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 आधार लिंकिंग के नाम पर बड़ा खेल: रोजगार सहायक जमीर खान पर मजदूरी और आवास राशि हड़पने का आरोप

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शहडोल। जिले के जनपद पंचायत बुढ़ार अंतर्गत ग्राम पंचायत धुम्माडोल से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक आदिवासी महिला ने रोजगार सहायक जमीर खान पर गंभीर धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। पीड़िता गुड्डी बाई सिंह पाव ने कलेक्टर को दिए शिकायत पत्र में बताया कि उसके मनरेगा जॉब कार्ड में किसी अन्य व्यक्ति का आधार नंबर जोड़कर उसकी मेहनत की मजदूरी राशि निकाल ली गई। साथ ही, उसके पति के प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि भी कथित रूप से हड़प ली गई।

पीड़िता के अनुसार, वह मनरेगा के तहत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है। उसकी मजदूरी की राशि बैंक खाते में जमा होती थी, लेकिन पिछले कुछ समय से उसे भुगतान नहीं मिल रहा था। जब उसने बैंक जाकर अपने खाते का स्टेटमेंट निकलवाया, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ—खाते से लगातार पैसे निकाले जा रहे थे, जबकि उसने कोई निकासी नहीं की थी। जांच में सामने आया कि किसी अन्य व्यक्ति के आधार नंबर के माध्यम से यह रकम आहरित की जा रही है।

महिला का आरोप है कि ग्राम पंचायत में पदस्थ रोजगार सहायक जमीर खान ने जानबूझकर उसके जॉब कार्ड में दूसरे व्यक्ति का आधार लिंक कर दिया। जब उसने इस गड़बड़ी की शिकायत की, तो उसे कथित रूप से धमकाया गया और कहा गया कि जहां शिकायत करनी है कर लो, कुछ नहीं होगा। इस कथित लापरवाही और मिलीभगत के चलते उसकी पूरी मजदूरी राशि गायब हो गई।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब पीड़िता ने खुलासा किया कि उसके पति मंगल सिंह के नाम से स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना की मजदूरी राशि भी गलत तरीके से उसके खाते में डलवाई गई और फिर उसी फर्जी आधार लिंकिंग के जरिए निकाल ली गई। इससे आवास निर्माण कार्य रुक गया है और परिवार आर्थिक संकट में घिर गया है।

पीड़िता गुड्डी बाई सिंह पाव ने कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी रोजगार सहायक जमीर खान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उसके खाते से निकाली गई पूरी राशि वापस दिलाने की गुहार लगाई है। उसने यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

जनसुनवाई में उठे इस मामले ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार का बड़ा मामला होगा बल्कि गरीब और अशिक्षित लोगों के अधिकारों का खुला हनन भी माना जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन अब देखना होगा कि पीड़िता को न्याय कब तक मिल पाता है।

 

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