प्रयागराज | नवाबगंज
प्रयागराज के थाना नवाबगंज से जुड़ा एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक रॉयल एनफील्ड बुलेट की चोरी, बरामदगी और स्वामित्व को लेकर पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मामला यह है कि एक ओर वाहन का पंजीकृत मालिक पुलिस आयुक्त से चोरी की FIR दर्ज कराने की गुहार लगा रहा है, तो दूसरी ओर उसी नंबर की बाइक थाना परिसर में संदिग्ध हालत में खड़ी बताई जा रही है, जिसे पुलिस लावारिस और चोरी की बताकर लौटाने से इंकार कर रही है।
माधवपुर चंदन उर्फ घाटमपुर, थाना नवाबगंज निवासी दिनेश पाल पुत्र शिवप्रसाद ने पुलिस आयुक्त प्रयागराज को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह रॉयल एनफील्ड बाइक संख्या UP 70 HN 9688 का पंजीकृत मालिक है। बाइक का इंजन नंबर J3A5FDS2045474 और चेसिस नंबर ME3J3C5FDS2018054 है। दिनेश पाल के अनुसार उनके भाई मुकेश पाल 28 जुलाई 2025 को कुरेसर रोड कौडियार बाजार सब्जी लेने गए थे। बाजार में सड़क किनारे बाइक खड़ी कर सब्जी लेने गए और लौटने पर बाइक वहां से गायब मिली। काफी खोजबीन के बाद भी बाइक नहीं मिली, जिसकी सूचना थाने को दी गई, लेकिन तीन महीने बीत जाने के बावजूद पुलिस ने चोरी का मुकदमा तक दर्ज नहीं किया
इसी बीच थाना नवाबगंज द्वारा माननीय ACJM कोर्ट नंबर–7, प्रयागराज को भेजी गई रिपोर्ट ने पूरे मामले को और उलझा दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहन संख्या UP 70 HN 9688 का मिलान करने पर उक्त नंबर की कोई बाइक थाना परिसर में मौजूद नहीं पाई गई। हालांकि थाना परिसर में रॉयल एनफील्ड बाइक खड़ी है, लेकिन उस पर नंबर प्लेट नहीं है और इंजन व चेसिस नंबर खुरचे हुए हैं, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि यह वही बाइक है या नहीं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि थाना परिसर में दो रॉयल एनफील्ड बुलेट खड़ी हैं, जिनमें से एक पर UP 70 FW 4621 नंबर अंकित है, जबकि दूसरी पूरी तरह बिना नंबर की है।
इस पूरे घटनाक्रम में दिनेश पाल ने बताया कि है कि जिस बाइक को लावारिस बताया है, उसके सभी वैध कागजात उनके पास मौजूद हैं, जिन्हें पुलिस को दिखाया भी गया। इसके बावजूद पुलिस यह कहकर बाइक नहीं दे रही कि “गाड़ी तुम्हारी नहीं है” और “यह चोरी की बाइक है।” दिनेश पाल का सवाल है कि अगर बाइक चोरी की है, तो उससे संबंधित FIR या शिकायत क्यों नहीं दिखाई जा रही।
11 अगस्त 2025 को बाइक को लावारिस घोषित कर दिया गया, जबकि पहले उस पर नंबर प्लेट मौजूद थी। अब न नंबर प्लेट है और न ही इंजन–चेसिस नंबर स्पष्ट हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि लगातार थाने के चक्कर लगाने के बावजूद न तो बाइक मिल रही है और न ही कोई ठोस जवाब।
पूरा मामला अब पुलिस की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड मिलान और थाने में रखी गई संदिग्ध गाड़ियों की निगरानी पर सवाल खड़े कर रहा है। एक तरफ पंजीकृत मालिक FIR के लिए दर-दर भटक रहा है, तो दूसरी तरफ थाना परिसर में खड़ी बाइक को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। पीड़ितों ने मीडिया के माध्यम से उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आए और उन्हें न्याय मिल सके।


