नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कीर्ति नगर थाना क्षेत्र स्थित मानसरोवर गार्डन से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने किरायेदारों की सुरक्षा, संपत्ति के अधिकार और पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 24–25 वर्षों से एक मकान में रह रहे राजेंद्र कुमार के परिवार का आरोप है कि पिछले डेढ़ साल से उनके घर पर ताला लगा हुआ है, जिसके कारण वे अपने ही घर में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं। परिवार का कहना है कि इस दौरान उनका घरेलू सामान, नकदी और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हो गए, जबकि पुलिस से शिकायत के बावजूद उन्हें अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली।
पीड़ित परिवार के अनुसार, वे कुछ समय के लिए अपने पैतृक गांव झारखंड गए थे। लौटने पर उन्होंने देखा कि उनके द्वारा लगाए गए ताले को काटकर मकान पर दूसरा ताला लगा दिया गया है। उनका आरोप है कि इस दौरान उन्हें घर में घुसने नहीं दिया गया और वे रिश्तेदारों के यहां रहने को मजबूर हो गए।
परिवार का कहना है कि कुछ समय पहले उन्हें सूचना मिली कि मकान मालिक बिना किसी जानकारी के उनके घर का सामान बाहर निकाल रहा है। जब वे मौके पर पहुंचे तो काफी सामान गायब मिला। उनका आरोप है कि घर में रखे स्कूल और कॉलेज के प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड सहित कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी नहीं मिले। पीड़ितों का दावा है कि जब उन्होंने दस्तावेज वापस मांगे तो कथित तौर पर उन्हें कहा गया कि दस्तावेज उनके पास हैं, लेकिन वापस नहीं दिए जाएंगे।
राजेंद्र कुमार और उनके बेटे उत्तम कुमार का कहना है कि उन्होंने कई बार स्थानीय पुलिस से शिकायत की और कानूनी मदद भी मांगी, लेकिन अब तक न तो उन्हें मकान का कब्जा मिला और न ही गायब सामान या दस्तावेज बरामद किए गए। उनका आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से उनका परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है।
परिवार ने आरोप लगाया है कि मकान मालिक अनिल गुलाठी, जो वर्तमान में गुरुग्राम में रहते हैं, ने कथित रूप से मकान पर कब्जा कर लिया है। उनका कहना है कि वर्षों से जिस घर में वे रह रहे थे, उसकी स्थिति भी अब पूरी तरह बदल चुकी है और उसे नुकसान पहुंचाया गया है।
पीड़ित परिवार अब मीडिया के माध्यम से दिल्ली पुलिस, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। उनका कहना है कि उन्हें उनके घर का वैधानिक कब्जा दिलाया जाए, गायब सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए जाएं तथा यदि जांच में किसी भी प्रकार की अवैध कार्रवाई सामने आती है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस पूरे मामले में पीड़ित परिवार ने मीडिया से ग्राउंड लेवल पर जांच कर उनकी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने की अपील की है। उनका कहना है कि उन्हें अब न्यायपालिका और मीडिया से ही उम्मीद बची है।
