कोलकाता। पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के गूमा क्षेत्र की रहने वाली सोमा बसु आज देशभर की महिला बाइकर्स के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुकी हैं। पिछले 15 वर्षों से प्रोफेशनल बाइकिंग और स्टंट राइडिंग की दुनिया में सक्रिय सोमा ने न केवल हजारों किलोमीटर की रोमांचक यात्राएं पूरी की हैं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का भी बीड़ा उठाया है।
सोमा बसु पिछले एक दशक से अधिक समय से “वेल ऑफ डेथ” जैसे जोखिम भरे मंचों से जुड़ी रही हैं। उन्होंने अपने साहस, समर्पण और जुनून के दम पर वह मुकाम हासिल किया है, जहां आज उनका नाम देश के प्रमुख बाइकिंग समुदायों में सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी उपलब्धियों को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचार चैनलों के साथ-साथ कई प्रतिष्ठित समाचार पत्रों ने भी प्रमुखता से प्रकाशित किया है।
देश के कोने-कोने में की हजारों किलोमीटर की यात्राएं
सोमा बसु ने अपनी बाइक पर सवार होकर भारत के विभिन्न राज्यों और पड़ोसी देशों तक का सफर तय किया है। कोलकाता से दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जयगांव, भूटान, नेपाल, असम, मेघालय, झारखंड, बिहार, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा जैसे क्षेत्रों की लंबी यात्राएं उन्होंने अकेले पूरी की हैं।
उन्होंने नेपाल के काकरभिट्टा बॉर्डर से लेकर चितवन और पोखरा तक का सफर तय किया। वहीं भूटान के थिम्फू और पारो की कठिन पहाड़ी सड़कों पर भी अपनी बाइकिंग क्षमता का प्रदर्शन किया। इसके अलावा मेघालय के डॉकी और भारत-बांग्लादेश सीमा तक पहुंचकर उन्होंने महिला बाइकिंग समुदाय में एक नई पहचान बनाई।
1000 फीट गहरी कोयला खदान में भी किया अनोखा अभियान
सोमा बसु केवल लंबी यात्राओं तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने झारखंड और रानीगंज के अपर-कास्ट कोल माइंस तथा लगभग 1000 फीट गहरी सक्रिय कोयला खदानों का भी अन्वेषण किया। यह अभियान अपने आप में बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा माना जाता है।
राष्ट्रीय स्तर के 20 से अधिक बाइकिंग आयोजनों में सहभागिता
सोमा बसु ने देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित 20 से अधिक राष्ट्रीय बाइकिंग आयोजनों में हिस्सा लिया है। इनमें बंगाल राइडर्स मीट, दार्जिलिंग राइडर्स मीट, मोटो सोल, रॉयल एनफील्ड मोटावर्स गोवा, नॉर्थ ईस्ट राइडर्स मीट, असम राइडर्स मीट, बंगाल मोटो फेस्ट और मोटो सैफायर जैसे प्रतिष्ठित आयोजन शामिल हैं।
उनकी प्रतिभा और प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है। दार्जिलिंग राइडर्स मीट में प्रथम स्थान, एफएमएससीआई बेस्ट लेडी राइडर ट्रॉफी, मोटो फेस्ट 2023 विजेता तथा विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पुरस्कार प्राप्त कर उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई है।
टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म तक पहुंची कहानी
सोमा बसु की प्रेरणादायक यात्रा अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है। वह Zee Bangla के लोकप्रिय कार्यक्रम “दीदी नंबर वन” और Sun TV Bangla के कार्यक्रम “लोखी लव शो” में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। इतना ही नहीं, उनकी संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित एक विशेष Netflix डॉक्यूमेंट्री जनवरी 2026 में रिलीज होने वाली है, जिसका ट्रेलर जल्द जारी होने की संभावना है।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मिशन
सोमा बसु का कहना है कि बाइकिंग उनके लिए केवल एक शौक नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है। उनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, सुरक्षित ड्राइविंग के लिए जागरूक करना और “ग्रीन इंडिया” अभियान को बढ़ावा देना है। वह लगातार युवाओं और महिला राइडर्स को सड़क सुरक्षा और जिम्मेदार बाइकिंग के लिए प्रेरित करती रहती हैं।
सोशल मीडिया पर भी बढ़ रही लोकप्रियता
सोमा बसु सोशल मीडिया पर भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। उनके यात्रा वीडियो, स्टंट राइड्स और मोटिवेशनल कंटेंट को हजारों लोग पसंद करते हैं। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर उनके फॉलोअर्स लगातार बढ़ रहे हैं और युवा राइडर्स उन्हें अपना रोल मॉडल मान रहे हैं।
कोलकाता की साधारण बेटी से राष्ट्रीय पहचान बनाने तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि अगर जुनून, साहस और समर्पण हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। सोमा बसु आज केवल एक बाइकर नहीं, बल्कि उन हजारों महिलाओं की उम्मीद बन चुकी हैं जो अपने सपनों को खुली सड़कों पर उड़ान देना चाहती हैं।
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