Saturday, July 11, 2026
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जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप! मारपीट के बाद अब सूअर बाड़े में आग लगाने का आरोप, 6 सूअरों की मौत; पीड़ित परिवार ने मांगी सुरक्षा

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के तरवां थाना क्षेत्र के ग्राम तरखा में जमीन विवाद अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। पीड़ित फेकू राम ने आरोप लगाया है कि पहले उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और धमकी दी गई, वहीं अब उनके सूअर बाड़े में आग लगाकर भारी नुकसान पहुंचाया गया। पीड़ित का दावा है कि इस घटना में छह सूअरों की जलकर मौत हो गई, जबकि कई अन्य झुलस गए। घटना के बाद परिवार में दहशत का माहौल है और पीड़ित ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

पीड़ित फेकू राम के अनुसार, 8 जुलाई 2026 को जमीन विवाद को लेकर गांव के कुछ लोगों से कहासुनी हुई थी। उनका आरोप है कि उसी दौरान उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई। इस संबंध में उन्होंने स्थानीय थाना तरवां में लिखित शिकायत देकर कानूनी कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।

पीड़ित का कहना है कि शिकायत के बाद विवाद और बढ़ गया। उनका आरोप है कि आरोपितों ने उनके सूअर बाड़े में आग लगा दी। आग लगने से बाड़े में मौजूद 10 सूअरों में से 6 की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। घटना से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि पशुपालन ही उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है और इस घटना ने पूरे परिवार को आर्थिक संकट में डाल दिया है।

फेकू राम ने आरोप लगाया है कि इस घटना में दलसिंगार राय, शोभनाथ, रितिक कुमार, ललता मास्टर, सुजीत कुमार, फेक्कन तथा अन्य लोगों की भूमिका रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद से लगातार उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं, जिससे पूरा परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।

पीड़ित ने जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आगजनी और मारपीट की घटनाओं में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने, हुए आर्थिक नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा दिलाने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो भविष्य में कोई और बड़ी घटना हो सकती है।

फिलहाल, इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। समाचार में प्रकाशित सभी आरोप पीड़ित पक्ष के दावों और प्रार्थना-पत्र पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच, फोरेंसिक साक्ष्यों तथा अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही हो सकेगी।

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