Home National राजसमंद में प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा मामला सामने आया है

राजसमंद में प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा मामला सामने आया है

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जहां ग्राम पंचायत पनोतिया में कथित अवैध पट्टों और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के बावजूद महीनों बीत जाने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ता मुन्नाशाह ने जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट को कई बार आवेदन देकर मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की, लेकिन अब तक न तो जांच रिपोर्ट सामने आई और न ही सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई गई।

बताया जा रहा है कि जिला प्रशासन ने 6 नवंबर 2025 को संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इसके अलावा 8 अगस्त 2025 को आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी देने के भी आदेश जारी किए गए थे। इसके बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी मामराज मीणा द्वारा जरूरी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जबकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी बृजमोहन बैरवा भी जांच को आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि कहीं न कहीं जानबूझकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासनिक आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है। निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करना न केवल लापरवाही है बल्कि शासन व्यवस्था की साख पर भी सवाल खड़ा करता है। वहीं आरटीआई के तहत सूचना नहीं देना सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन माना जा रहा है।

शिकायतकर्ता ने अब इस मामले को भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए इसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज कर एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्वतंत्र एजेंसी से जांच नहीं कराई गई तो साक्ष्य नष्ट होने की पूरी संभावना है।

उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए, सभी दस्तावेजों को सुरक्षित किया जाए और पूरे मामले में एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं। साथ ही सरकारी धन की वसूली भी सुनिश्चित की जाए।

लगातार अनदेखी और कार्रवाई के अभाव से परेशान शिकायतकर्ता अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। यह मामला न केवल एक पंचायत तक सीमित है बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में कब तक चुप्पी साधे रहता है या फिर कोई बड़ी कार्रवाई कर सच्चाई को सामने लाने का साहस दिखाता है।

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