बेतिया।
सरकारी फाइलों में सब कुछ “ओके”, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट। पश्चिम चम्पारण जिले के बेतिया विद्युत प्रमंडल से जुड़ा एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक किसान को कृषि कार्य के लिए बिजली मीटर तो आवंटित कर दिया गया, भुगतान भी पूरा हो गया, तमाम स्तरों से स्वीकृति भी मिल गई, लेकिन महीनों बाद भी खेत तक बिजली नहीं पहुंच सकी।
मामला गोपालपुर थाना क्षेत्र के ग्राम परसौना, पोस्ट बकुलहर मठ निवासी किसान जोगिन्दर साह से जुड़ा है। उपभोक्ता संख्या 520315988944 के तहत उन्होंने कृषि कार्य हेतु मीटर लगाने के लिए विधिवत आवेदन दिया था। आवेदन में साफ तौर पर उल्लेख किया गया था कि सिंचाई और खेती के लिए बिजली की अत्यंत आवश्यकता है।
आवेदन की स्थिति पर नज़र डालें तो तस्वीर और भी चौंकाने वाली है।
दस्तावेज सत्यापन पूरा, सीएफ स्वीकृत, टीएफ स्वीकृत, भुगतान पूर्ण, मीटर उपभोक्ता को आवंटित, मीटर इंस्टॉलेशन के लिए उपभोक्ता डाउनलोडेड, मीटर अप्रूव्ड — यानी सिस्टम में एक भी स्टेप पेंडिंग नहीं। इसके बावजूद आज तक न तो मीटर लगाया गया और न ही खेतों में बिजली पहुंची।
किसान जोगिन्दर साह का कहना है कि उन्होंने 3 अक्टूबर 2025 को आवेदन किया, सभी औपचारिकताएं समय पर पूरी कीं, विभाग की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई, फिर भी बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिल रहा है। खेतों में फसल सूख रही है और किसान प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कार्यपालक अभियंता कार्यालय, विद्युत बेतिया से 19 अप्रैल 2025 को पत्रांक 673 के तहत मीटर से जुड़ी प्रक्रिया पूरी दर्शाई जा चुकी है, तो फिर जमीनी स्तर पर काम क्यों अटका हुआ है? क्या यह सिस्टम की सुस्ती है या फिर जिम्मेदारों की लापरवाही?
यह मामला अकेले एक किसान का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों किसानों की आवाज़ बनता जा रहा है, जो सरकारी योजनाओं में “ऑनलाइन स्वीकृति” और “ऑफलाइन हकीकत” के बीच पिस रहे हैं। अगर समय रहते बिजली कनेक्शन नहीं मिला, तो इसका सीधा असर खेती, उत्पादन और किसान की आय पर पड़ेगा।
अब देखना यह है कि विद्युत विभाग इस खबर के बाद हरकत में आता है या फिर किसान जोगिन्दर साह की फाइल यूं ही टेबल से टेबल घूमती रहेगी।
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