सिराथू/कौशांबी। जिले में मारपीट, तोड़फोड़ और घर में घुसकर हमले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि दबंगों ने पहले दुकान पर हमला किया, फिर घर में घुसकर जानलेवा वार किए और बाद में झूठे मुकदमे में फंसाने की कोशिश की।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, चंद्रेश मिश्रा की दुकान पर मामूली विवाद के बाद शिवम बनिया, संजय बनिया, विजय बनिया, मुकुल मिश्रा, बच्चा मिश्रा, योगेश मिश्रा, सुदामा मिश्रा, मंगलम मिश्रा और मनीष मिश्रा सहित कई लोगों ने मिलकर बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि हमलावरों ने दुकान उखाड़कर तालाब में फेंक दी।
घर में घुसकर हमला, बुजुर्ग पिता भी नहीं बख्शे
पीड़ित सुनील तिवारी ने बताया कि जब उन्होंने बीच-बचाव किया तो उन्हें भी लाठी, सरिया, फरसा और गरज से पीटा गया। इसके बाद दबंगों ने घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसकर सुनील तिवारी, ललई तिवारी, विकास तिवारी और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि बुजुर्ग पिता कन्हैया तिवारी, जो पहले से बीमार हैं, उन्हें भी नहीं छोड़ा गया और पत्थरों से वार किया गया। घर की महिलाओं के साथ धक्का-मुक्की की गई।
रास्ते में घेरकर फिर हमला
बताया गया कि कोर्ट से लौटते समय रास्ते में भी सुनील तिवारी, अनिल तिवारी और विकास तिवारी को रोककर पीटा गया। दुर्गेश मिश्रा सहित अन्य लोग भी मौजूद थे। किसी तरह जान बचाकर वे घर पहुंचे, लेकिन वहां भी हमलावरों ने पीछा नहीं छोड़ा।
पुलिस पर पक्षपात और जबरन कार्रवाई के आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि डायल 100 पर सूचना देने के बावजूद पुलिस ने उल्टा उन्हें ही हिरासत में ले लिया। बाद में जमानत करानी पड़ी। आरोप है कि हमलावरों ने सुनील तिवारी के खिलाफ धारा 307 (हत्या के प्रयास) में मुकदमा दर्ज करा दिया और उन्हें “गुंडा” बताकर जिला बदर की कार्रवाई कराई।
परिवार का कहना है कि पुलिस बिना नोटिस और कागज दिखाए घर पहुंची, दरवाजा तोड़कर घुस गई और महिलाओं को धक्का देकर सुनील तिवारी को जबरन घसीटते हुए ले गई।
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने उच्चाधिकारियों से निष्पक्ष जांच, झूठे मुकदमे की समीक्षा और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


