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चपरासी की नौकरी के नाम पर एक लाख की कथित ठगी, शिक्षक के बेटे समेत तीन लोगों पर गंभीर आरोप, शिकायतों के बाद भी चुप्पी

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छतरपुर जिले के ईसानगर क्षेत्र से सरकारी नौकरी के नाम पर कथित ठगी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित युवक भानु प्रताप सिंह (21 वर्ष), पिता बालादीन अहिरवार, निवासी पठावा, ईशा नगर, ईसानगर, जिला छतरपुर (मध्य प्रदेश) ने आरोप लगाया है कि उनसे चपरासी की नौकरी लगवाने के नाम पर एक लाख रुपये लिए गए, लेकिन न तो नौकरी दिलवाई गई और न ही अब तक पैसे लौटाए गए।

इन लोगों पर लगे आरोप
पीड़ित के अनुसार इस पूरे मामले में लकी अहिरवार (पिता पर्वत अहिरवार), वीरेंद्र पटेल और अन्य लोग शामिल हैं। आरोप है कि मुख्य भूमिका पर्वत अहिरवार की रही, जो एक सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि स्कूल में चपरासी की सरकारी नौकरी लगवा दी जाएगी।

सरकारी नौकरी की चाह बनी कमजोरी
भानु प्रताप सिंह का कहना है कि वह किसी भी तरह की सरकारी नौकरी पाना चाहते थे, चाहे वह चपरासी की ही क्यों न हो। इसी उम्मीद का फायदा उठाकर उनसे एक लाख रुपये की मांग की गई। यह भी कहा गया कि यदि नौकरी नहीं लगी तो पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।

14 सितंबर 2024 को हुआ लेन-देन
पीड़ित और उनके पिता बालादीन अहिरवार ने बताया कि 14/09/2024 को परिवार के सामने एक लाख रुपये दिए गए थे। इस लेन-देन की रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद बताई जा रही है। इसके बावजूद कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो नौकरी लगी और न ही पैसे वापस किए गए।

शिकायतें कीं, पर सुनवाई नहीं
भानु प्रताप का आरोप है कि उन्होंने कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन कहीं से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब स्थिति यह है कि आरोपी पक्ष न तो बातचीत कर रहा है और न ही पैसे लौटाने को तैयार है। जब भी पैसे की मांग की जाती है, तो बात करने के बजाय लड़ाई-झगड़ा किया जाता है।

रिश्तों में दरार, मानसिक तनाव
इस कथित ठगी के चलते परिवार में लगातार विवाद और तनाव का माहौल बना हुआ है। पीड़ित युवक का कहना है कि रिश्तों पर भरोसा करके उन्होंने यह रकम दी थी, लेकिन अब वही रिश्ते उनके लिए परेशानी का कारण बन गए हैं।

पूरा पता (पीड़ित): भानु प्रताप
आत्मज: बालादीन अहिरवार
निवासी: पठावा, ईशा नगर
थाना/पोस्ट: ईसानगर
जिला: छतरपुर, मध्य प्रदेश – 471315

न्याय की मांग
पीड़ित परिवार ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और या तो उनकी रकम वापस कराई जाए या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। सरकारी नौकरी के नाम पर इस तरह के आरोप अब पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

 

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