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कदम्बा बस स्टैंड कैंटीन के पास रेस्टोरेंट में मजदूरी का शोषण: 10 दिन की मेहनत के 5 हजार नहीं मिले, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न का आरोप

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मालदा।
पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मजदूर के साथ रेस्टोरेंट संचालकों द्वारा बेरहमी से शोषण किए जाने के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता शुभाअंकर का कहना है कि वह मूल रूप से मालदा टाउन जिले के ही निवासी हैं और बीते सात–आठ महीनों से माल गांव में रहकर मजदूरी कर रहे थे। करीब दस दिन पहले उन्हें कदम्बा बस स्टैंड कैंटीन के पास स्थित एक रेस्टोरेंट में काम पर रखा गया।

पीड़ित के अनुसार, रेस्टोरेंट में उनसे थाली तैयार कराने, खाना परोसने और साफ-सफाई जैसे काम लगातार कराए गए। दस दिन की मेहनत के बदले करीब 5 हजार रुपये मजदूरी बनती है, लेकिन आज तक एक रुपया भी नहीं दिया गया। जब पीड़ित ने अपनी मजदूरी मांगी तो रेस्टोरेंट के जिम्मेदार लोग टालमटोल करने लगे और बाद में मारपीट व गाली-गलौज पर उतर आए।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे शारीरिक रूप से पीटा गया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। रोजाना डराने-धमकाने, अपमानित करने और नौकरी से निकाल देने की धमकी दी जाती रही। इस लगातार हो रहे टॉर्चर से वह मानसिक रूप से टूट चुका है और खुद को असहाय महसूस कर रहा है।

पीड़ित ने बताया कि मजबूरी में वह यह काम कर रहा था, क्योंकि रोजी-रोटी का कोई और साधन नहीं था। लेकिन मजदूरी न मिलना, मारपीट और मानसिक उत्पीड़न ने उसकी हालत और खराब कर दी है। अब वह न्याय की गुहार लगा रहा है और प्रशासन से मांग कर रहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि किसी और मजदूर के साथ इस तरह का शोषण न हो।

यह मामला एक बार फिर असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों पर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि कदम्बा बस स्टैंड कैंटीन जैसे सार्वजनिक स्थान के पास खुलेआम मजदूरों का शोषण कैसे हो रहा है और जिम्मेदार विभाग अब तक क्यों खामोश हैं?

 

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