दीपा करमाकर पहली भारतीय जिम्नास्ट है जिन्होंने एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता है। इसी के साथ उन्होंने इतिहास रच दिया है। करमाकर ने ये गोल्ड मेडल ताशकंद में एशियाई महिला कलात्मक जिमनास्टिक चैंपियनशिप में हासिल किया।
भारत की जिमनास्ट दीपा करमाकर ने ताशकंद में जारी एशियाई महिला कलात्मक जिमनास्टिक चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। दीपा करमाकर सीनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट हैं। बता दें कि व्यक्तिगत वॉल्ट के फाइनल में करमाकर 13.566 के औसत स्कोर के साथ आठ जिमनास्टों के बीच शीर्ष पर रहीं। अपने दोनों प्रयासों में, 30 साल की भारतीय करमाकर को 13.566 के समान स्कोर प्राप्त हुए। वहीं उत्तर कोरियाई किम सोन हयांग (13.466) और जो क्योंग ब्योल (12.966) ने रजत और कांस्य पदक जीते।
एशियन चैंपियनशिप में दूसरी बार जीता मेडल
इस साल 2024 में एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली भारत की जिमनास्ट दीपा करमाकर ने इससे पहले भी साल 2015 में हिरोशिमा में इसी स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। वहीं साल 2016 में रियो ओलंपिक में वॉल्ट फाइनल में चौथे स्थान पर रहने के बाद उन्हें पहचान मिली। दीपा करमाकर ने साल 2014 में ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक भी जीता था।
डोप टेस्ट में हुई थी फेल
दरअसल फरवरी 2023 में दीपा करमाकर डोप टेस्ट में फेल हुई थी। जिस वजह से उन पर बैन भी लगाया गया था। अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी ने उस समय बताया था कि दीपा करमाकर को अंतरराष्ट्रीय जिम्नास्टिक महासंघ की ओर से आउट ऑफ कॉम्पिटिशन लिए गए सैंपल में प्रतिबंधित दवा हाइजेनामाइन लेने का दोषी पाया गया था। वहीं दीपा करमाकर के सैंपल 11 अक्टूबर 2021 को प्रतियोगिता के बाद लिए गए थे। उन पर लगाए गए बैन 10 जुलाई 2023 तक जारी रहा था।
दीपा करमाकर का यहां तक का सफर इतना आसान नहीं था। साल 2022 में हांग्झू में हुए एशियन गेम्स में दीपा को भारत के जिम्नास्टिक स्क्वाड में जगह नहीं मिली थी। जहां पर जिमनास्टिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने दीपा करमाकर का नाम भेजा था लेकिन केंद्रीय खेल मंत्रालय की आखिरी मंजूरी मिलने से पहले ही उनका नाम इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन ने हटा दिया था। इसके लिए कारण बताया गया कि वो लंबे समय से खेल का हिस्सा नहीं है इसलिए उन्हें बाहर किया गया था।










जिसका टिकट तक भी नहीं बनाया जाता न जाने यह ये ऊपरी पैसा कमाने का धंधा कब से कर रहे हैं इस तरह से यह सरकार की आंखो में धूल झोंक कर अंधी कमाई कमा रहे हैं एवं आम जनता को सफर के दौरान अनेको परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं यह सब कुछ संभव कंडक्टर एवं बस चालक की मिलीभगत से हो पा रहा हैं। उसी बस में सवार हमारे संवादाता रजत पांडेय ने जब इस पर आम नागरिक की तरह से बस कंडक्टर से वार्ता की तब ये सारा मामला पता चल पाया वार्तालाप के दौरान बस कंडक्टर कहने लगा की सरकार द्वारा प्राप्त पैसों से पेट कैसे पाले इसलिए हमे इस तरह से ऊपरी आमदनी बनानी पड़ती हैं। इस पर यदि जल्द ही अंकुश नही लगाया गया तो इन जैसे कंडक्टर की वजह से आम जनता का शोषण होता रहेगा । इन्ही जैसे कंडक्टरों की वजह से देश में भ्रष्टाचार कभी भी खत्म होने का नाम नहीं लेता हैं।