गाडरवारा।
नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक विधुर मजदूर और उसकी नाबालिग बेटी को अपने ही परिवार के लोगों द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। पुलिस में शिकायत और समझाइश के बाद भी हालात नहीं बदले, जिससे पीड़ित पिता-बेटी भय और असुरक्षा में जीवन जीने को मजबूर हैं।
विधुर पिता, बिन मां की बच्ची और अपनों का अत्याचार
40 वर्षीय भूरा जाटव, पिता रामप्रसाद जाटव, थाना गाडरवारा क्षेत्र के निवासी हैं। करीब छह साल पहले उनकी पत्नी यशोदा जाटव की गर्भ में बच्चे के नुकसान के बाद मृत्यु हो गई थी। पत्नी की मौत के बाद शासन से मुआवजे के रूप में मिले करीब दो लाख रुपए से उन्होंने घर चलाने और भविष्य सुरक्षित करने के उद्देश्य से कुछ राशि ब्याज पर दे दी थी। इसी दौरान उन्होंने अपने भाइयों को भी लगभग 50 हजार रुपए दिए, लेकिन अब वही पैसा विवाद की जड़ बन गया है।
पैसे मांगना पड़ा भारी, भाई-भाभी और मां पर गंभीर आरोप
भूरा जाटव का आरोप है कि उनका छोटा भाई दौलत जाटव, उसकी पत्नी सुखवाती, बड़ा भाई धर्मेंद्र जाटव, उसकी पत्नी गीता और उनकी मां नीना जाटव आए दिन उनसे और उनकी 12 वर्षीय बेटी नेहा जाटव से झगड़ा करते हैं। आरोप है कि गाली-गलौज से बात शुरू होकर मारपीट तक पहुंच जाती है। यह सब कुछ मोहल्ले में कई बार लोगों के सामने भी हो चुका है।
नाबालिग बच्ची भी नहीं सुरक्षित
सबसे गंभीर और चिंताजनक पहलू यह है कि इस पारिवारिक विवाद में नाबालिग बच्ची भी प्रताड़ना का शिकार हो रही है। बिन मां की बच्ची को पिता जैसे-तैसे पाल रहा है, लेकिन परिवार के अन्य सदस्य उन्हें घर में चैन से रहने तक नहीं दे रहे। पीड़ित का कहना है कि बच्ची मानसिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
थाने की समझाइश, लेकिन जमीनी हकीकत अलग
भूरा जाटव ने गाडरवारा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले को असंज्ञेय अपराध मानते हुए दोनों पक्षों को बुलाकर समझाइश दी और छोड़ दिया। लेकिन आरोप है कि इसके बाद उत्पीड़न और बढ़ गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
“हम कहां जाएं?”—पीड़ित की गुहार
मजदूरी कर पेट पालने वाले भूरा जाटव का कहना है कि वे और उनकी बेटी अपने ही घर में डरे हुए हैं। उन्होंने प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
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