पुणे/मोहाली। विदेश में आकर्षक नौकरी दिलाने का सपना दिखाकर हजारों रुपये की कथित ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है। महाराष्ट्र के पुणे निवासी संदीप नंदकुमार यादव ने पंजाब के मोहाली स्थित क्राउन रूट कंसल्टेंसी पर विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर 70 हजार रुपये लेने, लंबे समय तक गुमराह करने और बाद में रकम लौटाने से इनकार करने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने पूरे मामले की शिकायत पंजाब पुलिस के डीजीपी कार्यालय में दर्ज कराते हुए निष्पक्ष जांच और पूरी राशि वापस दिलाने की मांग की है।
पीड़ित संदीप नंदकुमार यादव के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 को उनकी फेसबुक के माध्यम से क्राउन रूट कंसल्टेंसी की कर्मचारी रिया ठाकुर से बातचीत हुई। रिया ने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, कुवैत और अजरबैजान जैसे देशों में आकर्षक वेतन वाली नौकरी का भरोसा दिलाया। आरोप है कि कंपनी ने वीजा, हवाई टिकट और आवास की सुविधा उपलब्ध कराने का दावा करते हुए उनसे पासपोर्ट, अनुभव प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज मांगे, जिन्हें उन्होंने उपलब्ध करा दिया।
इसके बाद कंपनी की ओर से मेडिकल परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए। संदीप का कहना है कि उन्हें मुंबई के केके डायग्नोस्टिक सेंटर में मेडिकल जांच करानी पड़ी, जिस पर करीब 7 हजार रुपये खर्च हुए। मेडिकल रिपोर्ट क्लियर होने के बाद उन्हें अजरबैजान में रिटेल मैनेजर पद पर चयनित होने की जानकारी दी गई और 7 जनवरी 2026 को 70 हजार रुपये लेकर चंडीगढ़ स्थित कार्यालय पहुंचने के लिए लगातार फोन और संदेश किए गए।
पीड़ित का आरोप है कि वह अपने ससुर के साथ मोहाली स्थित कंपनी कार्यालय पहुंचे, जहां कर्मचारी रिया ठाकुर ने उनकी मुलाकात मैनेजर तुषार से कराई। वहां 70 हजार रुपये जमा कराने के बाद एक स्टांप पेपर पर समझौता कराया गया। आरोप है कि कंपनी ने 15 दिनों के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करने, पहले अल्पकालिक वीजा और बाद में दो वर्ष का टीआरसी (टेम्पररी रेजिडेंस परमिट) दिलाने का आश्वासन दिया। इन वादों पर भरोसा कर वह वापस पुणे लौट आए।
संदीप का कहना है कि इसके बाद कंपनी से संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया। कई-कई बार फोन करने पर भी कॉल नहीं उठाए जाते थे और यदि कभी बात होती तो केवल “काम हो जाएगा” कहकर टाल दिया जाता। बाद में उनकी बातचीत कंपनी के कथित हेड हैरी से कराई गई, जिन्होंने भी लगातार इंतजार करने की बात कही। महीनों बीत जाने के बावजूद न तो नौकरी मिली और न ही विदेश भेजने की प्रक्रिया पूरी हुई। केवल एक नियुक्ति पत्र भेजकर मामला टालने का प्रयास किया गया।
जब पीड़ित ने अपना पैसा वापस मांगा तो, उनके अनुसार, मैनेजर तुषार ने 70 हजार रुपये में से केवल 18 हजार रुपये लौटाने की बात कही। विरोध करने पर अधिकतम 20 हजार रुपये देने का प्रस्ताव रखा गया। पीड़ित का कहना है कि जब कोई सेवा उपलब्ध ही नहीं कराई गई तो इतनी बड़ी राशि काटने का कोई औचित्य नहीं है। इसके बाद उनके ससुर ने मोहाली जाकर कंपनी से मुलाकात की, लेकिन समाधान नहीं निकला।
पीड़ित का आरोप है कि कंपनी ने विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर उन्हें लगातार भ्रमित किया, आर्थिक नुकसान पहुंचाया और मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया। उनका कहना है कि मेडिकल जांच, यात्रा और अन्य खर्च मिलाकर उनका कुल नुकसान लगभग 1 लाख 40 हजार रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने पंजाब पुलिस के डीजीपी कार्यालय में लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और जमा कराई गई पूरी राशि वापस दिलाने की मांग की है।
दूसरी ओर, उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच एक लिखित अनुबंध भी हुआ था, जिसमें वीजा प्रक्रिया, सेवा शर्तों और रिफंड से संबंधित विभिन्न प्रावधानों का उल्लेख है। हालांकि पीड़ित का आरोप है कि कंपनी ने अनुबंध में किए गए वादों का पालन नहीं किया। फिलहाल मामले में कंपनी की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है।


