बार साक्ष्य प्रस्तुत करने का मौका दिया गया, लेकिन कोई ठोस दस्तावेज पेश नहीं किया गया।
22 अगस्त 2025 को जांच रिपोर्ट अनुशंसा के साथ आगे बढ़ाई गई और 25 अगस्त को सुनवाई तय हुई। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया कि तीन दिनों के भीतर जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं, अन्यथा वाद खारिज कर दिया जाएगा। इसके बावजूद कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
20 दिसंबर 2025 को फिर से आपत्ति दर्ज की गई और दोबारा जांच में भी यही सामने आया कि जमीन पर खरीदार का कब्जा नहीं है और दस्तावेज राजस्व अभिलेखों से मेल नहीं खाते।
29 दिसंबर 2025 को अंतिम रिपोर्ट अग्रसारित की गई और 1 जनवरी 2026 को अंतिम सुनवाई हुई। इस दौरान भी आवेदक कोई संतोषजनक साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
अंततः अंचल अधिकारी गौतम कुमार ने 1 जनवरी 2026 को वाद खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि राजस्व कर्मचारी और अंचल निरीक्षक की संयुक्त जांच में खरीदार का जमीन पर दखल कब्जा नहीं पाया गया। साथ ही बार-बार अवसर देने के बावजूद कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
क्या है पूरा मामला
केस संख्या 929/2025-26 में गीता देवी द्वारा दाखिल म्यूटेशन आवेदन को जांच और सुनवाई के बाद अस्वीकृत किया गया। यह भूमि जनाढ़ मौजा, खाता संख्या 308, प्लॉट संख्या 2119 से संबंधित है।
प्रशासन के अनुसार, केवल रजिस्ट्री कराना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि जमीन पर वास्तविक कब्जा और वैध दस्तावेज होना भी जरूरी है। इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग अब जमीन खरीदने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की बात कह रहे हैं।