पलामू।
झारखंड के पलामू जिले से एक ऐसा पारिवारिक विवाद सामने आया है, जिसने रिश्तों में बढ़ती दूरियों और पारिवारिक तनाव को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हुसैनाबाद थाना क्षेत्र के झरगड़ा गांव निवासी एक युवक का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से उसकी पत्नी उसे छोड़कर मायके में रह रही है। इस दौरान न केवल उसका परिवार बिखर गया, बल्कि वह अपनी पांच वर्षीय बेटी से मिलने और बात करने तक के लिए तरस रहा है। युवक का कहना है कि लगातार मानसिक तनाव के कारण वह अवसाद में जीने को मजबूर हो गया है और न्याय के लिए लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है।
पीड़ित सचिन सिंह पुत्र विरजा सिंह ने बताया कि उनकी शादी करीब छह वर्ष पहले रिया कुमारी से हुई थी। शादी के बाद दोनों के घर एक बेटी काव्या का जन्म हुआ, जिसकी उम्र अब करीब पांच वर्ष है। सचिन का कहना है कि कुछ समय पहले तक सब कुछ सामान्य था, लेकिन पिछले एक वर्ष से उनकी पत्नी मायके चली गई और उसके बाद से वापस घर नहीं लौटी।
सचिन का आरोप है कि उन्होंने कई बार पत्नी को समझाने और परिवार को दोबारा बसाने की कोशिश की, लेकिन हर प्रयास विफल रहा। उनका कहना है कि वह स्वयं कई बार ससुराल पहुंचे, लेकिन वहां उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ गाली-गलौज की गई, मारपीट की गई और उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।
पीड़ित का कहना है कि सबसे बड़ा दर्द अपनी बेटी से दूर रहने का है। उनका आरोप है कि उन्हें अपनी बेटी से फोन पर बात तक नहीं करने दी जाती। एक पिता होने के नाते वह अपनी बेटी को देखने और उससे मिलने के लिए हर दिन तड़पते हैं। उनका कहना है कि बेटी की याद उन्हें हर पल बेचैन करती है और यही पीड़ा धीरे-धीरे उन्हें मानसिक रूप से तोड़ती चली गई।
सचिन सिंह का दावा है कि पत्नी अक्सर उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ और कमाने में असमर्थ बताकर बदनाम करने की कोशिश करती है। उनका कहना है कि इन आरोपों से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने पत्नी के व्यवहार में आए बदलाव का कारण जानना चाहा तो बात और बिगड़ गई, जिसके बाद पत्नी ने उनके साथ रहना लगभग पूरी तरह छोड़ दिया।
सचिन का कहना है कि लगातार पारिवारिक तनाव, पत्नी की दूरी और बेटी से बिछड़ने के कारण वह गहरे अवसाद में जी रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार पुलिस और संबंधित अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली। उनका कहना है कि हर बार उन्हें केवल आश्वासन मिला, लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकल सका।
पीड़ित ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने की मांग की है। उनका कहना है कि वह किसी तरह का विवाद नहीं चाहते, बल्कि अपनी पत्नी और बेटी के साथ सम्मानपूर्वक जीवन बिताकर परिवार को फिर से बसाना चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो उनका मानसिक तनाव और बढ़ सकता है।


