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“बांका के कटोरिया में सरकारी जंगल जमीन पर बड़ा फर्जीवाड़ा, 79 एकड़ भूमि निजी नाम दर्ज कराने का आरोप”

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जिला बांका थाना कटोरिया ग्राम बाराकोला अंतर्गत मौजा मोरवार होतात में बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन में हेराफेरी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कार्तिक यादव का पुत्र उमेश यादव ब्रह्मदेव यादव कांग्रेस यादव विनर देव यादव जोगिंदर यादव पांचो भाई के नाम से रसीद कट रहा है खाता संख्या 1 , पाना खेसरा 3/82/92/38 में दर्ज लगभग 79 एकड़ 57 डिसमल भूमि, जो पुराने खतियान में स्पष्ट रूप से गैर मजरूआ मालिक एवं जंगल जमीन के रूप में दर्ज है, उसे कथित रूप से फर्जी तरीके से निजी स्वामित्व में दर्शाने का प्रयास किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस जमीन में से लगभग 40 एकड़ 15 डिसमल भूमि को गलत ढंग से अपने नाम कराने की साजिश रची जा रही है।

इस संबंध में ग्राम बाराकोला, थाना कोरिया, जिला बोमा के स्थायी निवासियों शुकर यादव, विनोद यादव, शंकर यादव, कमलू यादव, जीतू यादव, वरयू यादव, वावर यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने जिला दण्डाधिकारी बोमा को संयुक्त आवेदन देकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन वर्षों से सरकारी जंगल भूमि रही है, जिस पर न तो किसी व्यक्ति को विधिवत बंदोबस्ती दी गई है और न ही किसी प्रकार का पर्चा निर्गत किया गया है।

ग्रामीणों के अनुसार यह भूमि लंबे समय से परती अवस्था में है और जंगल से आच्छादित है। आसपास के गांवों के लोग इस जमीन का उपयोग अपने मवेशियों के चराने, गोहाल, खेतों की पटवन तथा सीमित स्तर पर पेड़-पौधे लगाने के लिए करते आ रहे हैं। यह जमीन सार्वजनिक उपयोग में रही है और इसे कभी भी निजी संपत्ति के रूप में मान्यता नहीं दी गई।

आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि गांव के ही कार्तिक यादव, पिता स्वर्गीय योगेंद्र यादव, ने अपने पांच पुत्रों के नाम पर इस सरकारी जमीन को हड़पने की कोशिश की है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना किसी वैध दस्तावेज, बिना बंदोबस्ती और बिना सरकारी अनुमति के जमीन को निजी स्वामित्व में दिखाने की प्रक्रिया चल रही है, जो न केवल राजस्व नियमों का उल्लंघन है बल्कि सरकारी संपत्ति की खुली लूट भी है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर फर्जीवाड़े में संलिप्त लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, गलत तरीके से किए गए नामांतरण या प्रविष्टियों को रद्द किया जाए और सरकारी भूमि को सुरक्षित किया जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का यह मामला भविष्य में और भी गंभीर रूप ले सकता है।

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