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सुपौल से बड़ी खबर: 35 साल पुराने भूमि विवाद में शनिचरा मुखिया को न्याय की दरकार, प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तेज

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सुपौल (बिहार), थाना–सोनाली:
जिला सुपौल के सोनाली थाना क्षेत्र के रहने वाले शनिचरा मुखिया (26 वर्ष) और उनके पिता प्रसादी मुखिया पिछले कई महीनों से अपनी पैतृक जमीन वापस पाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। आरोप है कि उसी गांव के निवासी बमोरी यादव ने उनकी जमीन पर पिछले करीब 35 वर्षों से कब्ज़ा कर रखा है, जबकि यह जमीन शनिचरा मुखिया के दादा द्वारा खानापूर्ति के तौर पर अस्थायी रूप से उन्हें उपयोग करने के लिए दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

परिवार का कहना है कि 6 अप्रैल को हुए विवाद के बाद मामला और गंभीर हो गया। शनिचरा मुखिया के दादा ने वर्षों पहले किसानों की मदद के उद्देश्य से यह जमीन खाने–खेत करने (अस्थायी उपयोग) के लिए बमोरी यादव को दी थी। लेकिन बीते दशकों में यह अस्थायी उपयोग विवाद का रूप ले बैठा।

परिजनों के अनुसार, साल 2025 में हुए हालिया सर्वे में बमोरी यादव ने कथित रूप से अपनी पकड़ का इस्तेमाल करते हुए इस जमीन को अपने नाम दाखिल–खारिज करवा लिया, जबकि जमीन असली कागज़ात में शनिचरा मुखिया के परिवार की बताई जा रही है।

पीड़ित परिवार की आपबीती

शनिचरा मुखिया का कहना है:

“हमारी पुश्तैनी जमीन हमें वापस दिलाई जाए। यह जमीन केवल खेती के लिए कुछ समय के लिए दी गई थी, लेकिन आज उस पर कब्जा कर लिया गया है। प्रशासन से कई बार गुहार लगाने के बाद भी हमारी सुनवाई नहीं हुई।”

परिवार का आरोप है कि उन्होंने स्थानीय थाना, अंचल कार्यालय और संबंधित विभागों में कई बार आवेदन दिया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

न्याय की उम्मीद में मीडिया का सहारा

न्याय की आस लगाए शनिचरा मुखिया अब मीडिया और जनप्रतिनिधियों से मदद की अपील कर रहे हैं। उनका कहना है कि—

“यदि मीडिया हमारी आवाज़ उठाए तो शायद प्रशासन हरकत में आए और हमें हमारी जमीन वापस मिल सके।”

अभी स्थिति क्या है?

जमीन पर अब भी बमोरी यादव का कब्ज़ा बताया जा रहा है।

मूल परिवार ने भूमि सर्वे, खतियान और पुराने कागजात के आधार पर अपनी दावेदारी दोहराई है।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतज़ार किया जा रहा है।

परिवार की मांग

जमीन का सही तरीके से पुनः सत्यापन करवा कर

न्यायसंगत कार्रवाई करते हुए

पैतृक जमीन को उन्हें वापस दिलाया जाए

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