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दिल्ली में बुजुर्ग को 5 साल से नहीं मिला बिजली कनेक्शन, वैध पावर ऑफ अटॉर्नी और हलफनामे के बाद भी बीएसईएस की अनदेखी

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दिल्ली के खजान बस्ती, नांगल राय इलाके से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक 60 वर्षीय बुजुर्ग नागरिक पिछले पांच वर्षों से बिजली कनेक्शन के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। खसरा नंबर 12 और 13, प्लॉट नंबर WZ-161/13-C, नया नंबर C-82, खजाना बस्ती, नई दिल्ली स्थित संपत्ति के लिए अजीत सिंह द्वारा वर्ष 2025 में बीएसईएस राजधनी पावर लिमिटेड को सभी वैध दस्तावेज और शपथ पत्र देने के बावजूद आज तक बिजली मीटर नहीं लगाया गया।

दस्तावेजों के अनुसार, अजीत सिंह के पास वर्ष 1981 से जारी ब्लड रिलेशन पावर ऑफ अटॉर्नी मौजूद है, जिसके तहत उन्हें खजाना बस्ती स्थित लगभग 160 वर्ग गज की भूमि का वैध जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी धारक बनाया गया है। इस जमीन की सीमाएं और खसरा विवरण भी आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज हैं। इसी आधार पर अजीत सिंह ने दिसंबर 2025 में बीएसईएस को शपथ पत्र देकर पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल के लिए बिजली कनेक्शन की मांग की थी।

शपथ पत्र में उन्होंने साफ लिखा है कि यही उनका एकमात्र प्लॉट है और भविष्य में किसी अन्य स्थान पर बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि यदि कोई जानकारी गलत पाई जाती है तो बीएसईएस कानूनी कार्रवाई कर सकता है। इसके बावजूद बिजली विभाग द्वारा बार-बार नए-नए बहाने बनाकर आवेदन लटकाया जा रहा है।

पीड़ित बुजुर्ग का कहना है कि पहले उनसे एमसीडी की बुक लाने को कहा गया, जिसे उन्होंने उपलब्ध करा दिया। इसके बाद विभाग ने कहा कि इमारत में हर कमरे में सिंक और किचन नहीं है, इसलिए मीटर नहीं लगाया जा सकता। मजबूरी में उन्होंने अपनी जेब से पैसे खर्च कर सिंक और किचन भी बनवाए, लेकिन फिर भी बिजली कनेक्शन नहीं दिया गया।

करीब छह बार आवेदन देने के बावजूद आज तक कोई समाधान नहीं निकला। 60 वर्ष की उम्र में लगातार कार्यालयों के चक्कर काटना, फाइलें जमा करना और हर बार नई शर्तें पूरी करना पीड़ित के लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से भारी पड़ रहा है। उनका कहना है कि बिना बिजली के रहना आज के दौर में किसी सजा से कम नहीं है।

यह मामला बिजली वितरण कंपनी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वैध दस्तावेज, शपथ पत्र और सभी औपचारिकताओं के बाद भी यदि किसी नागरिक को वर्षों तक बिजली से वंचित रखा जाए, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और उत्पीड़न की ओर इशारा करता है। अब पीड़ित ने मांग की है कि उन्हें तुरंत बिजली कनेक्शन दिया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

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