Thursday, February 12, 2026
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बलिया में स्मार्ट मीटर विवाद: जीएमआर कंपनी पर 200 कर्मचारियों को वेतन न देने का आरोप

बलिया में स्मार्ट मीटर परियोजना को लेकर बड़ा बवाल सामने आया है। जिले में स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रही जीएमआर कंपनी पर करीब 200 कर्मचारियों को पिछले दो महीने से वेतन न देने का गंभीर आरोप लगा है। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन के बावजूद अब तक एक भी रुपये का भुगतान नहीं किया गया, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

बताया जा रहा है कि बलिया में संचालित इस परियोजना की ब्रांच साउथ इंडियन क्षेत्र से जुड़ी हुई है। यहां बड़ी संख्या में तकनीकी और फील्ड कर्मचारी दिन-रात मेहनत कर स्मार्ट मीटर लगाने का काम कर रहे हैं, लेकिन मेहनत की कमाई समय पर नहीं मिल रही। कर्मचारियों के अनुसार वेतन न मिलने के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और कई लोगों पर कर्ज तक चढ़ गया है।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि इस परियोजना में काम देखने वाले अधिकारी रवि प्रकाश जो की सुपरवाइजर हैं कंपनी के और प्रिया प्रकाश सिंह जो की दी है सैलरी अकाउंट देखते हैं रितिक राय जो आजमगढ़ के निवासी बताए जा रहे हैं, जबकि संदीप सर जो बलिया के डी आई हैं, अवनीश राय डी आई हैं, अभिषेक राना सी आई हैं। इनके साथ ही आदित्य कुमार, अमित कुमार यादव, अमित तिवारी और ईश्वर यादव जैसे कई कर्मचारी भी शामिल हैं, जिन्हें लगातार दो महीने से सैलरी नहीं दी गई है। कर्मचारियों का कहना है कि हर बार जल्द भुगतान का भरोसा दिया जाता है, लेकिन तारीख निकल जाती है और पैसा नहीं आता।

सूत्रों के अनुसार जब कर्मचारियों ने अपनी बात प्रबंधन के सामने रखी तो उन्हें काम जारी रखने का दबाव बनाया गया। कई कर्मचारियों का यह भी कहना है कि यदि उन्होंने काम बंद किया तो नौकरी से निकालने की धमकी तक दी गई। इस वजह से कर्मचारी मजबूरी में काम कर रहे हैं, लेकिन अंदर ही अंदर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है। सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी कंपनी द्वारा चलाए जा रहे सरकारी महत्व के स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट में कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी क्यों की जा रही है। यदि समय रहते इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो कर्मचारी आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

फिलहाल सभी की निगाहें कंपनी प्रबंधन और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाते हैं और मेहनतकश कर्मचारियों को उनका हक कब तक मिलता है।

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