एटा।
जनपद के थाना मलावन क्षेत्र के गांव आसपुर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने दबंगों पर घर में घुसकर मारपीट, लूटपाट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का आरोप है कि स्थानीय थाना पुलिस ने कई बार प्रार्थना पत्र देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे मजबूर होकर उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।
पीड़िता प्रियंका देवी पत्नी राजकुमार का कहना है कि उनके पति हरियाणा के सोनीपत में मजदूरी करते हैं और अक्सर घर से बाहर रहते हैं। इसी का फायदा उठाकर गांव के कुछ लोग उन्हें कमजोर और अकेला समझकर लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं। आरोप है कि दबंग उनके घर में चोरी करते हैं, रास्ता रोकते हैं और बच्चों को स्कूल जाने से भी रोकते हैं।
प्रियंका देवी के अनुसार, 1 दिसंबर 2025 से 3 दिसंबर 2025 के बीच उन्होंने थाना मलावन में लगातार तीन प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद आरोपियों के हौसले और बढ़ गए। पीड़िता का आरोप है कि मनोज, रामपाल पुत्रगण रामभरोसे, पूजा पत्नी रामपाल, चांदनी पत्नी विनीत कुमार, चंद्रशेखर पुत्र विद्याप्रसाद और मौनिका देवी पत्नी चंद्रशेखर ने उनके घर में घुसकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की।
महिला का कहना है कि आरोपियों ने उनके कपड़े फाड़ दिए, बच्चों के सामने उन्हें घसीटकर बाहर फेंक दिया और घर में रखे 20 हजार रुपये नकद लूट लिए। यह रकम उनके पति ने मजदूरी करके बच्चों की पढ़ाई के लिए भेजी थी। इसके अलावा सोने की चेन, कानों की सोने की झुमकी और चांदी की पाजेब भी लूट ली गई।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। पति के घर पर न रहने की वजह से आरोपी उन्हें और उनके बच्चों को डराकर घर से निकालने की कोशिश कर रहे हैं। कई बार बच्चों को रात में भूखा रहना पड़ा और वे दहशत में जीने को मजबूर हैं।
पीड़िता ने अपने पति के सोनीपत में मजदूरी करने के प्रमाण के तौर पर वहां की फैक्ट्री से जारी कार्य प्रमाण पत्र भी संलग्न किया है, जिसमें उनके पति के काम और मजदूरी का उल्लेख है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर कोई सुनवाई न होने से महिला और उसके बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
अब पीड़िता ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, थाना मलावन पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं कि बार-बार शिकायत के बावजूद आखिर क्यों कार्रवाई नहीं की गई।


