Monday, July 13, 2026
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दोबारा सुलगी पुरानी पेंशन की चिंगारी, सरकारी कर्मियों को मंजूर नहीं UPS, 17 नवंबर को दिल्ली में होगी बड़ी

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एनपीएस में सुधार कर लाई गई ‘यूनिफाइड पेंशन स्कीम’ (यूपीएस) से केंद्र सरकारी के कर्मचारी संतुष्ट नहीं हैं। अभी तक यूपीएस का गजट भी जारी नहीं हुआ है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने विरोध का बिगुल बजा दिया है। ‘नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने बताया, 17 नवंबर को नई दिल्ली में ओपीएस बहाली के लिए पेंशन जयघोष महारैली आयोजित की जाएगी। रैली की तैयारियों के मद्देनजर, पटेल ने कई राज्यों का दौरा किया है। उनका दावा है कि जंतर मंतर पर होने वाली रैली में केंद्र एवं विभिन्न प्रदेशों की सरकारों के कर्मचारी शिरकत करेंगे। पटेल ने बताया, हमारा फोकस नाम पर नहीं है, बल्कि ओपीएस की आत्मा पर है। सरकार से मांग है कि पेंशन की गणना 25 वर्ष के स्थान पर 20 वर्ष हो और कर्मचारी के अंशदान पर जीपीएफ की मान्यता रहे, ताकि वह कर्मचारी को पूरा वापस मिल जाए।

इस विरोध प्रदर्शन की कड़ी में सबसे पहले ‘एनएमओपीएस’ द्वारा 26 सितंबर को देश के सभी जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के सदस्यों ने दो अक्तूबर को प्रतिज्ञा ली है कि जब तक वे गैर-अंशदायी ‘पुरानी पेंशन’ योजना हासिल नहीं कर लेते, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। रेलवे के विभिन्न कर्मचारी संगठन भी यूपीएस के विरोध में खड़े हो गए हैं। एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना था, कर्मचारियों ने यूपीएस के खिलाफ अपने आंदोलन को दोबारा से प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। अंशदायी पेंशन योजना, ‘यूपीएस’ का पुरजोर विरोध किया जाएगा। पिछले 20 वर्षों से केंद्र और राज्य सरकार के कर्मचारी, अंशदायी पेंशन योजना के खिलाफ लड़ रहे हैं।
उनकी मांग, गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल कराना है। सरकारी कर्मचारियों के पास अब यही विकल्प बचा है कि वे यूपीएस में शामिल हों या एनपीएस में बने रहें।
बतौर श्रीकुमार, यूपीएस कुछ नहीं है, बल्कि एनपीएस का विस्तार है। राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों ने भी यूपीएस को खारिज कर दिया है। कई राज्यों में रैलियां और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। वे यूपीएस को स्वीकार नहीं कर सकते। वजह, यह एक अंशदायी प्रकृति की योजना है। कर्मचारियों की संचित निधि, जिसमें उन्होंने 3 दशकों से अधिक समय तक योगदान दिया है, उसे वापस नहीं लौटाया जाएगा। भले ही पेंशन की पात्रता 25 साल रखी गई है, लेकिन कर्मचारियों को पेंशन 60 साल की उम्र के बाद ही मिलेगी। पुरानी पेंशन योजना में मिलने वाले कई लाभ एनपीएस/यूपीएस में नहीं मिलते हैं। इससे कर्मियों को आर्थिक नुक़सान हुआ है।

गांधी जयंती दिवस पर एआईडीईएफ के प्रत्येक सदस्य ने शपथ ली है कि वे, एक रक्षा नागरिक कर्मचारी, विनाशकारी एनपीएस और यूपीएस अंशदायी पेंशन योजना से मुक्त होने के लिए सभी संघर्षों और आंदोलनों में शामिल होने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे सीसीएस (पेंशन) नियम, 1972 (अब 2021) के तहत गैर अंशदायी पेंशन प्राप्त करने के लिए सभी ट्रेड यूनियन एक्शन कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं और उनमें भाग लेंगे। कर्मचारियों ने प्रतिज्ञा की है कि वे जब तक गैर-अंशदायी पुरानी पेंशन योजना हासिल नहीं कर लेते, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे। सभी सरकारी कर्मचारियों की इस वास्तविक और उचित मांग को वास्तविकता में बदलने के लिए वे सब एक हैं। इस बाबत दूसरे कर्मचारी संगठनों से भी चर्चा हो रही है।

नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने बताया, 20 वर्ष की नौकरी के बाद 50 प्रतिशत पेंशन का आधार सुनिश्चित हो, कर्मचारी अंशदान की ब्याज सहित यानी जीपीएफ की तरह वापसी और वीआरएस/अनिवार्य सेवानिवृत्ति/सेवानिवृत्ति पर संपूर्ण राशि की वापसी, सरकार को ये मांगें माननी ही पड़ेंगी। 17 नवंबर की रैली में देशभर से लाखों कर्मचारी भाग लेंगे। इनमें दिल्ली, जम्मू कश्मीर, पंजाब, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हरियाणा, गुजरात, असम, मेघालय, नागालैंड, सिक्किम, तमिलनाडु, चंडीगढ़ और महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के अलावा केंद्रीय कर्मचारियों के संगठन भी शामिल हैं।

पटेल ने कहा, हमने पहले भी रणनीतिक रूप से सरकार को कदम दर कदम, एनपीएस पर झुकाया है। केंद्र सरकार को एनपीएस पर पीछे हटना पड़ा है। अब पुरानी पेंशन के मामले में कर्मचारियों की दो महत्वपूर्ण डिमांड बची हैं। पहली है पेंशन की गणना 25 वर्ष के स्थान पर 20 वर्ष हो और दूसरी, कर्मचारी के अंशदान पर जीपीएफ की मान्यता रहे, ताकि वह कर्मियों पूरा वापस मिल जाए। ये दोनों मुद्दे, इस बार 17 नवंबर की रैली के बाद हल हो जाएंगे। पेंशन तो हम हुबहू पुरानी ही लेकर रहेंगे। बस उसका नाम ओपीएस नहीं होगा। बतौर पटेल, नाम तो पहले भी ओपीएस नहीं था। नाम कुछ भी हो सकता है, हमारा फोकस नाम पर नहीं है, बल्कि ओपीएस की आत्मा पर है। कर्मचारियों का सरकार के लिए सुझाव है, नाम चाहे कुछ भी रख लो, लेकिन उन्हें ओपीएस के सभी प्रावधानों का फायदा दे।

साल में पांच दिन नोटों से सजने वाला देश का इकलौता मंदिर, भक्तों के गहनों से सजती हैं मां लक्ष्मी

मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में स्थित महालक्ष्मी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है, जो पूरे साल में पांच दिनों के लिए खास रूप में सजता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से मां लक्ष्मी का शृंगार किया जाता है, जो कि देशभर में अपनी तरह का इकलौता आयोजन है।
मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में स्थित महालक्ष्मी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर है, जो पूरे साल में केवल पांच दिनों के लिए खास महत्व रखता है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि यहां भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से मां लक्ष्मी का श्रृंगार किया जाता है, जो कि देशभर में अपनी तरह का इकलौता आयोजन है। पांच दिनों तक नोटों-गहनों से सजा मंदिर भक्तों के आकर्षण का केंद्र होता है। दीवाली के दौरान मां लक्ष्मी के दर्शन और उनकी विशेष साज-सज्जा को देखने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।
पांच दिनों के लिए सजता है मंदिर
महालक्ष्मी का यह मंदिर यूं तो सालभर भक्तों के लिए खुला रहता है, पर दिवाली पर खासतौर पर पांच दिनों के लिए सजता है, और खुला रहता है। नोटों से सजावट के बाद धनतेरस के दिन ब्रह्म मुहूर्त में खोला जाता है और गोवर्धन पूजा के बाद पट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान भक्त मां लक्ष्मी के दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं पूरी होने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
अनोखा शृंगार: गहनों और नोटों से सजीं मां लक्ष्मी
यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मां लक्ष्मी का श्रृंगार भक्तों द्वारा लाए गए गहनों और नोटों से किया जाता है। इस अनोखी परंपरा में पिछले कई वर्षों से कभी कोई गहना गायब नहीं हुआ, जो भक्तों के बीच एक गहरी श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मंदिर में मां लक्ष्मी की मूर्ति को पांच हाथियों पर विराजमान दिखाया गया है, और उनके साथ भगवान गणेश तथा मां सरस्वती की प्रतिमाएं भी हैं।
करोड़ों के आभूषणों से सजता है मंदिर
दीपावली के मौके पर इस मंदिर में फूलों की जगह नोटों की गड्डियों और आभूषणों से सजावट की जाती है। आभूषणों और नोटों की इस भव्य सजावट का दृश्य देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। माना जाता है कि यहां सजने वाले आभूषणों और नोटों की कुल कीमत करोड़ों में होती है, जो भक्तों की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है।
प्रसाद के रूप में आभूषण और पैसे
दीपावली से पहले भक्त अपने गहने और नोट मंदिर में जमा कराते हैं और इसके बदले उन्हें एक टोकन दिया जाता है। गोवर्धन पूजा के दिन, भक्त अपने टोकन के आधार पर अपने गहने और पैसे प्रसाद के रूप में प्राप्त करते हैं। इस प्रसाद को भक्त अपने घर में समृद्धि का प्रतीक मानकर संभाल कर रखते हैं। महिलाओं को प्रसाद स्वरूप श्रीयंत्र, सिक्के, कौड़ियां, अक्षत, और कंकू युक्त कुबेर पोटली दी जाती है, जिन्हें घर में शुभ माना जाता है।
हफ्तेभर पहले से शुरू होती है भव्य सजावट
महालक्ष्मी मंदिर में सजावट की तैयारी दीपावली से एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती है। इस बार भी शरद पूर्णिमा से ही भक्त गहने और नोट लेकर आने लगे थे। ऐसी मान्यता है कि जिनके गहनों का इस्तेमाल मां लक्ष्मी के श्रृंगार में होता है, उनके घर में सुख और समृद्धि बनी रहती है। मंदिर की सुरक्षा के लिए चार गार्ड और सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। मंदिर के पास स्थित माणक चौक पुलिस थाना में भी 24 घंटे फोर्स तैनात रहती है। इस तरह रतलाम का महालक्ष्मी मंदिर अपनी विशिष्ट परंपराओं और भव्य साज-सज्जा के कारण देशभर में प्रसिद्ध है, जहां भक्तों की श्रद्धा और आस्था एक अद्वितीय रूप में मां लक्ष्मी के प्रति व्यक्त होती है।

सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- प्रदेश को समृद्ध और गौरवशाली बनाने का कार्य कर रही सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लालपरेड ग्राउंड में ध्वजारोहण कर मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस समारोह का उदघाटन किया। सीएम ने कहा कि दीपोत्सव और राज्योत्सव की एक साथ शुरुआत हो रही है।
मध्य प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर भोपाल के लालपरेड मैदान में राज्य स्तरीय समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और जनता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि दीपोत्सव का उत्सव चल रहा है और इसी के साथ राज्य का स्थापना दिवस भी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार मध्य प्रदेश को समृद्ध बनाने के साथ-साथ राज्य का गौरव बढ़ाने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की आठ करोड़ जनता देवतुल्य है और राज्य सरकार चार दिवसीय विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से स्थापना दिवस को मना रही है। उन्होंने प्रदेश के पौराणिक स्थलों का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में 11 वर्ष बिताए और भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन में शिक्षा ग्रहण की, जिससे यह धरती धन्य हुई है। डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री देश की सीमाओं को सुरक्षित रख रहे हैं और भारत को प्रगति के पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विंध्य, सतपुड़ा, मालवा, और निमाड़ की अनोखी पहचान का भी जिक्र किया और कहा कि ये क्षेत्र मध्यप्रदेश को देश-दुनिया में अलग पहचान देने का कार्य कर रहे हैं।
धर्म और अध्यात्म की त्रिवेणी बहती है इस धरती पर
मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म और अध्यात्म की त्रिवेणी सतपुड़ा की इस धरती पर बहती है, जिससे मध्यप्रदेश गर्व से सिर ऊंचा किए हुए अपनी अलग पहचान बनाता है। यहां की लोक कला, जनजातियां, और मालवा का गौरवशाली इतिहास हमारी सांस्कृतिक धरोहर हैं। हमारे राज्य के लोग राजा विक्रमादित्य के साहस और राजा भोज की ऐतिहासिक उपलब्धियों से परिचित हैं। भगवान श्रीराम ने यहाँ अपने 11 वर्षों का वनवास बिताया, जिससे हमारे इतिहास में और भी गौरव का अध्याय जुड़ता है। आज चित्रकूट धाम पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। गुप्त गोदावरी से मंदाकिनी तक बहती इन धाराओं की प्रत्येक लहर हमारे इतिहास के गौरव की कहानी कहती है।
सीएम ने प्रदेश की उपलब्धियां गिनाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी अनगिनत विशेषताओं को अपने में समेटे हुए है। यह प्रदेश न केवल देश का ‘फूड बॉस्केट’ है बल्कि सोयाबीन उत्पादन में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बिजली उत्पादन में अग्रणी होने के साथ ही यहां बाघों की मौजूदगी भी हमारा गौरव है। अब हमारे पास ‘चीता स्टेट’ का नया सम्मान भी जुड़ गया है। इंदौर लगातार 7 वर्षों से देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है, और भोपाल को सबसे स्वच्छ राजधानी का दर्जा मिला है। हमें 7 बार कृषि कर्मण अवार्ड भी प्राप्त हो चुका है, जो हमारी कृषि में उत्कृष्टता का प्रमाण है।

आर्मी बैंड ने सुमधुर धुनों की प्रस्तुति दी
समारोह में मध्यप्रदेश के राज्य स्तरीय खेल मलखंब का प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सेना द्वारा लगाए गए टैंक और अन्य सैन्य एवं युद्ध उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। आर्मी बैंड ने सुमधुर धुनों की प्रस्तुति दी, जिससे सभी लोग मंत्रमुग्ध हो गए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कथक नृत्य के माध्यम से गणेश वंदना की प्रस्तुति सहित अन्य लोकनृत्यों ने दर्शकों को मोहित किया। इस अवसर पर मंत्री कृष्णा गौर, सांसद आलोक शर्मा, महापौर मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी, विधायक रामेश्वर शर्मा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, पुलिस महानिदेशक सुधीर कुमार सक्सेना, सीएम के अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा और प्रमुख सचिव संस्कृति शिवशेखर शुक्ला सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।

मोहन सरकार ने दिया दिवाली गिफ्ट, बढ़ाया महंगाई भत्ता, जानें कब खाते में आएगी बढ़ी सैलरी

भोपाल. दिवाली से पहले मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा दिया है. राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता 4 फीसदी बढ़ा दिया है. इसके बाद डीए 46 फीसदी से बढ़कर 50 फीसदी हो गई है. मालूम हो कि नई दरें जनवरी 2024 से लागू हो जाएंगी. अब ऐसे में जनवरी से लेकर सितंबर तक का एरियर भी कर्मचारियों को मिलेगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने सभी अधिकारी और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाने का फैसला लिया है. मेरी अपनी ओर से सभी को बधाई. उन्होंने कहा कि इसकी बधाई डबल तब हो जाती है जब दीपावली भी है और इस अवसर पर मध्य प्रदेश स्थापना दिवस का कार्यक्रम भी है.
मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने बताया कि राज्य शासन ने 46 फीसदी महंगाई भत्ता वित्त विभाग के प्रतिपत्र से स्वीकृत किया है. इसके आधार पर स्वीकृति महंगाई भत्ते की दर एक जुलाई 2023 से प्रभावशील की गई थी. एरियर राशि का भुगतान किस्तों में किया गया. अब सभी शासकीय सेवकों को 1 जनवरी 2024 से महंगाई भत्ता 50 फीसदी की दर से दिया जाएगा. अभी अक्टूबर चल रहा है, लेकिन हम इसे 1 जनवरी से देंगे.
सीएम मोहन यादव ने की अपील

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपील करते हुए कहा कि हम सभी दिवाली के अवसर पर अपना ध्यान रखें और अपने आसपास के लोगों का भी ध्यान रखें. गरीब से गरीब आदमी के आंखों में भी आनंद आए.
उन्होंने कहा कि 1 नवंबर के गठन की पहली तारीख, जो 1956 में एक नए प्रदेश का आकार साकार लेकर आई. इसके मध्य में हम सब अपनी-अपनी दिनचर्या चलाते हुए देश की सेवा, मध्य प्रदेश की सेवा, समान रूप से आगे बढ़ती जाए, इस भाव के आधार पर हम काम करते रहते हैं.
सीएम ने कहा कि सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देना चाहूंगा. आप सब अपने लगन, मेहनत, सकारात्मक सोच के कारण से पूरे देश के अधिकारियों -कर्मचारियों में एक विशेष पहचान रखते हैं. इस नाते से सरकार का भी उत्तरदायित्व है कि आपके हितों का भी ध्यान रखें.

इंदौर: ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में चल रहा था सट्टेबाजी गिरोह, 4 पकड़े गए; सामने आया दुबई कनेक्शन

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मध्य प्रदेश के इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी करवाने वाले गिरोह के 4 एजेंटों को पुलिस ने पकड़ा है और मामले की विस्तार से जांच कर रही है।
इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी करवाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने की बड़ी खबर सामने आई है। पुलिस की अपराध निरोधक शाखा के एक अधिकारी ने गुरुवार को इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में संयुक्त अरब अमीरात के दुबई से सट्टेबाजी का गिरोह चलाए जाने का खुलासा करते हुए पुलिस ने इंदौर से 4 लोगों को हिरासत में लिया है। उन्होंने बताया कि आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, 2 डेस्कटॉप कम्प्यूटर, 7 मोबाइल फोन के अलावा ऑनलाइन सट्टे का हिसाब-किताब मिला है, और अब पूरे गिरोह के खिलाफ जांच की जा रही है।
अलग-अलग शहरों में बना रखें है अपने एजेंट’
अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने पूरे मामले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुखबिर की सूचना पर पलसीकर कॉलोनी के एक मकान पर छापा मारा गया। पुलिस की छापेमारी में वहां ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी का गिरोह संचालित होना पाया गया। अधिकारी ने बताया कि इस मकान से 4 लोगों को हिरासत में लिया गया जो दुबई से चलाए जा रहे गिरोह के स्थानीय एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे। दंडोतिया ने बताया कि पुलिस को शुरुआती जांच में पता चला कि एक वेबसाइट के जरिये इस गिरोह को दुबई से चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जांच में यह भी पता चला कि गिरोह ने भारत के अलग-अलग शहरों में अपने एजेंट बनाए हुए हैं।

‘लोगों के जीतने की संभावना न के बराबर होती है’
दंडोतिया ने बताया, ‘पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में संचालित किए जा रहे सट्टे में लोगों के जीतने की संभावना नहीं के बराबर होती है, जबकि गिरोह को चलाने वाले और एजेंट जमकर पैसा बटोरते हैं।’ अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से एक लैपटॉप, 2 कम्प्यूटर, 7 मोबाइल फोन आदि उपकरणों के साथ ही ऑनलाइन सट्टे का हिसाब-किताब भी मिला है। दंडोतिया ने बताया कि सट्टेबाजी गिरोह के खिलाफ पुलिस गहराई से जांच कर रही है। बता दें कि ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के चक्कर में लोगों की मेहनत की कमाई लुटने की खबरें अक्सर आती रहती हैं और इस बारे में लोगों को बार-बार सावधान भी किया जाता रहा है।

बिहार और आंध्रप्रदेश को मिला दिवाली का तोहफा, कैबिनेट ने 2 बड़े रेल प्रोजेक्ट्स को दी मंजूरी, जानिए फायदे

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नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने गुरुवार को कई अहम प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें दो बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स भी शामिल हैं, जिनसे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार को फायदा होगा। इन रेलवे प्रोजेक्ट्स में 6,798 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कैबिनेट के फैसलों की बात करें, तो आज कुल 9,17,791 करोड़ रुपये के 7 सेक्टर्स के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इनमें एयरपोर्ट, पोर्ट, हाईवे, रेलवे, मेट्रो, इंडस्ट्रियल और हाउसिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। रेलवे के लिए 51,801 करोड़ रुपये के प्रोजेक्टस को मंजूरी दी गई है। इसमें कुल 12 रेलवे प्रोजेक्ट्स और वाराणसी में नया पुल शामिल है।

अमरावती रेलवे लाइन को मंजूरी
कैबिनेट ने आज 57 किलोमीटर लंबी अमरावती रेलवे लाइन को मंजूरी दी है। यह रेल लाइन 2,245 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। इससे आन्ध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती रेलवे नेटवर्क से जुड़ जाएगा। अमरावती की हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता से सीधे कनेक्टिविटी होगी। इस रेलवे लाइन के बनने से अमरलिंगेश्वर स्वामी मंदिर, अमरावती स्तूप, ध्यान बुद्ध प्रतिमा और उंदावल्ली गुफाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। मछलीपट्टनम बंदरगाह, कृष्णापट्टनम बंदरगाह और काकीनाडा बंदरगाह से कनेक्टिविटी बढ़ेगी। इस प्रोजेक्ट में कृष्णा नदी पर 3 किलोमीटर लंबा ब्रिज भी बनेगा।
नॉर्थ बिहार में डबल होगी रेलवे लाइन
दूसरा बड़ा रेल प्रोजेक्ट नॉर्थ बिहार के लिये आया है। यहां 256 किलोमीटर रेलवे ट्रैक को डबल किया जाएगा। नरकटियागंज-रक्सौल-सीतामढ़ी-दरभंगा और सीतामढी-मुजफ्फरपुर रेलवे ट्रैक की डबलिंग की जाएगी। इससे उत्तर प्रदेश और नॉर्थ बिहार को फायदा होगा। यह रेलवे ट्रैक नेपाल बॉर्डर के पास होगा, जिससे भारत-नेपाल ट्रेड में भी बढ़ोतरी होगी। इस प्रोजेक्ट में 4,553 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का हो पूरा सम्मान”, BRICS में सुरक्षा और सुधारों पर फोकस जयशंकर का व्याख्यान

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार पर जोर दिया। इसके साथ ही देशों की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान होने का मुद्दा उठाया।
रूस: कज़ान में 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान का मुद्दा उठाया। विदेश मंत्री का फोकस सुरक्षा के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधारों पर भी रहा। भारत लंबे समय से यूएनएससी में सुधारों की मांग विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है। इस बार विदेश मंत्री जयशंकर ने फिर से ब्रिक्स में इस अहम मुद्दे की ओर विश्व का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा, “…हम एक अधिक न्यायसंगत वैश्विक व्यवस्था कैसे बना सकते हैं?
जयशंकर ने कहा कि इसके लिए सबसे पहले स्वतंत्र प्रकृति के प्लेटफ़ॉर्म को मज़बूत और विस्तारित करना होगा। विभिन्न डोमेन में विकल्पों को व्यापक बनाकर और उन पर अनावश्यक निर्भरता को कम करना पड़ेगा, जिनका लाभ उठाया जा सकता है। इसमें ब्रिक्स ग्लोबल साउथ के लिए एक अंतर बना सकता है….2) स्थापित संस्थानों और तंत्रों में सुधार करके, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी और गैर-स्थायी श्रेणियों में सुधार करके। इसी तरह बहुपक्षीय विकास बैंक मे सुधार करके, जिनकी कार्य प्रक्रियाएँ संयुक्त राष्ट्र की तरह ही पुरानी हैं।

भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान सुधारों का दिया उदाहरण
भारत ने सुधारों के लिए जी-20 की अध्यक्षता का उदाहरण दिया। जयशंकर ने कहा कि भारत ने अपने जी20 प्रेसीडेंसी के दौरान एक प्रयास शुरू किया और हमें यह देखकर खुशी हुई कि ब्राज़ील ने इसे आगे बढ़ाया….3) अधिक उत्पादन केंद्र बनाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था का लोकतंत्रीकरण करके…4) वैश्विक बुनियादी ढाँचे में विकृतियों को ठीक करके जो औपनिवेशिक युग से विरासत में मिली हैं। दुनिया को अधिक कनेक्टिविटी विकल्पों की आवश्यकता है जो रसद को बढ़ाएं और जोखिमों को कम करें। यह एक सामूहिक प्रयास होना चाहिए, जिसमें क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान हो….5)अनुभवों और नई पहलों को साझा करके।” इस प्रकार वैश्विक न्याय व्यवस्था का नया प्रारूप तैयार किया जा सकता है।

संघर्षों और तनावों को दूर करने पर जोर
विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा, “संघर्षों और तनावों को प्रभावी ढंग से संबोधित करना आज की विशेष आवश्यकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया है कि यह युद्ध का युग नहीं है। जयशंकर ने कहा, “…हम इस विरोधाभास का सामना कर रहे हैं कि परिवर्तन की ताकतें आगे बढ़ने के बावजूद कुछ पुराने मुद्दे और भी जटिल हो गए हैं। एक ओर, उत्पादन और उपभोग में लगातार विविधता आ रही है। उपनिवेशवाद से स्वतंत्रता प्राप्त करने वाले राष्ट्रों ने अपने विकास और सामाजिक-आर्थिक प्रगति को गति दी है। नई क्षमताएं उभरी हैं, जिससे अधिक प्रतिभाओं का इस्तेमाल आसान हुआ है। यह आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक पुनर्संतुलन अब उस बिंदु पर पहुंच गया है, जहां हम बहु-ध्रुवीयता पर विचार कर सकते हैं।

‘वाह रे कांग्रेस, सीता राम केशरी जी के बाद खड़गे जी’; वायरल वीडियो पर गिरिराज सिंह की प्रतिक्रिया

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गिरिराज सिंह ने अपनी पोस्ट में सीता राम केसरी का जिक्र किया है, जिन्हें 1998 में जबरन कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाया गया था। इस दौरान उनकी बहुत बेज्जती की गई थी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के वायरल वीडियो पर बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सीता राम केसरी के बाद मल्लिकार्जुन खरगे के साथ कांग्रेस ने अपमानजनक व्यवहार किया है। इस घटना को लेकर उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए निशाना साधा। गिरिराज सिंह ने खरगे का वीडियो शेयर करते हुए लिखा “वाह रे कांग्रेस, सीता राम केशरी जी के बाद खड़गे जी।
वायरल वीडियो वायनाड के कलेक्टर ऑफिस का है। यहां प्रियंका गांधी नामांकन के लिए पहुंची थीं। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता थे। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी उनके साथ पहुंचे थे। हालांकि, नामांकन के दौरान खरगे को कलेक्टर के कमरे के अंदर नहीं घुसने दिया गया। वह दरवाजे के बाहर से झांक रहे थे। इसी दौरान किसी ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया, जो वायरल हो रहा है।
खरगे की घटना को सीता राम केसरी से क्यों जोड़ रहे गिरिराज
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और वह दिग्गज दलित नेता भी हैं। इससे पहले सीता राम केसरी कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं, जो स्वतंत्रता सेनानी और दिग्गज दलित नेता थे। उनके कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बनने के बाद लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। ऐसे में सभी बड़े नेताओं ने उनसे यह पद छोड़ने की मांग की थी। सभी नेता चाहते थे कि सोनिया गांधी यह जिम्मेदारी लें। हालांकि, सीता राम केसरी ने यह पद छोड़ने से मना कर दिया था। 1998 में उन्हें बहुत बेइज्जत करके अध्यक्ष के पद से हटाया गया था। कहा जाता है कि कांग्रेस कार्यालय में नारों के बीच उन्हें अपशब्द भी कहे गए थे। इसके बाद सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं थीं और आधिकारिक पत्र में पद छोड़ने के लिए सीता राम केसरी की खूब सराहना की गई थी।

बीजेपी साध रही निशाना
भारतीय जनता पार्टी खरगे की घटना को सीता राम केसरी से जोड़कर गांधी परिवार पर निशाना साध रही है। बीजेपी का कहना है कि खरगे गांधी परिवार से नहीं हैं, इस वजह से उन्हें पार्टी का अध्यक्ष होने के बावजूद कमरे के अंदर नहीं जाने दिया गया। वहीं, कुछ नेताओं का कहना है कि कांग्रेस हमेशा से ही दलित नेताओं का अपमान करती रही है। सीता राम केसरी के बार खरगे के साथ अपमानजनक व्यवहार हो रहा है।

मध्य प्रदेश के जबलपुर एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी, मचा हड़कंप, पुलिस ने दर्ज की FIR

जबलपुर: देश के कई हवाई अड्डों और विमानों को बम से उड़ाने की धमकियों के बीच जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट को भी बम से उड़ाने की धमकी मिली है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुख्यालय को एक मेल के माध्यम से डुमना एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की तरफ से मिले इनपुट पर जबलपुर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने दर्ज कराई एफआईआर

एयरपोर्ट अथॉरिटी की शिकायत पर खमरिया पुलिस थाने में यह एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में जुटी है। डीएसपी आकांक्षा उपाध्याय ने बताया कि इस मामले की जांच की जा रही है और अज्ञात आरोपियों की तलाश की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को प्राथमिकता से देख रही हैं।

जांच में एयरपोर्ट पर कुछ नहीं मिला

धमकी मिलने के बाद डुमना एयरपोर्ट परिसर और अंदर की जांच की गई, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु नहीं मिली है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस समय हवाई अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा बनाए हुए हैं और अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। बीते 7 दिनों में देश की विभिन्न एयरलाइंस को लगभग 90 बम धमकियां मिल चुकी हैं। जिससे हवाई सुरक्षा एजेंसियों और एयरलाइंस पर भारी दबाव बढ़ा है। इन धमकियों के कारण विमानों की जल्द से जल्द लैंडिंग कराकर गहन जांच की जा रही है, जिसके चलते एयरलाइंस को अब तक करीब 427 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

हर विमान को मिल रही धमकी के बाद उसे सुरक्षित स्थान पर उतारना पड़ता है और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत पूरे विमान की जांच होती है। इस प्रक्रिया में प्रति उड़ान 2 से 3 करोड़ रुपये का खर्च आता है, जो कि एयरलाइंस के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन रहा है।

मध्य प्रदेश में इंडी अलायंस में फूट, सपा ने कांग्रेस के खिलाफ इस विधानसभा सीट से उतारा अपना उम्मीदवार

एमपी में दो सीटों पर उपचुनाव होने हैं। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने गठबंधन धर्म के तहत कांग्रेस से दो में से एक सीट मांगी थी लेकिन बात नहीं बनी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ कई दौर की चर्चा के बाद भी कांग्रेस की तरफ से कोई सहमति नहीं बनी।
मध्य प्रदेश की दो विधानसभा सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की फूट सामने आ गई है। मध्य प्रदेश के बुधनी और विजयपुर विधानसभा में 13 नवंबर को चुनाव होने जा रहे हैं। जिसमें कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे से खाली हुई बुधनी विधानसभा सीट के उपचुनाव में राजकुमार पटेल को तो वहीं, विजयपुर सीट से मुकेश मल्होत्रा को चुनावी मैदान में उतारा है।
उपचुनाव वाले दोनों सीटों पर कांग्रेस ने उतारे अपने उम्मीदवार
इन्हीं दो सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार घोषित करने से समाजवादी पार्टी नाराज है। दरअसल, समाजवादी पार्टी ने दो सीटों पर होने वाले उपचुनाव में से कांग्रेस से एक सीट मांगी थी। इन सीटों पर प्रत्याशी के चयन के लिए बाकायदा मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, सज्जन वर्मा, अरुण यादव समेत समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव भी मौजूद रहे। कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को आश्वस्त किया था कि पार्टी आला कमान से बातचीत के बाद वह अपना निर्णय बताएंगे लेकिन कांग्रेस ने बिना समाजवादी पार्टी को भरोसे में लिए, दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने भी 24 घंटे के अंदर बुधनी सीट से अपना प्रत्याशी उतार कर कांग्रेस को बड़ा झटका दे दिया। इस सीट से समाजवादी पार्टी ने एक दिन पहले ही कांग्रेस से इस्तीफा देकर आए अर्जुन राय को अपना प्रत्याशी बनाया है।

सपा ने एक सीट पर मांगा था टिकट लेकिन वो भी नहीं हो पाया कांग्रेस से
दरअसल, किसान नेता के तौर पर पहचाने जाने वाले अर्जुन राय कांग्रेस में प्रदेश सचिव रहे हैं और लंबे समय से विधानसभा चुनाव में टिकट मांग रहे थे। लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो नाराज होकर उन्होंने समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर ली। अर्जुन राय 2018 में भी समाजवादी पार्टी में थे। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता यश भारती ने इंडिया टीवी से बात करते हुए कहा की अर्जुन आर्य ने 14 अक्टूबर को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से बात कर पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई। जिसके बाद उन्हें पार्टी में शामिल किया गया। यश ने यह भी कहा कि कई दौर की बातचीत के बावजूद कांग्रेस ने दो में से एक सीट गठबंधन धर्म के तहत उन्हें नहीं दी। यश भारती ने कहा कांग्रेस अपनी हार से सबक नहीं लेती है चाहे हार हरियाणा की हो या 2023 की मध्य प्रदेश चुनावों की। कांग्रेस ऐसी पार्टी है जो सहयोगियों से सहयोग नहीं लेना चाहती और सहयोग देना भी नहीं चाहती है।