गिरफ्तार किए गए शिकारियों के पास से हथियारों का जखीरा मिला है। इसमें देसी बंदूकें, तीर और धनुष शामिल हैं। ये लोग जंगल में अवैध तरीके से जानवरों का शिकार करते थे।ओडिशा वन विभाग ने वन्यजीव अपराध के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मयूरभंज जिले के सिमिलिपाल वन्यजीव अभयारण्य से 39 शिकारियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरी कार्रवाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस निगरानी कैमरों की मदद से संभव हो सकी।
AI कैमरों में कैद हुईं शिकारियों की गतिविधियां
जानकारी के अनुसार, सिमिलिपाल अभयारण्य के दक्षिण डिवीजन के भीतर इन शिकारियों की गतिविधियां एआई कैमरों में कैद हुईं। जंगल में लगाए गए ये अत्याधुनिक कैमरे 24 घंटे रियल टाइम मॉनिटरिंग करते हैं। जैसे ही कैमरों ने संदिग्ध गतिविधि दर्ज की, सिस्टम ने उनकी सटीक लोकेशन और समय की जानकारी वन अधिकारियों को तुरंत उपलब्ध करा दी।
जंगल की घेरेबंदी कर 39 शिकारी गिरफ्तार
एआई सिस्टम से मिले अलर्ट के बाद स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स और वन विभाग की टीम ने तुरंत ज्वाइंट ऑपरेशन चलाया। जंगल के अंदर घेराबंदी कर छापेमारी की गई, जिसमें कुल 39 लोगों को पकड़ा गया।
भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद
छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। जब्त सामान में नौ देसी बंदूकें, 20 धनुष, बड़ी संख्या में धारदार हथियार, पर्याप्त मात्रा में विस्फोटक और शिकार में इस्तेमाल होने वाले कई उपकरण शामिल हैं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि जंगल में बड़े पैमाने पर शिकार की तैयारी की जा रही थी।
AI ने निभाया बड़ा रोल
बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी अभयारण्य के पास उदला थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं। एआई आधारित निगरानी प्रणाली से मिली सटीक जानकारी ने इस बड़े शिकार अभियान को नाकाम करने में अहम भूमिका निभाई।वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
वन विभाग ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की आगे की जांच जारी है। इस कार्रवाई को वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जहां आधुनिक तकनीक और सतर्क प्रशासन की मदद से समय रहते बड़ी घटना को टाल दिया गया।


