Friday, July 3, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
HomeWorldयूएन हेडक्वॉर्टर के बाहर तिब्बती युवक ने किया आत्मदाह, 'आजाद तिब्बत' के...

यूएन हेडक्वॉर्टर के बाहर तिब्बती युवक ने किया आत्मदाह, ‘आजाद तिब्बत’ के लिए पिछले 17 साल में 150 जले

न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय के बाहर 42 वर्षीय तिब्बती व्यक्ति लोब्गा रंगजेन ने ‘आजाद तिब्बत’ के समर्थन में आत्मदाह कर लिया और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। ‘फ्री तिब्बत’ आंदोलन के मुताबिक, पिछले 17 सालों में चीन के कब्जे के खिलाफ 150 से अधिक आत्मदाह की घटनाएं हुई हैं।
न्यूयॉर्क: अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर 42 साल के एक तिब्बती शख्स ने आत्मदाह कर लिया। वह तिब्बती झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा था। इस घटना में उसकी मौत हो गई। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस व्यक्ति की पहचान लोब्गा रंगजेन के रूप में हुई है। वह करीब दो दशक से अमेरिका में रह रहा था। घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे मैनहट्टन के ईस्ट 43वीं स्ट्रीट और फर्स्ट एवेन्यू के पास हुई।

15 सेकेंड में आग बुझाई, फिर भी नहीं बचा
रंगजेन के शरीर में आग लगते ही आसपास से गुजर रहे वाहनों ने हॉर्न बजाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर बाद वह जमीन पर गिर पड़ा। 2 इमरजेंसी वर्कर्स ने करीब 1 मिनट में फायर एक्सटिंग्विशर से आग बुझाई। उसे तुरंत बेलेव्यू अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी। घटना स्थल पर एक घंटे बाद भी तिब्बती झंडा मौजूद था।

पिछले 17 सालों में 150 ने किया आत्मदाह
पुलिसकर्मी एक कागज लेकर बाहर जाते दिखाई दिए जिसमें लिखा था, ‘CHINA OUT OF TIBET’ यानी कि ‘चीन तिब्बत से बाहर’। यह नारा तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन और ‘फ्री तिब्बत कैंपेन’ से जुड़ा हुआ है। ‘फ्री तिब्बत कैंपेन’ ग्रुप के मुताबिक, मार्च 2009 से अब तक तिब्बत के अंदर 150 से ज्यादा लोगों ने चीनी कब्जे के खिलाफ आत्मदाह किया है। कई प्रदर्शनकारियों ने आग लगने के दौरान ‘दलाई लामा की लंबी उम्र, उनकी तिब्बत वापसी, पंचेन लामा की रिहाई, तिब्बत में मानवाधिकार और स्वतंत्रता’ के लिए नारे लगाए।

चीन ने 1951 में किया था तिब्बत पर कब्जा
ग्रुप की वेबसाइट पर कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों की मदद करने, उन्हें प्रोत्साहित करने या विदेश में जानकारी साझा करने वाले लोगों को सख्त सजा दी जाती है। यह आंदोलन तिब्बत को चीन से आजादी दिलाने और दलाई लामा को वापस सत्ता सौंपने की मांग करता है। बता दें कि 1951 में 17 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तिब्बत में आई थी। इस समझौते को शांतिपूर्ण संक्रमण का माध्यम बताया गया था। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण से पहले तिब्बत में वास्तविक स्वायत्तता थी और वहां अपनी अलग प्रशासनिक व्यवस्था चलती थी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Most Popular

Recent Comments