Saturday, March 7, 2026
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सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे से तामगंज में बवाल, 74 घरों का आवागमन बाधित, ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

अररिया (नरपतगंज)।
नरपतगंज प्रखंड के तामगंज पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या 10 में सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्ते पर अवैध कब्जे का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। गैर मजरूआ बिहार सरकार के अंतर्गत दर्ज जमीन पर जबरन घर बना लिए जाने से करीब 74 परिवारों का रोजमर्रा का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। परेशान ग्रामीणों ने ग्राम कचहरी और स्थानीय प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार मौजा तामगंज की खाता संख्या 915 की जमीन वर्षों से सार्वजनिक रास्ते के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। इसी रास्ते से दर्जनों परिवार अपने घरों से बाहर निकलते और मुख्य सड़क तक पहुंचते थे। आरोप है कि इसी मोहल्ले के निवासी पुना मुखिया ने उक्त सरकारी भूमि पर जबरन निर्माण कर रास्ता बंद कर दिया। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब उन्होंने अवैध निर्माण का विरोध किया तो आरोपी द्वारा गाली-गलौज और मारपीट की धमकी दी गई। इससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार कहने के बावजूद रास्ता खाली नहीं किया गया, जिससे स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

इधर, तामगंज वार्ड संख्या 10 में ही एक अन्य मामले में सरकारी सड़क निर्माण कार्य में बाधा डालने का आरोप भी सामने आया है। ग्रामीणों के मुताबिक, मनरेगा योजना के तहत मिट्टी भराई के बाद जिला परिषद योजना से सड़क का पक्कीकरण कराया जाना था। लेकिन कुछ लोगों द्वारा यह कहकर कार्य रुकवा दिया गया कि जमीन उनकी निजी है, जबकि अभिलेखों के अनुसार वह जमीन भी बिहार सरकार के खाते में दर्ज है।

ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क सिमराही नहर से भिरावल सीमा तक जाती है और सैकड़ों लोगों के लिए एकमात्र संपर्क मार्ग है। खासकर महादलित और अत्यंत गरीब तबके के लोग इससे सीधे प्रभावित हो रहे हैं। सड़क बंद रहने से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

पीड़ित परिवारों ने ग्राम कचहरी, वार्ड पंच और जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध निर्माण हटाया जाए और सरकारी सड़क निर्माण कार्य को तत्काल शुरू कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।

 

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