मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एथेनॉल टेंडर मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ किया कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला बरकरार है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, एथेनॉल की सप्लाई की मात्रा जरूरत और मांग के आधार पर तय होगी।
देश में पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एथेनॉल टेंडर से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने साफ कर दिया कि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला बरकरार है। हालांकि, एथेनॉल की सप्लाई और आवंटन को लेकर चल रहे विवाद पर कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि यह एक बड़ा प्रयोग है, जिसके नतीजे अगले साल तक सामने आ सकते हैं।
यह मामला भारत पेट्रोलियम और केंद्र सरकार से जुड़े एथेनॉल टेंडर विवाद का है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन प्रक्रिया को दोबारा खोलने का आदेश दिया था। भारत पेट्रोलियम का कहना है कि इससे सरकार की 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग योजना प्रभावित हो सकती है। इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि सरकार पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने की योजना पर लगातार काम कर रही है। उन्होंने इसे एक बड़ा राष्ट्रीय प्रयोग बताते हुए कहा कि इसके वास्तविक परिणाम अगले साल तक सामने आने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में इस मुद्दे से जुड़े कई मामले लंबित हैं। अगर हर जगह अलग-अलग फैसले आए, तो राष्ट्रीय नीति प्रभावित हो सकती है। इसलिए केंद्र सरकार सभी मामलों को एक साथ सुनने के लिए ट्रांसफर याचिका दाखिल करना चाहती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलील सुनने के बाद मामले में नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई तक मौजूदा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी पूछा कि सरकार पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पास क्यों नहीं गई। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने कहा कि ट्रांसफर याचिका दाखिल करना केवल मामले में देरी करने की कोशिश है।
क्या बदलेगा पेट्रोल का फॉर्मूला?
सुनवाई के बाद अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का संबंध केवल एथेनॉल की सप्लाई और आवंटन से था। उन्होंने कहा कि पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने की सरकार की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, तेल कंपनियों को कितनी मात्रा में एथेनॉल मिलेगा, यह मांग, उपलब्धता और अन्य परिस्थितियों के आधार पर तय किया जाएगा।


