पटना।
राजधानी पटना के पचरुखिया थाना क्षेत्र से जमीन विवाद का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पुलिस, अंचल कार्यालय और भूमि रिकॉर्ड व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ता अनिल कुमार सिंह (छोटा भाई) का आरोप है कि उनकी खटियाणी जमीन, जिस पर उनका और उनके बड़े भाई कोपेंदर सिंह का पीढ़ियों से कब्जा चला आ रहा है, उसे फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के जरिए बेच दिया गया।
अनिल कुमार सिंह, निवासी ग्राम दौलतपुर गांधी, थाना पचरुखिया, जिला पटना के अनुसार उनकी जमीन मौजा जान्छु, खाता संख्या 278, प्लॉट संख्या 1247 सहित अन्य भूखंडों में दर्ज है। इस जमीन का ऑनलाइन रसीद आज भी अनिल कुमार सिंह और कोपेंदर सिंह के नाम से कट रहा है और उनके पास इसके पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं। बावजूद इसके वर्ष 2024 में कथित तौर पर धोखाधड़ी कर गुड़िया देवी, पति रवि रंजन सिंह के नाम 25 डिसमिल जमीन का फर्जी बैनामा करा दिया गया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ओपेंदर सिंह और संतोष सिंह ने मिलकर अंचल कर्मचारी की मिलीभगत से जाली केवाला तैयार किया, जिसमें अनिल कुमार सिंह के पिता के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। जब इस फर्जीवाड़े की शिकायत थाने में की गई तो जांच का आश्वासन दिया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि अनिल कुमार सिंह और उनके बड़े भाई कोपेंदर सिंह को लगातार थाने से नोटिस भेजे जा रहे हैं। पुलिस द्वारा कथित तौर पर जमीन से कब्जा हटाने का दबाव बनाया जा रहा है और कहा जा रहा है कि ऐसा नहीं करने पर चालान और कार्रवाई होगी। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे आज भी जमीन पर काबिज हैं और खेती ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा है।
पीड़ित परिवार ने पुलिस पर अवैध वसूली का भी गंभीर आरोप लगाया है। अनिल कुमार सिंह का दावा है कि थाने में जाने पर उनसे 25 हजार रुपये की मांग की गई, खाने-पीने के नाम पर पैसे मांगे गए और बार-बार नोटिस देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसके विपरीत, विपक्षी पक्ष को थाने में तलब तक नहीं किया जाता।
लगातार धमकी, नोटिस और दबाव के कारण कोपेंदर सिंह और उनका परिवार भय के माहौल में जी रहा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया तो वे अपनी पुश्तैनी जमीन से बेदखल कर दिए जाएंगे।
पीड़ितों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पटना और अन्य उच्च अधिकारियों को आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच, फर्जी केवाला रद्द कराने और दोषियों पर धारा 420 सहित सख्त कार्रवाई की मांग की है।
यह मामला न सिर्फ जमीन माफिया के बढ़ते हौसलों को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि जब किसान अपनी ही जमीन बचाने के लिए थानों के चक्कर काटने को मजबूर हों, तो कानून और प्रशासन किसके पक्ष में खड़ा है?
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