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प्रॉपर्टी के बदले लोन में 21% ब्याज और दर्जनों चार्ज, भीवाड़ी में NBFC के सैंक्शन लेटर पर उठे सवाल

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3 महीने से बकाया नहीं डाली, झूठा दिलासा देने का आरोप; मुख्यमंत्री से इंसाफ की गुहार

भीवाड़ी/अलवर।
भीवाड़ी में प्रॉपर्टी के बदले लोन देने वाली एक निजी फाइनेंस कंपनी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। Exclusive Leasing and Finance Private Limited (EZ Capital) के सैंक्शन लेटर को लेकर जहां उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ी है, वहीं मोनू कुमार ने कंपनी पर तीन महीने से बकाया राशि न देने और झूठा दिलासा देने का आरोप लगाया है।

मीडिया को जानकारी देते हुए मोनू कुमार ने कहा कि उन्हें लगातार यह कहकर टाल दिया जा रहा है कि “जल्द बकाया राशि डाल दी जाएगी”, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने उनके साथ धोखाधड़ी की है और मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए। पीड़ित ने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।

इधर, लोन दस्तावेज़ों के मुताबिक, कंपनी ने भीवाड़ी ब्रांच से विनोद कुमार के नाम ₹10.44 लाख का लोन स्वीकृत किया है। लोन अवधि 96 महीने और ब्याज दर 21% (Reducing) तय की गई है, जबकि APR 23.46% दर्शाया गया है। लोन का उद्देश्य बैलेंस ट्रांसफर बताया गया है और मासिक EMI ₹22,531 तय है।

दस्तावेज़ों में प्रोसेसिंग फीस, लीगल-टेक्निकल चार्ज, डॉक्यूमेंटेशन फीस, कंप्लायंस चार्ज और GST समेत कई मदों में हजारों रुपये की कटौती का उल्लेख है। देरी से भुगतान पर 3% प्रति माह पेनल्टी और NACH/चेक बाउंस पर अतिरिक्त शुल्क का भी प्रावधान है।

बीमा और प्रीपेमेंट शर्तें बनीं बोझ

सैंक्शन लेटर के अनुसार, लोन के साथ लाइफ, मेडिकल और प्रॉपर्टी इंश्योरेंस जोड़े गए हैं, जिनका प्रीमियम NBFC द्वारा फाइनेंस किया गया है। समय से पहले लोन चुकाने पर भी भारी शुल्क तय हैं—

पहले साल में 8%,

1 से 3 साल में 5%,

3 साल बाद 3% फोरक्लोज़र चार्ज।
आंशिक प्रीपेमेंट पर भी तय सीमा से अधिक राशि देने पर पेनल्टी का प्रावधान है।

मूल दस्तावेज़ और दो चरणों में भुगतान

शर्तों में संपत्ति के मूल कागज़ कंपनी के पास जमा कराने और भुगतान को दो चरणों में जारी करने की बात कही गई है। पहले चरण में राशि बैलेंस ट्रांसफर कंपनी को और शेष रकम मूल दस्तावेज़ मिलने के बाद आवेदक के खाते में देने का उल्लेख है।

जांच की मांग तेज

पीड़ित पक्ष का कहना है कि ऊंची ब्याज दर और कई तरह के चार्ज जोड़कर लोन को महंगा बना दिया गया है। साथ ही कर्मचारियों/संबंधित लोगों को भुगतान न मिलने के आरोप गंभीर हैं। उन्होंने RBI और उपभोक्ता संरक्षण एजेंसियों से पूरे मामले की जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, कंपनी के दस्तावेज़ों में दावा किया गया है कि सभी शर्तें नियमों के अनुरूप हैं और लोन डिस्बर्समेंट कानूनी व तकनीकी जांच के बाद ही किया जाएगा।

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