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सहारनपुर सिविल कोर्ट में बंद पड़े चैम्बरों पर उठे सवाल, प्रैक्टिस न करने वाले अधिवक्ताओं पर कब्जा कर मोटी रकम वसूलने के आरोप, जूनियर वकीलों ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार

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सहारनपुर। सहारनपुर सिविल कोर्ट परिसर में वर्षों से बंद पड़े अधिवक्ता चैम्बरों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। प्रैक्टिस करने वाले जूनियर अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि कई ऐसे चैम्बर हैं, जिन पर ताले लगे हुए हैं और जिनका उपयोग वास्तविक वकालत के लिए नहीं किया जा रहा। आरोप है कि कुछ लोगों ने केवल पंजीकरण के आधार पर चैम्बर अपने कब्जे में रखे हुए हैं, जबकि वे नियमित रूप से न्यायालय में प्रैक्टिस भी नहीं करते। इससे नए और सक्रिय अधिवक्ताओं को बैठने और अपने मुवक्किलों से मिलने तक में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामले को लेकर अधिवक्ता रश्मि पांडेय ने माननीय मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय लखनऊ के नाम एक प्रार्थना पत्र भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि कई चैम्बर लंबे समय से बंद पड़े हैं और उन पर ताले लगे हुए हैं। आरोप है कि कुछ लोग इन चैम्बरों को निजी लाभ के लिए मोटी रकम लेकर बेचने या हस्तांतरित करने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि जरूरतमंद और नियमित प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता बिना चैम्बर के न्यायालय परिसर में संघर्ष कर रहे हैं।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि रजिस्ट्री कार्यालय के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थानांतरित होने के बाद कुछ अधिवक्ताओं को वहां नए चैम्बर आवंटित हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सिविल कोर्ट परिसर के पुराने चैम्बर भी खाली नहीं किए। इससे न्यायालय परिसर में उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग नहीं हो पा रहा और सक्रिय अधिवक्ताओं के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

रश्मि पांडेय ने अपने प्रार्थना पत्र में यह भी कहा है कि जिला न्यायाधीश कार्यालय से बंद पड़े चैम्बरों के संबंध में रिपोर्ट मांगे जाने के बावजूद अब तक संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। वहीं बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव के निर्देश पर कुछ चैम्बरों के संबंध में नोटिस जारी किए जाने की भी बात सामने आई है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि बंद पड़े चैम्बरों का सत्यापन कराया जाए और यह जांच हो कि कौन अधिवक्ता नियमित रूप से प्रैक्टिस कर रहा है तथा कौन नहीं, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका आग्रह है कि निष्क्रिय पड़े चैम्बरों को खाली कराकर सक्रिय एवं प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत आवंटित किया जाए, ताकि जूनियर वकीलों को भी सम्मानजनक कार्यस्थल मिल सके।

इस संबंध में अधिवक्ता रश्मि पांडेय, किरण कुढ़ैल एवं अन्य अधिवक्ताओं ने उच्च न्यायालय से हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने तथा बंद पड़े चैम्बरों को खुलवाकर पात्र अधिवक्ताओं को आवंटित करने की मांग की है। फिलहाल मामले को लेकर न्यायिक और अधिवक्ता समुदाय की नजरें उच्च न्यायालय के संभावित निर्णय पर टिकी हुई हैं।

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