Thursday, February 12, 2026
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चोलापुर में बुजुर्ग को घेरने की कथित साजिश, जमीन विवाद में जातिगत उत्पीड़न और पेड़ कटवाने का गंभीर आरोप

वाराणसी | चोलापुर

चोलापुर थाना क्षेत्र के धरसौना गांव में जमीन विवाद को लेकर 65 वर्षीय बुजुर्ग उदय नारायण तिवारी के साथ लंबे समय से कथित उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित ने गांव के दलित बस्ती लोगों के साथ-साथ थाना प्रभारी और लेखपाल पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि सरकारी नाले और उनकी निजी जमीन को लेकर चल रहे विवाद की आड़ में उन्हें जातिगत रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

पीड़ित उदय नारायण तिवारी पुत्र स्वर्गीय ठाकुर प्रसाद तिवारी के अनुसार, कई वर्ष पूर्व जिलाधिकारी के आदेश पर सरकारी भूमि और उनकी निजी जमीन के बीच नाला निकलवाया गया था। इसके बाद उन्होंने अपनी जमीन की सीमा स्पष्ट करने के लिए कंटीले तार से बाउंड्री करवाई। आरोप है कि इसी के बाद से गांव के कुछ लोग उनसे रंजिश रखने लगे और जातिवादी मानसिकता के तहत उन्हें परेशान करने लगे।

उदय नारायण तिवारी का कहना है कि नाले के इस पार उनका घर अकेला स्थित है, जबकि दूसरी ओर लगभग 500 लोगों की आबादी रहती है। इस कारण वे सभी एकजुट होकर उन्हें डराने, दबाव बनाने और जमीन छोड़ने के लिए मजबूर करने का प्रयास कर रहे हैं। पीड़ित के अनुसार, उन्हें आए दिन गाली-गलौज, पत्थरबाजी और घर गिराने की धमकियां दी जाती हैं।

पीड़ित ने आरोप लगाया कि 12 जनवरी की सुबह लगभग 10 से 11 बजे के बीच उनकी निजी जमीन पर लगे करीब 50 वर्ष पुराने हरे-भरे बबूल के पेड़ों को जबरन काट दिया गया। इस मामले में शीतला प्रसाद पुत्र फूलचंद को पेड़ कटवाने वाला मुख्य आरोपी बताया गया है। पीड़ित के अनुसार, घटना के समय दिनेश (पिता छोटेलाल), शीतला प्रसाद(पुत्र फूलचंद), सूरज सहित कई अन्य लोग मौके पर मौजूद थे। वहीं रामदुलारे (पिता बैजनाथ) और पवारू (पिता बैजनाथ) पर भी घटना में संलिप्त होने का आरोप लगाया गया है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि पीड़ित ने थाना प्रभारी दीपक कुमार और लेखपाल सतीश चंद्र राम पर भी साजिश में शामिल होने का दावा किया है। पीड़ित का कहना है कि आरोपियों ने कथित रूप से पैसे देकर पेड़ कटवाए और शिकायत के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। उल्टा जब उन्होंने विरोध दर्ज कराया तो उन्हें ही डराने और चुप रहने का दबाव बनाया गया।

उदय नारायण तिवारी का कहना है कि वे लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिला। उन्होंने पूरे मामले को जातिगत उत्पीड़न बताते हुए कहा कि एक अकेले बुजुर्ग को सामाजिक दबाव और प्रशासनिक चुप्पी के सहारे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

पीड़ित ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा उन्हें और उनकी संपत्ति को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। समाचार लिखे जाने तक इस मामले में पुलिस या प्रशासन का कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका था।

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