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धार की भोजशाला में विशेष हवन-पूजन का आयोजन, 700 साल बाद जलाई गई अखंड ज्योति

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धार स्थित भोजशाला में 23 साल बाद विशेष हवन-पूजन किया जा रहा है। यहां कोर्ट के आदेश के बाद 23 साल बाद महापूजा और महा सत्याग्रह किया जा रहा है।एमपी के धार में स्थित भोजशाला में हाईकोर्ट के फैसले के बाद आज विशेष हवन-पूजन का आयोजन किया जा रहा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। भोजशाला में सत्याग्रह और महापूजा 23 सालों बाद हो रही है। 2003 के बाद पहली बार बदले नियमों के बीच पूजा हो रही है। यहां सूर्योदय से सूर्यास्त तक विशेष हवन-पूजन होगा। इस मौके पर समिति ने सनातनियों से एकजुट होने का आह्वान कर ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने की अपील की है। वहीं हाई कोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला को हिंदू मंदिर के रूप में मान्यता मिलने के कारण पुरानी नियमावली हटाई जा रही है और नई नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
मंदिर में हो रही विशेष हवन-पूजन
भोजशाला उत्सव समिति के महाप्रबंधक हेमंत दौराया ने कहा कि भोजशाला ऐतिहासिक सरस्वती मंदिर है। वहीं हाई कोर्ट के अहम फैसले के बाद धार में उत्साह का माहौल है। उन्होंने कहा कि 2003 से ही सकल हिंदू समाज हर मंगलवार को यहां सत्याग्रह कर रहा था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद पहले मंगलवार यानी आज सकल हिंदू समाज का महा सत्याग्रह हो रहा है। उन्होंने कहा कि 23 साल का सत्याग्रह था कि भोजशाला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर साबित करना है। वहीं महा सत्याग्रह का मकसद है 300 मीटर के दायरे में मौजूद मस्जिद और कब्रों को हटाना।

भोजशाला को कोर्ट ने बताया हिंदू मंदिर
बता दें कि हाई कोर्ट ने शनिवार को आदेश देते हुए कहा था कि भोजशाला मां सरस्वती का मंदिर है। इस आदेश के बाद हिंदुओं को हर मंगलवार की जगह 365 दिन पूजा की अनुमति मिली थी। आदेश के बाद ASI ने उस बोर्ड को पोत दिया था जिसपर 2003 से हर मंगलवार को सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को और हर शुक्रवार को एक से तीन बजे तक मुसलमानों को नमाज के लिए प्रवेश देने की बात लिखी थी। वहीं इस आदेश के बाद 700 साल बाद पहली बार राजा भोज परिसर में अखंड ज्योति जलाई गई। इसके अलावा 2003 के बाद ये पहला मौका है जब मां वाग्देवी की प्रतीकात्मक प्रतिमा गर्भगृह में स्थापित की गई। वहीं पहली बार भोजशाला के आंदोलन में शामिल तीन शहीदों की तस्वीर भी गर्भगृह में रखी गई।

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