लखनऊ: – लखनऊ जिले के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रेम नगर बड़ौदा हुसैन वादी, बालागंज में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। नैना चौरसिया, जो अपने पिता कमलेश चौरसिया की बेटी है, इस हादसे की शिकार हुई। 21 मई 2024 हादसे का समय लगभग 11:30 बजे का है जब नैना अपने घर पर थी।
पास ही रहने वाली शिफा जी की बहन की लड़की नैना को खेलने के लिए बुलाकर ले गई। इसी दौरान शिफा जी ने नैना को अपने कपड़े सूखाने के लिए छत पर भेजा। छत पर 11,000 वोल्ट की हाई टेंशन तारें लगी हुई थीं।कपड़े सुखाने के दौरान, नैना इन तारों के संपर्क में आ गई, जिससे उसे जबरदस्त करंट लगा। इतने उच्च वोल्टेज का करंट लगने से नैना की स्थिति गंभीर हो गई। तत्काल ही परिवार और पड़ोसियों ने नैना को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी हालत अत्यंत नाजुक बताई जा रही है।
नैना की दुर्घटना के बाद विवाद: पिता कमलेश चौरसिया की पैसों की मांग पर शिफा जी का इनकारलखनऊ, 21 मई 2024 – प्रेम नगर बड़ौदा हुसैन वादी, बालागंज में 11,000 वोल्ट तार की चपेट में आने से नैना चौरसिया की गंभीर हालत के बाद एक नया विवाद उभरकर सामने आया है।
नैना के पिता, कमलेश चौरसिया, ने शिफा जी और उनके परिवार से नैना के इलाज और मासिक खर्च के लिए पैसों की मांग की है।घटना के बाद नैना की चिकित्सा देखभाल और अन्य खर्चों के लिए कमलेश चौरसिया ने शिफा जी से सहायता की उम्मीद की।
कमलेश का कहना है कि नैना को खेलने के लिए बुलाने और फिर उसे कपड़े सुखाने के लिए छत पर भेजने की जिम्मेदारी शिफा जी की थी, इसलिए नैना की चिकित्सा और देखभाल के खर्च में उन्हें भी योगदान देना चाहिए।हालांकि, शिफा जी ने स्पष्ट रूप से इस मांग को ठुकरा दिया। शिफा जी का कहना है कि यह हादसा एक दुर्घटना थी और इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी, इसलिए वे नैना के मासिक खर्च के लिए पैसे नहीं देंगी।इस विवाद ने स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना दिया है। कुछ लोग कमलेश चौरसिया के पक्ष में हैं
ई खबर मीडिया के लिए मोहम्मद अख्तर की रिपोर्ट







4 जुलाई, 2024 को साजिद के गाँव में उनकी मिट्टी दी गई। उनके परिवार में दो पुत्र, एक पुत्री और उनकी पत्नी बरजीश हैं। परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति साजिद ही थे, और उनकी मृत्यु के बाद उनके छोटे-छोटे बच्चों और पत्नी के सामने जीवनयापन का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
बिना नोटिस के धारा 144, न्यायालय आदेश की अवहेलना
सत्रोहन साहनी ने जानकारी दी कि उनके दादा के नाम की जमीन को उनकी दादी ने चाचा के नाम कर दी थी। इस पर कोर्ट में केस किया गया और कोर्ट ने शंकर साहनी के पक्ष में फैसला सुनाया। बावजूद इसके, प्रशासन की मिलीभगत से उनके परिवार को परेशान किया जा रहा है।
सत्रोहन साहनी ने मीडिया के माध्यम से सरकार से अपील की है कि उनके घर को बनने दिया जाए और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।