45 तोला चांदी, 3 माशा सोना और 60 हजार रुपये ले जाने का दावा, सुनवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार परेशान
मुंगेली। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के मजगांव सतनामी पारा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां रास्ते के विवाद ने कथित तौर पर चोरी और तोड़फोड़ का रूप ले लिया। पीड़िता शिवकुमारी बंदे ने आरोप लगाया है कि उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने घर का ताला तोड़ दिया, बाउंड्री और तार को क्षतिग्रस्त कर दिया तथा घर में रखे लाखों रुपये मूल्य के जेवरात और नकदी लेकर फरार हो गए। पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद भी पुलिस उनकी शिकायत दर्ज नहीं कर रही है, जिससे परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
पीड़िता के अनुसार, 24 जून 2026 की दोपहर करीब 2 बजे वह घर पर नहीं थीं, जबकि उनके पति काम के सिलसिले में हैदराबाद गए हुए थे। इसी दौरान कथित रूप से आरोपियों ने पहले घर की बाउंड्री और तार तोड़ दिए और फिर मकान का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया। आरोप है कि उसी रात घर के पीछे की ओर से भागते हुए आरोपी घर में रखी करीब 45 तोला चांदी, लगभग 3 माशा सोना तथा 60 हजार रुपये नकद लेकर फरार हो गए।
शिवकुमारी बंदे का कहना है कि घटना से पहले आरोपी सड़क निर्माण के लिए रास्ता मांग रहे थे। परिवार ने उनसे कहा था कि सभी सदस्य घर लौटने के बाद बैठकर इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा। पीड़िता का आरोप है कि इसी विवाद के चलते उनकी अनुपस्थिति में घर को निशाना बनाया गया और तोड़फोड़ के साथ चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की जानकारी देने के बाद भी थाने में उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि जब भी वे पुलिस या प्रशासन के पास जाते हैं तो उन्हें कलेक्टर, तहसीलदार या दूसरे कार्यालयों में जाने की सलाह देकर वापस भेज दिया जाता है। परिवार का आरोप है कि अब तक किसी भी स्तर पर उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे वे खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं।
परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर घर से चोरी हुए जेवरात और नकदी की जल्द बरामदगी कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। पीड़ितों का कहना है कि समय रहते न्याय नहीं मिला तो उनके परिवार की सुरक्षा और भविष्य दोनों पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
वहीं, समाचार लिखे जाने तक आरोपित पक्ष का पक्ष सामने नहीं आ सका था। पुलिस और प्रशासन की ओर से भी इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।


