Wednesday, February 11, 2026
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“बच्चों के इलाज के लिए 13 लाख का कर्ज, करियर का नशा नहीं बल्कि जिंदा रहने की लड़ाई”

सितामढ़ी , बिहार:
बिहार के सितामढ़ी जिले के खैरवा विश्नाथपुर गांव में रहने वाले सफरुल संसूरी ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं। 01 जनवरी 1976 को जन्मे इस 47 वर्षीय पिता ने अपने बच्चों के इलाज के लिए करीब 13 लाख रुपए का कर्ज लिया था। अब आर्थिक तंगी के कारण वे यह कर्ज चुका पाने में असमर्थ हैं और मदद के लिए पूरी तरह से गुहार लगा रहे हैं।

सफरुल संसूरी का कहना है, “हमारे बच्चों का इलाज जीवन और मौत का सवाल है। मेरे पास इतनी रकम नहीं है कि मैं यह कर्ज चुका सकूं। सरकार और लोगों से मदद की उम्मीद है।”

सफरुल ने अपना आधार संख्या 7313 5261 3964 भी साझा किया है और बताया कि यह उनके लिए आधार – आम आदमी का अधिकार जैसा है। उन्होंने उल्लेख किया कि इलाज के लिए लिए गए कर्ज ने उनके परिवार की पूरी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सफरुल जैसे कई आम लोग जो बच्चों और परिवार के लिए अपनी जान हथेली पर रखकर आगे बढ़ते हैं, उन्हें मदद के बजाय अक्सर आर्थिक दबाव झेलना पड़ता है।

सितामढ़ी जिले में ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं, जहां गरीब परिवारों को स्वास्थ्य और शिक्षा के खर्चों के कारण भारी कर्ज लेना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को ऐसे परिवारों के लिए विशेष राहत योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए।

सफरुल के अनुसार, उन्होंने आधार कार्ड और सरकारी हेल्पलाइन (1800 300 1947) के माध्यम से मदद की गुहार लगाई है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन और समाज इस पिता की पुकार को सुन पाएंगे?

> “मेरे बच्चों की जिंदगी खतरे में है, हम केवल इंसानियत की उम्मीद पर जी रहे हैं।” – सफरुल संसूरी

 

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