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बैनामा, नामांतरण और शिकायतों के बावजूद नहीं मिला कब्जा! 10 साल से जमीनी विवाद में फंसा परिवार, दबंगों पर धमकी और प्रशासन पर सुनवाई न करने का आरोप

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गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद के थाना कटरा बाजार क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सबगिपुर (सर्वांगपुर), परगना पहाड़ापुर में जमीन विवाद का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पिछले लगभग दस वर्षों से वह अपनी ही भूमि के लिए प्रशासनिक कार्यालयों और न्यायालयों के चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल सका। परिवार का कहना है कि बैनामा, राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज होने और कई बार शिकायत करने के बावजूद कथित दबंगों ने जमीन पर कब्जा कर रखा है और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।

पीड़ित उमाशंकर तिवारी ने बताया कि उनके परिवार का जमीन संबंधी विवाद वर्षों से चल रहा है। मामले में कई बार राजस्व न्यायालय में सुनवाई हुई, जिसमें एक बार उनके पक्ष में आदेश भी हुआ, जबकि दूसरी ओर गांव के ही पट्टीदार चंद्रशेखर तिवारी द्वारा न्यायालय से स्थगन आदेश (स्टे) प्राप्त कर लिया गया। इसी विवाद का लाभ उठाकर कथित रूप से विपक्षी पक्ष जमीन पर कब्जा बनाए हुए है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि सत्यदेव तिवारी की पत्नी नेहा तिवारी के नाम चार बिस्वा भूमि का विधिवत बैनामा कराया गया था। इसके बाद राजस्व अभिलेखों में उनका नाम भी दर्ज हो गया, लेकिन गांव के ही अनिल कुमार उर्फ सोनू तिवारी ने करीब दो-तीन माह पूर्व उक्त भूमि पर जबरन कब्जा कर लिया। आरोप है कि वहां लकड़ी, भूसा और अन्य सामान रखकर कब्जा मजबूत किया गया तथा विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई।

परिवार का कहना है कि इस संबंध में थाना कटरा बाजार में कई बार तहरीर दी गई, लेकिन पुलिस ने यह कहते हुए कार्रवाई से हाथ खड़े कर दिए कि मामला राजस्व विभाग का है। इसके बाद पीड़ितों ने उपजिलाधिकारी, तहसील प्रशासन, समाधान दिवस, आईजीआरएस पोर्टल, पुलिस अधिकारियों तथा मंडल स्तर तक शिकायतें भेजीं। दस्तावेजों के अनुसार प्रशासनिक जांच में विवाद को खातेदारों के मध्य अंश विभाजन से जुड़ा मामला बताते हुए सक्षम न्यायालय में वाद दायर करने की सलाह दी गई, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि इससे उनकी जमीन पर हुआ कथित अवैध कब्जा नहीं हट सका।

पीड़ितों का आरोप है कि अनिल कुमार उर्फ सोनू तिवारी और अन्य आरोपित आए दिन लाठी-डंडों के बल पर उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास करते हैं। इतना ही नहीं, उनके घर के मुख्य दरवाजे के सामने कूड़ा फेंककर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है ताकि परिवार गांव छोड़ने को मजबूर हो जाए। परिवार का कहना है कि महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किया गया और विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती है।

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन ने दोनों पक्षों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126/135 के तहत शांति भंग की आशंका में नोटिस भी जारी किया। इसके बावजूद पीड़ित परिवार का कहना है कि मूल समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है और उन्हें अपनी खरीदी हुई जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका।

उमाशंकर तिवारी ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर उनकी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे परिवार को राहत दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो किसी भी समय बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। वहीं, समाचार लिखे जाने तक जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष सामने नहीं आ सका है।

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