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हैदराबाद की नौकरी, हाथ में मोबाइल और दिल में भक्ति: बहराइच का युवक भोजपुरी भजनों से तलाश रहा पहचान

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बहराइच।
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के डिहवा गांव से एक युवा गायक की संघर्ष भरी कहानी सामने आई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी आवाज को लोगों तक पहुंचाने में जुटा है। 26 वर्षीय विवेक कुमार मौर्या, पिता राम सुमिरन, पिछले करीब एक साल से भोजपुरी भक्ति गीत और भजन बना रहे हैं। वे यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे तीनों प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार अपने वीडियो अपलोड कर रहे हैं, ताकि उनकी आवाज गांव की सीमाओं से निकलकर जिले और प्रदेश तक पहुंचे।

विवेक की खास बात यह है कि वे किसी स्टूडियो या टीम पर निर्भर नहीं हैं। उनका मोबाइल ही उनका स्टूडियो है। रिकॉर्डिंग से लेकर वीडियो शूट, एडिटिंग और अपलोडिंग तक का सारा काम वे खुद करते हैं। उनकी इंस्टाग्राम आईडी vivekkumarmaurya348 है, जहां वे नियमित रूप से अपने भक्ति गीत साझा करते हैं। मध्यम परिवार से आने वाले विवेक को घरवालों का नैतिक समर्थन तो मिलता है, लेकिन संसाधनों की कमी आज भी उनकी राह में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

जीवन यापन के लिए विवेक हैदराबाद में नौकरी करते हैं। दिनभर काम करने के बाद भी वे अपने खाली समय में भक्ति गीतों के वीडियो तैयार करते हैं। उनका मानना है कि भक्ति और कला दोनों ही आत्मा से जुड़ी होती हैं, और अगर मेहनत सच्ची हो तो पहचान जरूर मिलती है। वे चाहते हैं कि उनका नाम सिर्फ डिहवा गांव में ही नहीं, बल्कि पूरे बहराइच और उत्तर प्रदेश में जाना जाए।

विवेक का सपना है कि उनकी आवाज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे, उनके वीडियो वायरल हों और उन्हें एक पहचान मिले। वे यह साबित करना चाहते हैं कि बड़े संसाधन नहीं, बल्कि लगन और विश्वास ही किसी कलाकार को आगे ले जाते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी जगह बनाने की यह कोशिश आज के युवाओं के सपनों और संघर्ष का आईना है।

अब सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया विवेक जैसे प्रतिभाशाली युवाओं को वह मंच दे पाएगा, जिसकी उन्हें तलाश है, या फिर उनकी मेहनत भी भीड़ में दबकर रह जाएगी।

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