सिद्धार्थनगर जिले के इटवा तहसील अंतर्गत ग्राम मधुबेनिया में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कब्जे का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गांव में करीब 10 बीघा सरकारी भूमि पर मंदिर और मदरसा बनाए जाने के साथ-साथ कई लोगों द्वारा मकान खड़े कर लेने का आरोप है। बताया जा रहा है कि यह पूरा खेल पूर्व प्रधान के संरक्षण और सहयोग से किया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार गांव के पुराने पोखरे के बगल में और काली जी के स्थान से सटी सरकारी जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। आरोप है कि इस भूमि पर बिना किसी वैध अनुमति के धार्मिक ढांचे और आवासीय निर्माण कर लिए गए हैं। जिन लोगों पर सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है, उनमें लवकुश, शिवदत्त, शल्लू, साधु, सलीम, साधु चांद अली, रमजान और कल्लू चमार के नाम सामने आए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी ने पूर्व प्रधान के सहयोग से सरकारी भूमि पर अवैध रूप से घर बना लिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ग्रामीणों द्वारा अक्टूबर 2025 में जिला अधिकारी सिद्धार्थनगर को लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया था। प्रार्थना पत्र में पूरे मामले की जानकारी देते हुए अवैध कब्जा हटवाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी। इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की जांच हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई देखने को मिली है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की चुप्पी के कारण अवैध कब्जाधारियों के हौसले और बढ़ गए हैं। सरकारी जमीन पर खुलेआम निर्माण जारी है और गांव की सार्वजनिक संपत्ति धीरे-धीरे निजी कब्जे में जाती जा रही है। इससे गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और भविष्य में किसी बड़े विवाद की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकारी जमीनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है। यदि समय रहते प्रशासन सख्त कदम नहीं उठाता तो सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे का यह चलन और भी तेजी से बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से मांग की है कि मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराई जाए, अवैध कब्जे तत्काल हटवाए जाएं और दोषी व्यक्तियों व संरक्षण देने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।


