Wednesday, February 11, 2026
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बिना नोटिस पुलिस ने घर से निकाला, सालों से बने मकान पर दबंगों का कब्जा भिंड में कानून व्यवस्था पर सवाल, पीड़ित परिवार सड़क पर

भिंड।
जिला मुख्यालय के गोहद क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां वर्षों से रह रहे एक परिवार को कथित तौर पर बिना नोटिस, बिना सूचना और बिना किसी वैधानिक आदेश के उनके ही घर से बाहर निकाल दिया गया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने दबंगई दिखाते हुए उनका घरेलू सामान बाहर फेंक दिया और उसी मकान में विपक्षी पक्ष का सामान रखवा दिया।

पीड़ित महिला रेणु कुशवाहा ने बताया कि उनके पति रवि कुशवाहा, निवासी जिला भिंड, पिछले करीब 15 वर्षों से उक्त मकान में रह रहे थे। यह मकान उन्होंने अपनी मेहनत-मजदूरी से नहीं, बल्कि सरकारी आवास योजना के तहत निकली राशि से बनवाया था। रेणु कुशवाहा और रवि कुशवाहा ने आवास का पैसा निकलवाकर और कुछ अपनी मेहनत मजदूरी कर घर खड़ा किया था। आसपास के लोग भी इस बात के गवाह हैं कि परिवार लंबे समय से उसी घर में निवास कर रहा था।

पीड़ित परिवार के अनुसार, पहले भी इस जमीन को लेकर विवाद चला था, जिसमें वे जीत चुके थे। इसके बाद ही उन्होंने वहां स्थायी रूप से मकान का निर्माण कराया। इसके बावजूद विपक्षी पक्ष लगातार उनके घर पर दावा करता रहा।

रेणु कुशवाहा ने आरोप लगाया कि 16 जनवरी को अचानक पुलिस बल मौके पर पहुंचा। न तो कोई पूर्व सूचना दी गई, न ही कोई नोटिस थमाया गया और न ही कोई वैध आदेश दिखाया गया। इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें जबरन घर से बाहर निकलवा दिया। घर में रखा सामान बाहर फेंक दिया गया और उसी स्थान पर विपक्षी पक्ष का सामान रखवा दिया गया।

पीड़ित परिवार का कहना है कि इस कार्रवाई के दौरान न तो उनकी बात सुनी गई और न ही कोई कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई। महिला का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई दबंगों के दबाव में की गई, जिससे उनका परिवार पूरी तरह बेघर हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रेणु कुशवाहा और रवि कुशवाहा कहां रहें, जब उनका एकमात्र आवास भी उनसे छीन लिया गया।

स्थानीय लोगों में भी इस घटना को लेकर आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि कोई विवाद था तो उसका निपटारा न्यायालय के आदेश से होना चाहिए था, न कि इस तरह की अचानक और कथित गैरकानूनी कार्रवाई से। इस मामले ने जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन और जिला अधिकारियों से मांग की है कि उन्हें तत्काल उनके घर में वापस दिलाया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए और उन्हें फिर से सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए।

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