राजधानी दिल्ली के अलीपुर इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत, भरोसे और मदद की भावना पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के रहने वाले 19 वर्षीय सतीश, जो वर्तमान में दिल्ली के अलीपुर क्षेत्र में रहकर नौकरी करते हैं, आज खुद एक ऐसे विवाद में घिर गए हैं, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
परिजनों के अनुसार करीब दस दिन पहले सतीश की मुलाकात पूजा पाल नाम की एक युवती से हुई थी। बताया जाता है कि रास्ते में हुई बातचीत के दौरान युवती ने सतीश से नौकरी दिलाने में मदद मांगी। युवती ने बताया था कि उसे सिलाई-कढ़ाई, बनियान और कपड़ों से जुड़े काम का अनुभव है और वह रोजगार की तलाश में है।
सतीश के परिवार का कहना है कि युवक ने मानवता के नाते उसकी मदद करने का फैसला किया और अपनी कंपनी में बातचीत कर उसे काम दिलाने का प्रयास शुरू किया। इसी दौरान युवती ने रहने की समस्या का हवाला देते हुए सतीश से अपने आसपास ही कोई कमरा दिलाने की गुहार लगाई।
परिजनों के मुताबिक जिस मकान में सतीश पहले से किराए पर रह रहे थे, उसी भवन में युवती भी एक दिन पहले शिफ्ट होकर आई थी। इसके बाद सतीश ने उसकी परेशानी को देखते हुए मकान मालिक से बात कर उसके रहने की व्यवस्था में भी सहयोग किया।
बताया जा रहा है कि कुछ समय बाद पूजा पाल की पहचान मकान मालिक के बेटे से हो गई और दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लगी। इसी बीच अचानक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया और युवती ने सतीश पर छेड़छाड़ और पीछा करने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए।
मामला सामने आने के बाद मकान मालिक ने सतीश के पिता को दिल्ली बुलाया और नाराजगी जताते हुए मकान खाली करने तक की बात कह दी। परिवार का कहना है कि इन आरोपों के बाद सतीश मानसिक रूप से काफी टूट चुके हैं और लगातार तनाव में हैं।
परिजनों का दावा है कि सतीश का इस तरह के किसी भी विवाद से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने केवल इंसानियत के नाते युवती की सहायता की थी। उनका आरोप है कि युवक की भलाई का गलत फायदा उठाया गया और अब झूठे आरोपों के कारण पूरा परिवार सामाजिक और मानसिक पीड़ा झेल रहा है।
परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि सतीश दोषी हैं तो कानून अपना काम करे, लेकिन यदि आरोप बेबुनियाद हैं तो सच्चाई सामने आनी चाहिए ताकि एक निर्दोष युवक की जिंदगी और भविष्य बर्बाद होने से बच सके।


