अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले से आर्थिक लेन-देन और कथित बकाया भुगतान से जुड़ा एक मामला सामने आया है। जाफराबाद मोहल्ला निवासी हसन सईद ने आरोप लगाया है कि एक ओर उन्हें कुरान पाक की तिलावत कराने की मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं मिला, वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब भेजने के लिए खर्च किए गए करीब 1.60 लाख रुपये भी आज तक वापस नहीं किए गए। पीड़ित का कहना है कि कई बार मांग और शिकायत करने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है।
हसन सईद के अनुसार, वह घर-घर जाकर कुरान पाक की तिलावत और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनका आरोप है कि करीब 15 दिन पहले उन्होंने ग्राम खूबपुर बाकरगंज में ख्वाजा आरिफ के घर तीन-चार बार कुरान पाक की तिलावत और सूरहख्वानी का कार्य किया था, जिसकी मजदूरी 12 हजार रुपये तय हुई थी। आरोप है कि उन्हें केवल 2,500 रुपये ही दिए गए, जबकि शेष 9,500 रुपये की मांग करने पर भुगतान से इनकार कर दिया गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि बकाया राशि मांगने पर उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण यह राशि उनके परिवार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन बार-बार आग्रह करने के बावजूद उन्हें उनका मेहनताना नहीं मिल सका।
इसी आवेदन में हसन सईद ने एक अन्य गंभीर आरोप भी लगाया है। उनका कहना है कि लगभग 15 वर्ष पहले उन्होंने मोहम्मद अब्बास नामक व्यक्ति को रोजगार के लिए सऊदी अरब भेजने में मदद की थी। उनके अनुसार, वीजा, टिकट, मेडिकल और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं पर उन्होंने अपने पास से करीब 1 लाख 60 हजार रुपये खर्च किए थे। उनका दावा है कि उस समय विपक्षी ने पूरी राशि लौटाने का वादा किया था, लेकिन आज तक पैसे वापस नहीं किए गए और लगातार टालमटोल की जा रही है।
पीड़ित ने संबंधित थाना और प्रशासन को प्रार्थना-पत्र देकर दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच कराने, बकाया धनराशि दिलाने तथा आरोपित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सुनवाई नहीं होने के कारण उनका परिवार आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव से जूझ रहा है तथा उन्हें प्रशासन से शीघ्र न्याय की उम्मीद है।
फिलहाल, इस मामले में जिन व्यक्तियों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने नहीं आया है। समाचार में वर्णित सभी आरोप पीड़ित द्वारा दिए गए प्रार्थना-पत्र पर आधारित हैं। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।


