मंदसौर/भिलाई।
17 वर्षीय शांति देवी, जिसने अभी हाल ही में 18 की उम्र पार की है, उसकी जिंदगी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। आठ महीने पहले तक वह मां बनी थी, लेकिन अब उसका मासूम बेटा वेदांश राजपूत उसकी गोद से छीन लिया गया है। आरोप सीधे पति नारायण सिंह राजपूत और उसकी मां सीता देवी पर हैं।
जानकारी के अनुसार, शांति देवी की शादी 14 जनवरी 2024 को मंदसौर निवासी नारायण सिंह राजपूत (पुत्र भगवान सिंह राजपूत, मकान नंबर 06, वार्ड 01, घेचाली, मंदसौर) से हुई थी। परिवार ने इस रिश्ते को सामान्य मान लिया था, लेकिन शादी के बाद खुलासा हुआ कि नारायण सिंह पहले से शादीशुदा था। उसकी पहली पत्नी राधा है, जो संतान जन्म देने में असमर्थ बताई जाती है।
इसी बीच, 17 अगस्त 2025 की देर रात 2 बजे का चौंकाने वाला वाकया सामने आया। आरोप है कि नारायण सिंह अपनी मां सीता देवी के साथ शांति देवी के मायके, शास्त्री नगर, कैंप 1, भिलाई दुर्ग (छत्तीसगढ़) पहुंचा और वहां से मासूम वेदांश को उठा ले गया। पीड़िता का कहना है कि यह सब उसकी मर्जी के खिलाफ हुआ और उसके आंखों के सामने से उसका बच्चा छीन लिया गया।
बड़ी बात यह है कि पीड़िता जब थाने पहुंची तो पुलिस ने उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। उसका आरोप है कि पुलिस ने कोई कार्रवाई तक नहीं की और मामले को टाल दिया। अब शांति देवी मीडिया और प्रशासन से गुहार लगा रही है कि उसका बच्चा उसे वापस दिलाया जाए।
परिजनों का कहना है कि नारायण सिंह और उसका परिवार अक्सर गुजरात में काम करने जाता है। ऐसे में बच्चे की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। शांति का कहना है कि वह इकलौते सहारे अपने बेटे से वंचित कर दी गई है।
आपको बता दे पाती शांति के साथ मारपीट भी करता था और ससुराल में प्रताड़ित भी करता है।
अब सवाल यह है कि जब पुलिस ही मौन है तो एक मां अपने मासूम बेटे को कैसे वापस पाएगी? शांति देवी के आंसू और उसकी अपील आज पूरे समाज से न्याय की पुकार कर रही है।
स्थानीय संवाददाता ई खबर मीडिया की रिपोर्ट