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फर्रुखाबाद में दलित शमशान पर कब्जे की कोशिश, रातों-रात मिट्टी भरकर कब्रों पर डाली नजर, पूरे समाज में आक्रोश

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फर्रुखाबाद।
उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के मोहम्मदाबाद नगर पंचायत स्थित रविदास नगर से एक बेहद संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जाटव समाज की पुश्तैनी शमशान भूमि पर दबंगों द्वारा अवैध कब्जा करने की कोशिश से पूरे इलाके में तनाव फैल गया है। पीढ़ियों से जिस जमीन पर दलित समाज अपने मृतकों का अंतिम संस्कार करता आ रहा है, वहां रात के अंधेरे में मिट्टी भरकर कब्रों को मिटाने और जमीन हड़पने की साजिश रची गई।

पीड़ितों के अनुसार सुरेश यादव पुत्र झब्बू यादव और मनोज यादव पुत्र सुरेश यादव ने शमशान भूमि पर जेसीबी और ट्रैक्टर से न्यास भरवाकर जमीन को समतल करना शुरू कर दिया। जहां वर्षों पुरानी पक्की और कच्ची कब्रें मौजूद थीं, वहां गोबर और कूड़ा डालकर निशान मिटाने की कोशिश की गई। जैसे ही जाटव समाज के लोगों को इसकी जानकारी हुई, वे मौके पर पहुंचे और विरोध किया, लेकिन आरोप है कि दबंगों ने उन्हें जातिसूचक गालियां दीं और खुलेआम जान से मारने की धमकी दी।

रविदास नगर के निवासियों का कहना है कि यह वही जमीन है जहां उनके पूर्वजों का अंतिम संस्कार पिछले सौ वर्षों से होता रहा है। यह भूमि सिर्फ एक शमशान नहीं, बल्कि पूरे समाज की आस्था और सम्मान से जुड़ी हुई है। बावजूद इसके दबंग तत्व उस पर कब्जा जमाकर निर्माण कराने की तैयारी में हैं। पीड़ितों का आरोप है कि आरोपी प्रभावशाली हैं और उन्हें अपराधी तत्वों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण पुलिस भी कार्रवाई करने से कतरा रही है।

जाटव समाज के लोगों ने इस मामले को लेकर थाना मोहम्मदाबाद, पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद और जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे समाज के लोगों में भारी रोष है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि अगर जल्द ही शमशान भूमि को मुक्त नहीं कराया गया तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

अब पीड़ितों ने मुख्यमंत्री कार्यालय तक गुहार लगाई है और मांग की है कि दबंगों द्वारा किए गए अवैध कब्जे को तत्काल हटाया जाए और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि सामाजिक न्याय पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है, जहां एक कमजोर समाज की अंतिम संस्कार भूमि तक सुरक्षित नहीं रह गई है।

 

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