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दिल्ली की निजी कंपनी पर मजदूर के शोषण का आरोप गौतम बुद्ध नगर के युवक से 12 से 13 घंटे काम, वेतन देने से किया इंकार

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नई दिल्ली। दिल्ली की एक निजी कंपनी पर मजदूर के शोषण का गंभीर आरोप सामने आया है। उत्तर प्रदेश के जिला गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले एक युवक से लंबे समय तक 12 से 13 घंटे तक काम कराने और पूरी सैलरी न देने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक की मां ने कंपनी प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए अपने बेटे की मेहनत का पूरा हिसाब मांगा है।

पीड़ित युवक की मां किरण देवी ने बताया कि उनका बेटा पिछले करीब एक से दो साल से दिल्ली के कापसहेड़ा इलाके में स्थित एक निजी कंपनी में काम कर रहा था। कंपनी का कार्यालय श्री साई कॉम्प्लेक्स 75 बटा 2 तीसरी मंजिल आईजीएल सीएनजी पंप के पीछे कापसहेड़ा नई दिल्ली में बताया जा रहा है।

परिजनों का कहना है कि कंपनी में कर्मचारियों से सुबह करीब छह बजे से काम शुरू कराया जाता है और दोपहर करीब दो बजे लंच दिया जाता है। इसके बाद भी काम देर तक चलता रहता है। यानी कर्मचारियों से लगातार कई घंटे तक काम कराया जाता है। आरोप है कि इस दौरान कर्मचारियों को न तो पर्याप्त आराम दिया जाता है और न ही तय समय के अनुसार वेतन दिया जाता है।

पीड़ित परिवार के अनुसार युवक से लगातार 12 से 13 घंटे तक काम कराया गया लेकिन उसकी पूरी सैलरी नहीं दी गई। कई बार वेतन काट लिया गया और जब पैसे का हिसाब मांगा गया तो कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इससे परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान है।

परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जब युवक ने काम छोड़ने की बात कही और अपना बकाया वेतन मांगा तो कंपनी ने उसका कार्ड तीन दिन बाद ही बंद कर दिया। इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन युवक का इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहा है और बकाया वेतन देने से भी इंकार कर रहा है।

पीड़ित युवक का कहना है कि जब वह अपना पैसा लेने के लिए कंपनी पहुंचता है तो वहां के कर्मचारी और अधिकारी उसके साथ बदतमीजी से बात करते हैं। यहां तक कहा जाता है कि कंपनी के नियम किसी एक कर्मचारी की वजह से नहीं बदलेंगे और जो करना है कर लो पैसा नहीं मिलेगा।

मां किरण देवी का कहना है कि उनका बेटा एक गरीब परिवार से है और मेहनत मजदूरी करके परिवार का सहारा बनने की कोशिश कर रहा था। लेकिन कंपनी में उससे बंधुआ मजदूरों की तरह काम लिया गया और मेहनत की कमाई भी रोक ली गई।

पीड़ित परिवार ने प्रशासन और श्रम विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल उनके बेटे का मामला नहीं है बल्कि ऐसी कई निजी कंपनियां हैं जहां कर्मचारियों से तय समय से कहीं अधिक काम कराया जाता है और वेतन के नाम पर शोषण किया जाता है।

परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला और बकाया वेतन नहीं दिया गया तो वे श्रम विभाग और प्रशासन के उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे। वहीं इस घटना ने एक बार फिर निजी कंपनियों में कर्मचारियों के काम के घंटे और मजदूरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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