Wednesday, July 8, 2026
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प्यार की सजा: प्रेम संबंध से नाराज परिवार व ग्रामीणों ने युवक को गांव से निकाला, दर-दर भटकने को मजबूर

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औरंगाबाद (बिहार)।
जिले के हसपुरा थाना क्षेत्र के कमलपुर दुर्गापुर गांव में प्रेम संबंध को लेकर एक युवक को कथित तौर पर गांव से बाहर निकाल देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित सन्न्य कुमार शेखर, पिता विजय सिंह, निवासी कमलपुर दुर्गापुर, पोस्ट-खुटाहन, ने आरोप लगाया है कि गांव की ही युवती प्रीति से प्रेम संबंध होने के कारण उसे सामाजिक और पारिवारिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

पीड़ित के अनुसार वर्ष 2023 में दोनों के बीच दोस्ती हुई थी, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। युवक का कहना है कि दोनों ने साथ जीवन बिताने का वादा किया था और एक-दूसरे के घर आना-जाना भी होता था। इस बीच उसने प्रीति को कई बार मोबाइल फोन खरीदकर दिया, लेकिन हर बार उसके परिजनों ने वह फोन छीन लिया। हाल ही में दिया गया मोबाइल भी परिवार वालों ने अपने कब्जे में ले लिया।

मीडिया से बातचीत में सन्न्य कुमार ने बताया कि करीब एक माह पूर्व प्रीति ने ही उसे फोन कर मिलने के लिए बुलाया था। उस समय वह चेन्नई में काम कर रहा था। युवक का दावा है कि प्रीति ने कहा था कि काफी दिनों से मुलाकात नहीं हुई है और उसे गांव आने को कहा। इसके बाद जब वह गांव लौटा तो विवाद और बढ़ गया।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि लगभग एक वर्ष पहले भी युवती के भाई और परिजनों ने उसके साथ मारपीट की थी, लेकिन उसने सामाजिक प्रतिष्ठा के कारण चुप्पी साध ली। अब चार दिन पहले गांव में दोनों परिवारों और कुछ ग्रामीणों के बीच बैठक हुई, जिसमें कथित तौर पर उसके पिता से कहा गया कि उनका बेटा गांव में दिखाई नहीं देना चाहिए। इसके बाद उस पर लगातार दबाव बनाया जाने लगा और अंततः उसे गांव छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया।

युवक फिलहाल रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए है और खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। उसने स्थानीय थाना में आवेदन देकर सुरक्षा और न्याय की मांग की है, लेकिन उसका आरोप है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

दूसरी ओर, युवक का कहना है कि प्रीति पर भी उसके परिवार द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिससे वह खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रही है। गांव में इस मामले को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है और सामाजिक प्रतिष्ठा के नाम पर दोनों परिवारों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।

अब सबकी नजर पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि क्या युवक को सुरक्षा और न्याय मिल पाएगा या प्रेम संबंध की यह कहानी सामाजिक दबाव के आगे यूं ही दबा दी जाएगी।

अंत्येष्टि में गया परिवार, पीछे से ज्वेलरी शॉप साफ: 25-30 लाख की चोरी का दावा; CCTV बंद कर DVR भी ले गए

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ग्वालियर/जालौन।
अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल होने गए परिवार के घर और ज्वेलरी दुकान में लाखों की चोरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। फरियादी शशिकांत सोनी पुत्र उमाचरण सोनी (उम्र 30 वर्ष) निवासी ग्राम पण्डोखर ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए बताया कि 17 फरवरी को वे अपनी पत्नी मोहिनी सोनी, बड़े भाई विनोद सोनी, भाभी बिन्दु सोनी तथा अन्य परिजनों के साथ मामा ससुर पंकज सोनी निवासी सहाओ, जिला जालौन (उ.प्र.) की अंत्येष्टि में शामिल होने गए थे। घर और दुकान पर ताला लगाकर सभी सुबह करीब 10 बजे निकले थे।

शिकायत के अनुसार, रात करीब 12:40 बजे उनकी पत्नी ने मोबाइल से घर और दुकान में लगे कैमरे चेक किए तो वे चालू थे, लेकिन करीब 3 बजे कैमरे बंद दिखाई दिए। सुबह 18 फरवरी को करीब 10:15 बजे जब परिवार लौटा तो मकान-दुकान का मुख्य गेट खुला मिला। अंदर जाकर देखा तो दुकान का काउंटर टूटा पड़ा था और उसमें रखे चांदी के जेवर—पायल, बेल्ट, बिछिया, अंगूठी, मीना—करीब डेढ़ से दो किलो वजन के गायब थे। सोने-चांदी के अन्य जेवर जो लॉकर में थे, वे सुरक्षित मिले।

पीड़ित के मुताबिक तलघर के कमरे का गेट और अलमारी की स्लाइड टूटी मिली। वहां रखे सोने के गहने—शॉर्ट हार, जोधा हार, लॉन्ग हार, मंगलसूत्र, अंगूठियां, झुमकी, कंगन, चूड़ियां, जंजीर समेत पुराने इस्तेमाली गहने और नकदी भी गायब थी। साथ ही पत्नी के सोने-चांदी के गहने और 30 से 40 हजार रुपये नगद भी नहीं मिले। चोर CCTV का DVR और वाई-फाई राउटर भी साथ ले गए।

मीडिया से बातचीत में आकाश सोनी ने बताया कि उनकी ज्वेलरी शॉप ‘बालाजी ज्वेलरी’ पण्डोखर धाम में मुख्य सड़क पर स्थित है। हैरानी की बात यह है कि दुकान मेन रोड पर होने के बावजूद चोर बेखौफ होकर मुख्य गेट से अंदर घुसे और वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। उन्होंने बताया कि थाने से दुकान सिर्फ 500 मीटर दूरी पर है, इसके बावजूद इतनी बड़ी चोरी हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

आकाश सोनी का दावा है कि कुल मिलाकर 25 से 30 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में चोरी की रकम कम दर्शाई गई है, जबकि वास्तविक नुकसान कहीं अधिक है। उन्होंने थाने में तहरीर के साथ आपत्ति पत्र भी दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया है।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते मामले को गंभीरता से लिया जाए, ताकि चोरी हुए सामान की बरामदगी हो सके और क्षेत्र में व्यापारियों के बीच फैली दहशत खत्म हो। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

पारिवारिक बंटवारे के बाद कर्ज, मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप

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मधुबनी | बहुअवा–हरियरी क्षेत्र
बिहार के मधुबनी जिले के फूलपरास थाना अंतर्गत पंचायत धनोजा के ग्राम हरियरी से पारिवारिक विवाद का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित सरोज कुमार चौपाल ने अपने ही परिजनों पर धोखाधड़ी, मारपीट और हथियार के बल पर धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़ित के अनुसार, वे अपनी पत्नी और बेटी के साथ रहते हैं। परिवार से सहयोग न मिलने के कारण कर्ज लेकर तथा अपने हिस्से की जमीन गिरवी रखकर एक कमरे का घर बनवाया और शादी की। आरोप है कि शादी से पहले पिता के कहने पर भाई विजय को पढ़ाई के नाम पर कुल 60 हजार रुपये (45 हजार + 15 हजार) दिए गए। बाद में जब रकम वापस मांगी गई तो उनके साथ मारपीट और विवाद हुआ, जिसके बाद वे रोज़गार के लिए दिल्ली चले गए।
सरोज का कहना है कि करीब दो साल बाद मां-पिता और भाई मनोज के कहने पर वे घर बनाने के लिए लौटे। निर्माण के दौरान दिए गए पैसों का हिसाब मांगने पर हेराफेरी सामने आई। इसी बीच भाई मनोज ने मारपीट की और कथित तौर पर बंदूक तानकर जान से मारने की धमकी दी। ग्रामीणों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। पीड़ित ने तत्काल टोल-फ्री नंबर 9431602301 पर और डीजीपी के व्यक्तिगत नंबर पर कॉल कर सूचना दी, जिसके बाद फूलपरास थाना से बात कराई गई। आरोप है कि इसे “पारिवारिक मामला” बताकर सरपंच के पास भेज दिया गया।
सरपंच के यहां तय तारीख से पहले ही मनोज दिल्ली भाग गया। कुछ महीनों बाद लौटने पर दोबारा पंचायत हुई, जिसमें केवल पैसों का हिसाब रखा गया। पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने हथियार थाने में जमा कराने की मांग की, लेकिन बंदूक अब भी मनोज के पास है।
हाल ही में सरोज और उनकी पत्नी के साथ मनोज, ओमशंकर तथा सुलेखा देवी, सुनीता देवी, सीता देवी, बबीता कुमारी और निर्मला देवी द्वारा मिलकर मारपीट किए जाने का आरोप है। पीड़ित के पास घटना का वीडियो होने का दावा भी किया गया है।
पीड़ित ने जिला प्रशासन और पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच, हथियार की तत्काल जब्ती, परिवार को सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बिहार के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है।

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बिहार के उन्नाव जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां एक 19 वर्षीय गर्भवती महिला बीते कई दिनों से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता है। परिजन उसकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका है।

मिली जानकारी के अनुसार अजय कुमार ने सूचना दी है कि उनकी पत्नी सविता कुमारी 5 फरवरी की सुबह करीब 6 बजे बिना किसी को बताए घर से कहीं चली गईं। सविता जी चॉकलेटी कलर की डिजाइनर साड़ी पहन के निकली है परिजनों के अनुसार सविता की मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक नहीं थी और वह गर्भवती भी हैं। ऐसे में परिवार की चिंता और बढ़ गई है। घर से निकलने के बाद से अब तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है।

परिजनों ने बताया कि सविता कुमारी की लंबाई करीब एक मीटर से कुछ अधिक है। परिवार ने आसपास के गांवों और रिश्तेदारों के यहां काफी खोजबीन की, लेकिन कहीं से भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली। घटना के बाद से घर में मातम जैसा माहौल है। पति अजय कुमार और अन्य परिजन बेहद परेशान हैं और दिन-रात उनकी सलामती की दुआ कर रहे हैं।

परिवार ने आम लोगों से अपील की है कि यदि किसी को भी सविता कुमारी के बारे में कोई जानकारी मिले तो तुरंत मोबाइल नंबर 9876915904 पर संपर्क करें। सूचना देने वाले व्यक्ति को 10000 रुपये का इनाम देने की घोषणा भी की गई है।

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर चर्चा है। गर्भवती महिला के इस तरह अचानक लापता हो जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। परिजन प्रशासन से भी मदद की गुहार लगा रहे हैं ताकि जल्द से जल्द सविता कुमारी को सकुशल खोजा जा सके। फिलहाल पूरा परिवार उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद में हर संभव प्रयास कर रहा है।

बीच समंदर में पवन हंस हेलीकॉप्टर की कराई गई इमरजेंसी लैंडिंग, 5 लोग सुरक्षित

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पोर्ट ब्लेयर से मायाबंदर जा रहे पवन हंस हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग बीच समंदर में कराई गई। हेलीकॉप्टर को पानी से निकालने की कोशिश की जा रही है।अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से मायाबंदर जा रहे पवन हंस हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग बीच समंदर में कराई गई। राहत की बात यह है कि इस घटना में हेलीकॉप्टर में सवार 2 क्रू मेंबर और 3 पैसेंजर सुरक्षित हैं। हेलीकॉप्टर को पानी से निकालने की कोशिश की जा रही है।

पवन हंस भारत की सबसे बड़ी सरकारी हेलीकॉप्टर कंपनी है। इसे आप आसमान की बस सेवा समझ सकते हैं, जो उन जगहों पर जाती है, जहां ट्रेन या बड़े हवाई जहाज नहीं पहुंच पाते। इसकी स्थापना 1985 में हुई थी और इसका मुख्य काम देश के कठिन रास्तों वाले इलाकों को जोड़ना है।

यह कंपनी मुख्य रूप से तीन बड़े काम करती है-
पहला, यह समुद्र के बीच बने तेल के कुओं (जैसे ONGC के प्लेटफार्म) पर कर्मचारियों को पहुंचाती है।
दूसरा, यह पहाड़ों और द्वीपों, जैसे अंडमान-निकोबार और उत्तर-पूर्वी राज्यों में लोगों के आने-जाने का सहारा बनती है।
तीसरा, यह केदारनाथ और माता वैष्णो देवी जैसी मुश्किल धार्मिक यात्राओं के लिए हेलीकॉप्टर सेवा देती है।
पवन हंस के पास लगभग 40 से ज्यादा हेलीकॉप्टर हैं और इसका मुख्यालय नोएडा में है। अंडमान जैसे इलाकों में इसे वहां की ‘जीवनरेखा’ कहा जाता है, क्योंकि यह द्वीपों के बीच सफर को बहुत आसान और छोटा बना देती है।

स्पाइसजेट फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग
वहीं, स्पाइसजेट की दिल्ली-लेह फ्लाइट में उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण विमान को लेह जाने के बजाय वापस दिल्ली एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। विमान के इंजन नंबर 2 में खराबी आने के कारण यह इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। इस विमान में करीब 150 यात्री सवार थे।

‘रामायण’ की मंथरा की आपबीती, एक थप्पड़ ने चकनाचूर किया हीरोइन बनने का सपना, फट गई आंख की नस, मार गया लकवा

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‘रामायण’ में मंथरा का किरदार निभाकर घर-घर में मशहूर हुईं ललिता पवार ने 9 साल की उम्र में मूक फिल्मों से अभिनय की शुरुआत की थी। फिल्मों में हीरोइन बनने की चाहत रखने वालीं ललिता पवार फिल्मों में हीरोइन बनना चाहती थीं, लेकिन एक थप्पड़ ने उनका सपना चकनाचूर कर दिया।बॉलीवुड में कुछ ऐसे दमदार कलाकार हैं, जिन्हें उनके नाम से ज्यादा किरदारों के लिए याद किया जाता है। ललिता पवार भी इन्हीं कलाकारों में से एक थीं। ललिता पवार इतनी दमदार अभिनेत्री थीं कि जिस भी फिल्म में होतीं, अपने अभिनय की छाप छोड़ देतीं। दर्शक कुछ भी भूल जाएं, लेकिन उन्हें नहीं भूल पाते थे। बड़े पर्दे पर तो उन्होंने अत्याचारी सास बनकर खूब सुर्खियां बटोरीं, लेकिन सभी किरदारों पर ‘रामायण’ में निभाया मंथरा का किरदार भारी पड़ गया। रामानंद सागर की रामायण में उन्होंने ये किरदार ऐसी शिद्दत से निभाया कि दर्शक उन्हें असल में ऐसी ही नजरों से देखने लगे, जैसे वह सच में मंथरा हों। मंथरा कभी फिल्मों में हीरोइन बनने की चाहत लेकर आई थीं, लेकिन एक थप्पड़ के साथ उनका सपना भी धराशायी हो गया। चलिए आपको इस पूरी घटना के बारे में बताते हैं।हीरोइन बनना चाहती थीं ललिता पवार
ललिता पवार ने मात्र 9 साल की उम्र में अभिनय करियर की शुरुआत कर दी थी। 1916 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में जन्मीं ललिता पवार का असली नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन था और उनके पिता पेशे से रेशम के व्यापारी थे। वहीं उनकी मां घर संभालती थीं। ललिता पवार को बचपन से ही अभिनय का शौक था, वह हीरोइन बनना चाहती थीं और उनकी प्रतिभा को देखते हुए उनके पिता ने भी उन्हें फिल्मों की दुनिया में कदम रखने की इजाजत दे दी।

9 साल की उम्र में किया डेब्यू
ललिता पवार तब सिर्फ 9 साल की थीं, जब पहली फिल्म ‘राजा हरिशचंद्र’ में काम किया। ये फिल्म 1928 में रिलीज हुई थी। ये उस समय की बात है जब भारत में मूक फिल्में बना करती थीं। ललिता पवार ने 9 साल की छोटी उम्र में ही साबित कर दिया था कि उनमें अभिनय कला कूट-कूटकर भरी है। उन्होंने बतौर बाल कलाकार कई फिल्मों में काम किया और समय के साथ हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बन गईं।

एक थप्पड़ ने बदल दी जिंदगी
ललिता पवार सिनेमा की दुनिया की बड़ी हीरोइन बनना चाहती थीं, लेकिन 1942 में एक थप्पड़ ने सब उलट-पुलट कर दिया। ललिता पवार ‘जंग-ए-आजादी’ की शूटिंग कर रही थीं, तभी एक सीन में को-एक्टर ने उन्हें थप्पड़ मारा। थप्पड़ इतना जोर का था कि वह ललिता पवार धड़ाम से फर्श में गिर गईं। उनकी आंख की नस फट गई और शरीर के एक हिस्से को लकवा मार गया। इस हादसे के बाद वह कई साल फिल्मों से दूर रहीं और फिर खुद को नई किरदारों में ढालकर वापसी की।

हीरोइन बनने का सपना टूटा तो बन गईं विलेन
1942 में फिल्म के सेट पर घटी घटना के बाद ललिता पवार का चेहरा पूरी तरह बदल गया। चेहरे के भी एक तरफ के हिस्से पर काफी प्रभाव पड़ा। ऐसे में उन्होंने हीरोइन नने की चाहत छोड़ दी और खुद को खलनायिका के किरदार के लिए तैयार किया। रामानंद सागर की ‘रामायण’ में मंथरा का किरदार निभाकर तो वह घर-घर में फेमस हो गईं। ललिता पवार ने अपने करियर में 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। हिंदी ही नहीं मराठी और गुजराती फिल्मों में भी अपने अभिनय की छाप छोड़ी और एक अलग पहचान बनाई। लेकिन, जिंदगी के आखिरी दिन भी उनके लिए कम मुश्किलों भरे नहीं रहे। 1998 में उन्होंने मुंह के कैंसर के चलते इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

पत्नी, ससुराल और मायके पक्ष पर मारपीट का आरोप: मां-बेटे ने थाना पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

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औरंगाबाद (बिहार)।
जिले के खुदवाँ थाना क्षेत्र से पारिवारिक विवाद का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने बहू और उसके मायके पक्ष पर गंभीर मारपीट का आरोप लगाया है। पीड़िता कांति देवी, पति जर्नादन तिवारी, ग्राम चंदा की निवासी हैं। उन्होंने थाना में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनके साथ उनकी बहू रुक्मणी कुमारी और उसके मायके पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों से मारपीट की, जिससे उन्हें सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं और काफी रक्तस्राव हुआ।

कांति देवी के आवेदन के अनुसार, घटना उस समय हुई जब वे अपनी बहू को उसके मायके छोड़ने गई थीं। आरोप है कि वहां पहले से मौजूद सुरेंद्र दुबे (स्व. नंद किशोर दुबे के पुत्र), लक्ष्मी देवी (पत्नी सुरेंद्र दुबे), रोहिणी उर्फ हुनु ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। पीड़िता का कहना है कि लाठी के प्रहार से वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्होंने पुलिस से भविष्य में सुरक्षा की मांग की है ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो।

इधर, कांति देवी के पुत्र धीरज कुमार तिवारी ने भी पत्नी रुक्मणी कुमारी पर लगातार प्रताड़ना और मारपीट का आरोप लगाया है। धीरज के अनुसार उनकी शादी को 13 वर्ष हो चुके हैं और उनके दो पुत्र हैं—पंकज (उम्र करीब 12 वर्ष) और दूसरा बेटा (उम्र करीब 10 वर्ष)। उनका कहना है कि शादी के बाद से ही पारिवारिक कलह जारी है और पत्नी अक्सर अपने मायके पक्ष के लोगों को बुलाकर उनके साथ मारपीट करवाती है।

धीरज कुमार ने बताया कि वे पटना के गर्दनीबाग क्षेत्र में प्राइवेट नौकरी करते हैं और पत्नी को वहीं अपने साथ रखते थे। आरोप है कि 20 और 21 फरवरी को उनके साथ गंभीर मारपीट की गई। 21 फरवरी को वे बाबू मोहन क्षेत्र स्थित पत्नी के मायके पहुंचे, जहां उनके साथ दोबारा मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले उनकी मां कांति देवी के साथ भी मारपीट की घटना हो चुकी है, जिसकी शिकायत थाने में दर्ज है।

मामले को लेकर स्थानीय थाना पुलिस ने आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चल रहा पारिवारिक विवाद अब हिंसक रूप ले चुका है। पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

 

सार्वजनिक रास्ते पर कब्जे और पानी विवाद से बढ़ा तनाव, पुलिस-प्रशासन की समझाइश भी बेअसर

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लालगंज/प्रतापगढ़। तहसील लालगंज क्षेत्र के ग्राम उमरोडा में सार्वजनिक रास्ते पर कथित अतिक्रमण और नल का पानी खोलकर रास्ता बाधित करने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित ग्रामीण ने उपजिलाधिकारी से शिकायत कर रास्ते को अवैध कब्जे से मुक्त कराने तथा आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

ग्राम उमरोडा निवासी वीरेन्द्र कुमार कोरी पुत्र राम सजावन कोरी ने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उसके घर तक पहुंचने के लिए गांव में केवल एक ही सार्वजनिक रास्ता है। आरोप है कि गांव के ही छोटे लाल तिवारी पुत्र स्व. तिवारी, रामपाल गौतम पुत्र गुना तथा शंकर लाल ने उक्त रास्ते पर पेड़ लगाकर और अन्य अवरोध खड़े कर दिए हैं। साथ ही, कथित रूप से रास्ते के समीप नल का पानी खोल दिया गया, जिससे मार्ग पर कीचड़ और जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

पीड़ित का कहना है कि इस अवरोध के कारण उसके परिवार को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। विशेषकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विरोध करने पर आरोपियों द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए दबंगई दिखाने और धमकाने का भी आरोप लगाया गया है।

वीरेन्द्र कुमार कोरी ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत थाने में दर्ज कराई थी, जिसके बाद दरोगा मौके पर पहुंचे। हालांकि, आरोप है कि आरोपियों ने पुलिस की बात भी नहीं मानी। गांव के प्रधान और अन्य ग्रामीण भी समझाने के लिए मौके पर पहुंचे, लेकिन संबंधित लोग किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हुए।

ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक रास्ते पर इस प्रकार का कब्जा गैरकानूनी है और इससे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि मौके की निष्पक्ष जांच कर रास्ते से अवरोध हटवाया जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

उपजिलाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शिकायत प्राप्त हुई है और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण पाया गया तो नियमानुसार उसे हटाया जाएगा।

फिलहाल गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

बेंगलुरु में बिहार के मजदूर से ठेकेदार की दबंगई: 2 महीने की मजदूरी रोकी, पत्नी से छेड़छाड़ का आरोप, विरोध करने पर मारपीट

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खगड़िया/बेंगलुरु। बिहार के खगड़िया जिले के प्रभुता थाना क्षेत्र निवासी 25 वर्षीय मोहम्मद कयूम के साथ बेंगलुरु में काम के दौरान गंभीर अन्याय का मामला सामने आया है। करीब 13 वर्षों से बेंगलुरु की एक नारियल फैक्ट्री में कार्यरत कयूम ने कभी किसी प्रकार की शिकायत का सामना नहीं किया, लेकिन अब उन्हीं के ठेकेदार मोहम्मद नूर पर वेतन रोकने, पत्नी से छेड़छाड़ और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है।

जानकारी के अनुसार, मोहम्मद कयूम पिछले दो महीनों से अपने ठेकेदार मोहम्मद नूर के अधीन कार्य कर रहे थे, लेकिन उन्हें लगातार दो माह का भुगतान नहीं दिया गया। आर्थिक तंगी के बीच कयूम अपने परिवार को भी बेंगलुरु ले आए थे, ताकि साथ रहकर जीवन यापन कर सकें। इसी दौरान ठेकेदार पर कयूम की पत्नी के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा है।

पीड़ित का आरोप है कि मोहम्मद नूर ने मोबाइल नंबर लेने के बहाने उनकी पत्नी का हाथ पकड़ लिया और छेड़छाड़ की। जब कयूम ने इस हरकत का विरोध किया और ठेकेदार से इस संबंध में बात की, तो मामला और बिगड़ गया। आरोप है कि मोहम्मद नूर पांच-छह लोगों के साथ मौके पर पहुंचा और कयूम व उनकी पत्नी के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद दोनों दहशत में हैं।

पीड़ित परिवार का कहना है कि वे न्याय की उम्मीद में स्थानीय थाने पहुंचे, लेकिन वहां उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। दो महीने की बकाया मजदूरी अब तक नहीं दी गई है, जिससे परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है।

मामले ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि अगर एक मजदूर 13 साल तक ईमानदारी से काम करता है, तो क्या उसे अपने ही कार्यस्थल पर सुरक्षा और सम्मान नहीं मिलना चाहिए? अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिलता है।

 

भारत और कनाडा फिर से बनेंगे पक्के दोस्त, प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पीएम मोदी से मिलने आ रहे नई दिल्ली

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ट्रेड वार में अमेरिका का सामना करने के लिए कनाडा को भारत जैसे सहयोगी की जरूरत है। लिहाजा कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी अब पीएम मोदी के साथ अपनी दोस्ती को और मजबूत करना चाहते हैं। वह 26 फरवरी को नई दिल्ली आ रहे हैं।टोरंटो: भारत और कनाडा अब फिर से दोस्ती की नई इबारत लिखने वाले हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के सत्ता में आने के बाद से ही भारत के साथ संबंधों में तेजी से सुधार आया है। अब कनाडाई प्रधानमंत्री भारत की यात्रा पर आने वाले हैं। इस दौरान वह पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे और अहम द्विपक्षीय वार्ताएं होंगे। दोनों नेता भारत-कनाडा के रिश्तों को पहले से अधिक मजूबत करने की प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

पीएम कार्नी के कार्यालय के अनुसार उनकी यह भारत यात्रा कनाडा की अमेरिका से व्यापार विविधीकरण की नवीनतम कोशिश है। अपनी इस यात्रा के क्रम में कार्नी सबसे पहले गुरुवार को मुंबई जाएंगे, जहां वे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्यवसायिक नेताओं से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया और जापान की यात्रा पर जाएंगे। वह कैनबरा में ठहराव के दौरान ऑस्ट्रेलिया की संसद के दोनों सदनों को संबोधित करेंगे, जो पिछले 20 वर्षों में किसी कनाडाई प्रधानमंत्री द्वारा ऐसा करने का पहला मौका होगा। साथ ही वे ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से भी मिलेंगे और रक्षा तथा एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) प्रगति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद कार्नी टोक्यो जाएंगे, जहां वे जापान की प्रधानमंत्री तकाइची सनाए से मिलेंगे और स्वच्छ ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स तथा खाद्य सुरक्षा पर चर्चा करेंगे।

अमेरिका को टक्कर देने के लिए कनाडा को चाहिए भारत का साथ
अमेरिका को टक्कर देने के लिए कनाडा को भारत जैसे सहयोगियों की जरूरत महसूस हो रही है। कनाडा अब भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहता है। एक अनिश्चित दुनिया में अब कनाडा उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। कार्नी ने एक बयान में कहा कि हम अपने व्यापार को विविधीकृत कर रहे हैं और बड़े पैमाने पर नया निवेश आकर्षित कर रहे हैं। कार्नी ने अगले दशक में कनाडा के गैर-अमेरिकी निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी टैरिफ निवेश को मंद कर रहे हैं।

अमेरिका ने दी है कनाडा को धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा की अर्थव्यवस्था और संप्रभुता पर टैरिफ के माध्यम से धमकी दी है। ट्रंप ने सबसे आक्रामक रूप से यह दावा किया है कि कनाडा अमेरिका का “51वां राज्य” हो सकता है। ट्रंप ने हाल ही में कनाडा के प्रस्तावित चीन व्यापार सौदे पर कनाडा से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिससे लंबे समय से अमेरिकी सहयोगी कनाडा और कार्नी के साथ विवाद तेज हो गया है। पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर, कार्नी ने बड़ी शक्तियों द्वारा छोटे देशों पर आर्थिक जबरदस्ती की निंदा की थी। प्रधानमंत्री कार्नी को उनके बयानों के लिए व्यापक प्रशंसा और ध्यान मिला, जहां उन्होंने ट्रंप को पीछे छोड़ दिया।

2 साल तनावपूर्ण संबंधों के बाद भारत-कनाडा अब नई राह पर
कनाडा और भारत ने पिछले साल दो वर्षों के तनावपूर्ण संबंधों के बाद व्यापार सौदे को आगे बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं। पहले भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। कनाडा और भारत के संबंध तब से तनावपूर्ण हैं, जब कनाडाई पुलिस ने न्यू दिल्ली पर वैंकूवर के पास जून 2023 में एक कनाडाई सिख कार्यकर्ता की हत्या में भूमिका निभाने का आरोप लगाया था।