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पत्नी, ससुराल और मायके पक्ष पर मारपीट का आरोप: मां-बेटे ने थाना पहुंचकर लगाई न्याय की गुहार

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औरंगाबाद (बिहार)।
जिले के खुदवाँ थाना क्षेत्र से पारिवारिक विवाद का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक परिवार ने बहू और उसके मायके पक्ष पर गंभीर मारपीट का आरोप लगाया है। पीड़िता कांति देवी, पति जर्नादन तिवारी, ग्राम चंदा की निवासी हैं। उन्होंने थाना में लिखित आवेदन देकर आरोप लगाया है कि उनके साथ उनकी बहू रुक्मणी कुमारी और उसके मायके पक्ष के लोगों ने लाठी-डंडों से मारपीट की, जिससे उन्हें सिर, हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं और काफी रक्तस्राव हुआ।

कांति देवी के आवेदन के अनुसार, घटना उस समय हुई जब वे अपनी बहू को उसके मायके छोड़ने गई थीं। आरोप है कि वहां पहले से मौजूद सुरेंद्र दुबे (स्व. नंद किशोर दुबे के पुत्र), लक्ष्मी देवी (पत्नी सुरेंद्र दुबे), रोहिणी उर्फ हुनु ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। पीड़िता का कहना है कि लाठी के प्रहार से वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्होंने पुलिस से भविष्य में सुरक्षा की मांग की है ताकि दोबारा ऐसी घटना न हो।

इधर, कांति देवी के पुत्र धीरज कुमार तिवारी ने भी पत्नी रुक्मणी कुमारी पर लगातार प्रताड़ना और मारपीट का आरोप लगाया है। धीरज के अनुसार उनकी शादी को 13 वर्ष हो चुके हैं और उनके दो पुत्र हैं—पंकज (उम्र करीब 12 वर्ष) और दूसरा बेटा (उम्र करीब 10 वर्ष)। उनका कहना है कि शादी के बाद से ही पारिवारिक कलह जारी है और पत्नी अक्सर अपने मायके पक्ष के लोगों को बुलाकर उनके साथ मारपीट करवाती है।

धीरज कुमार ने बताया कि वे पटना के गर्दनीबाग क्षेत्र में प्राइवेट नौकरी करते हैं और पत्नी को वहीं अपने साथ रखते थे। आरोप है कि 20 और 21 फरवरी को उनके साथ गंभीर मारपीट की गई। 21 फरवरी को वे बाबू मोहन क्षेत्र स्थित पत्नी के मायके पहुंचे, जहां उनके साथ दोबारा मारपीट की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले उनकी मां कांति देवी के साथ भी मारपीट की घटना हो चुकी है, जिसकी शिकायत थाने में दर्ज है।

मामले को लेकर स्थानीय थाना पुलिस ने आवेदन प्राप्त होने की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों के आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच तनाव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चल रहा पारिवारिक विवाद अब हिंसक रूप ले चुका है। पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।

 

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