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पंजाब में मजदूरी, घर में टूटा भरोसा: दो बच्चों और 5 लाख लेकर पत्नी लापता, पति बोला– ‘बस मेरे बच्चे लौटा दो’

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बेगूसराय/पंजाब।
बेगूसराय जिले के गढ़पुर थाना क्षेत्र से जुड़ा एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। 24 वर्षीय सुनील कुमार, पिता कोकई यादव, जो वर्तमान में पंजाब में मजदूरी कर परिवार पाल रहे थे, आज खुद को पूरी तरह अकेला और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। सुनील का आरोप है कि उनकी पत्नी मुस्कान बानो उनके दो मासूम बच्चों और करीब 5 लाख रुपए की जमा पूंजी लेकर अचानक घर छोड़कर चली गई और अब किसी और से दूसरी शादी कर ली है।

सुनील कुमार ने बताया कि उनके माता-पिता पहले ही नहीं रहे। परिवार के नाम पर पत्नी और दो छोटे बच्चे ही उनकी पूरी दुनिया थे। पत्नी मुस्कान बानो से उनकी शादी को करीब 6 साल हो चुके हैं। दोनों के दो बच्चे हैं—एक 4 साल की बेटी और 6 महीने का बेटा। मुस्कान बानो पूर्णिया जिले के भवानीपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता एमडी आजाद और माता असमीना खातून हैं।

सुनील का कहना है कि मुस्कान बानो के साथ उनकी शादी दो बार कराई गई थी—एक बार सामाजिक तौर पर और दूसरी बार कोर्ट मैरिज के जरिए, ताकि रिश्ते को कानूनी मजबूती मिल सके। सुनील ने मजदूरी कर-करके जो भी कमाया, वह घर और बच्चों के भविष्य के लिए पत्नी को सौंपते रहे। इसी तरह करीब 5 लाख रुपए की रकम इकट्ठा हो गई।

23 नवंबर की सुबह बदली जिंदगी
23 नवंबर की सुबह करीब 10:30 बजे, जब सुनील रोज की तरह पंजाब के ममखोर इलाके में काम पर गए थे, उसी दौरान मुस्कान बानो दोनों बच्चों को लेकर घर से चली गई। साथ में वह पूरी जमा पूंजी भी ले गई। काफी तलाश और पूछताछ के बाद अब सुनील को जानकारी मिली है कि मुस्कान ने पानीपत जाकर दूसरी शादी कर ली है।

जब सुनील ने इस बारे में ससुराल पक्ष से बात की तो उनका आरोप है कि जवाब और भी ज्यादा चौंकाने वाला था। ससुराल वालों ने कथित तौर पर कहा—“उसकी जिंदगी है, जो करना था कर लिया। तुम भी दूसरी शादी कर लो।”

‘दूसरी शादी नहीं, बच्चे चाहिए’
सुनील की आवाज भर्राई हुई है। वह कहते हैं, “हम दूसरी शादी क्यों करें? हमें हमारी बेटी और बेटा वापस चाहिए। वह नहीं आना चाहती तो न आए, लेकिन हमारे बच्चों को लौटा दे। हमारे माता-पिता नहीं हैं, परिवार में कोई नहीं है। वही बच्चे हमारे जीने का सहारा हैं।”

सुनील का आरोप है कि न सिर्फ उन्हें भावनात्मक रूप से तोड़ा गया, बल्कि आर्थिक रूप से भी पूरी तरह खाली कर दिया गया। अब वह प्रशासन और समाज से सिर्फ एक ही मांग कर रहे हैं—उनके मासूम बच्चों को उन्हें वापस दिलाया जाए।

मामला अब इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि एक मजदूर पिता, जिसने मेहनत से घर बसाया, आज अपने ही बच्चों के लिए दर-दर भटकने को मजबूर क्यों है?

 

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