Thursday, May 28, 2026
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शादी का झांसा देकर तीन साल तक साथ रखने का आरोप, महिला ने बच्चों के भरण-पोषण और न्याय की लगाई गुहार

भट्टे पर मजदूरी के दौरान शुरू हुआ रिश्ता अब विवाद में बदल गया है। पीड़िता इंदु देवी का आरोप है कि शादी का झांसा देकर तीन साल तक साथ रखने के बाद अब पति और उसका परिवार उसे अपनाने से इनकार कर रहा है, जबकि बच्चों के पालन-पोषण का भी कोई खर्च नहीं दिया जा रहा।नालंदा। बिहार के नालंदा जिले के हिलसा थाना क्षेत्र अंतर्गत नदावर गांव की रहने वाली एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर शादी का झांसा देकर शोषण करने तथा अब बच्चों के भरण-पोषण से मुंह मोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता इंदु देवी ने प्रशासन से न्याय दिलाने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार इंदु देवी के पहले पति की मृत्यु हो चुकी थी। पहले पति से उनके चार बच्चे हैं। पति के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई, जिसके चलते वह अपने बच्चों के साथ भट्टे पर मजदूरी करने लगीं। बताया गया कि पहले ससुराल पक्ष ने एक बेटा और एक बेटी अपने पास रख लिया, जबकि एक बेटा और एक बेटी इंदु देवी के साथ रहते हैं।

पीड़िता के अनुसार भट्टे पर काम करने के दौरान उनकी मुलाकात सुक्खू चौहान से हुई। आरोप है कि सुक्खू चौहान ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वह उनके बच्चों की जिम्मेदारी उठाएगा, उनका पालन-पोषण करेगा और जीवनभर साथ रखेगा। इसी भरोसे में आकर दोनों के बीच संबंध बने और करीब तीन वर्षों तक दोनों साथ रहे।

इंदु देवी का आरोप है कि इस दौरान सुक्खू चौहान ने शादी भी की थी और उसके परिवार के सभी लोगों को इसकी जानकारी थी। पीड़िता ने बताया कि सुक्खू चौहान के पिता मुकेश चौहान समेत परिवार के अन्य सदस्य भी इस रिश्ते से अवगत थे। इसके बावजूद अब परिवार वाले उन्हें अपनाने से इनकार कर रहे हैं।

महिला का कहना है कि तीन साल तक साथ रखने के बाद अब सुक्खू चौहान ने उन्हें रखने से मना कर दिया है। इतना ही नहीं, वह बच्चों के पालन-पोषण के लिए कोई खर्च भी नहीं दे रहा। पीड़िता का आरोप है कि ससुराल पक्ष आए दिन झगड़ा और प्रताड़ना करता है।

इंदु देवी ने बताया कि वह न्याय की गुहार लेकर थाना पहुंचीं, लेकिन अब तक उनकी शिकायत पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई। महिला ने कहा कि पति अब दूसरी शादी करने की बात कह रहा है। उनका कहना है कि यदि वह दूसरी शादी करना चाहता है तो करे, लेकिन उनके बच्चों और बेटी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भरण-पोषण का खर्च अवश्य दे।

पीड़िता ने प्रशासन से मांग की है कि समय रहते मामले में हस्तक्षेप कर उन्हें न्याय दिलाया जाए तथा बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उचित कार्रवाई की जाए।

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